श्री कृपालु महाराज
जीवन चरित
श्री श्री कृपालु महाराज वाणी संग्रह
प्रेम के भिखारी कृष्ण गोविंद राधे
श्री कृष्ण प्रेम के याचक एवं श्री राधा प्रेम की साहूकार हैं ।
बताओ राधे ! जाऊँ काके द्वार
हे मोहन मोहिनी राधे ! तुम ही बताओ, तुम्हें छोड़कर यह दीन भिखारी अब और किसके द्वार पर जाय । तुम्हारे सिवा ऐसा कौन उदार है, जो बिना साधन के ही दीनों को अ...
उर में बिठाना चाहो जग संग श्यामा
उर में बिठाना चाहो जग संग श्यामा। अंधकार रवि कभु रहे एक ठामा॥ - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (58) जिस हृदय में जगत का निवास है, ...
श्याम कहें राधे कहु गोविंद राधे
श्याम कहते हैं “राधे” कहो, श्री राधे कहती हैं कि “श्याम” कहो, परंतु तुम तो “राधे श्याम" का गुणगान करो।
श्यामा रटें श्याम श्याम श्याम रटें श्यामा
श्री राधा निरन्तर श्याम श्याम की रटना करती हैं। श्री कृष्ण नित्य राधे राधे रटते हैं।ब्रजांगनाएँ रात-दिन श्यामा श्याम के नामामृत का पान करती हैं।
राधे जू की कृपा शक्ति गोविंद राधे
श्री राधे जू की कृपा शक्ति अनहोनी को भी होनी कर देती है।
चलु मन वृन्दावन गोविंद राधे
हे मन, वृंदावन की ओर चल, जिस दुर्लभ वृंदावन रस के आगे वैकुंठ धाम का रस भी न्योछावर है।
लखो रे मन, वृंदा विपिन-बहार
अरे मन दिव्य वृन्दावन की अलौकिक बहार देख, जहाँ पर प्रिया-प्रियतम नित्य ही विहार करते हैं। जहाँ जड़-चेतन समस्त जीव चिन्मय हैं, जहाँ की महारानी राधा ठकुर...
श्री श्यामा जू को, ऐसो सरल सुभाय
श्री निकुंज-विहारिणी किशोरी जी का स्वभाव इतना सरल है जितना मैंने न कहीं देखा है और न सुना ही है, यह मैं प्रतिज्ञापूर्वक कह रहा हूँ। [1] जिन किशोरी जी...
चातुरी पांच गौर सरकार
गौरांगी स्वामिनी राधा पांच प्रकार की दक्षता से पूर्ण हैं। प्रथम दक्षता तो नृत्य-काल में उनके भ्रूनर्तन की है, जिसे देखकर उनके रसिक प्रियतम उन पर अपना ...
वृषभानु ललिहिं उर आनिये
श्री वृषभानुनन्दिनी (श्री राधा) को ही अपने हृदय में बसाओ। विकर्मों द्वारा नरक, सुकर्म द्वारा स्वर्ग एवं ज्ञान द्वारा मोक्षादि की व्यर्थ ही खाक क्यों छ...
श्री राधे जू को, अधाधुंध दरबार
श्री राधा जू के दरबार में अधाधुंध (बेहिसाब) कृपा बरसती है। जिन ब्रज की वनचारी स्त्रियों का आचरण संसार की दृष्टि में निंदनीय और व्यभिचारी कहा जाता है क...
श्री श्यामा जू को श्याम पलोटत पाम
श्री श्यामा जू (श्री राधा) के चरण कमलों को श्यामसुन्दर दबाया करते हैं। जिन्हें वेदों ने पूर्णकाम सच्चिदानंद ब्रह्म बताया है, वही ब्रह्म नन्दनन्दन बनकर...
हम भूखे ब्रज की गारी के
भगवान् श्री कृष्ण कहते हैं कि हमें ब्रज की प्यार की गालियाँ अत्यंत ही अच्छी लगती हैं। 'दारी के' इस गाली को सुन-सुन कर मैं अपने बैकुण्ठ लोक के सुख को न...
रास-रस रसिक रँगीली राधा
श्री किशोरी जी रास रस से विभोर रसिकों को रिझाने वाली हैं, जिनके चरण कमलों की नखमणि रूपी चन्द्रमा के प्रकाश को ब्रह्म जान कर योगीराज शम्भु सरीखे समाधि ...
धरु उन स्वामिनी को ध्यान रे
अरे मन! तू उन वृषभानुनंदिनी स्वामिनी का ध्यान कर, जिनकी नखमणि चन्द्रिका का ध्यान स्वयं श्यामसुन्दर करते हैं। [1] जिनके नाम, रूप, गुण, लीलादिक रसिकों ...
रिद्धि मिले सिद्धि मिले मिले मोक्षधामा
रिद्धि सिद्धि की प्राप्ति या मोक्ष की प्राप्ति तो अज्ञान ही है। सच्चा ज्ञान तो वही है जिससे श्यामा-श्याम के प्रेम की प्राप्ति हो।
मोहिं मनमोहन मनभाय रे
मुझे तो केवल वे मन को मोहने वाले प्राणप्रिय मनमोहन (श्री कृष्ण) ही मनभावन लगते हैं। कोई जप करता है, कोई तप करता है, कोई व्रत रखता है, तो कोई जंगल में ...