SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeSaintsjagadguru kripalu maharaja
All Saints

Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

jagadguru kripalu maharaja Collected Verses

general

सौ बातन की बात इक

सौ बातों की एक बात यही है कि केवल उन मुरलीधर (श्री कृष्ण) का ही ध्यान हृदय में धारण करो। अपनी सेवा की अभिलाषा और लालसा को निरंतर बढ़ाते रहो; यही समस्त...

general

काम क्रोध मद लोभ कहँ

हे मूर्ख मन! काम, क्रोध, मद और लोभ को केवल दबाने का प्रयास मत कर; इन्हें श्यामसुन्दर की ओर मोड़ दे। यदि इच्छा करनी है तो उनके सुख की इच्छा कर, यदि क्र...

general

जाकी माया ते नचे, योगी यती महान

जिसकी माया से बड़े-बड़े योगी एवं मुनींद्र भी नाचते (काँपते) हैं, उसी ब्रह्म श्री कृष्ण को ब्रज में ब्रजांगनाएँ अपने हाथों की तालियों पर नचा रही हैं।

general

बंधन और मोक्ष का, कारण मनहि बखान

बंधन और मोक्ष का कारण केवल मन ही है। अतः कोई भी भक्ति हो, मन से भगवान का चिंतन तो अवश्य होना चाहिए।

general

देशकाल नहिँ नियम कछु नहिँ कछु शिष्टाचार

मैं उस विलक्षण प्रेम-पंथ पर सर्वस्व न्यौछावर करता हूँ, जहाँ देश, काल अथवा बाह्य शिष्टाचार का कोई बंधन नहीं है। यहाँ केवल निष्कपट हृदय से निष्काम प्रेम...

general

काहे खोजत ब्रह्म को

हे ज्ञानियों! वेद की विविध ऋचाओं में ब्रह्म को निरर्थक क्यों खोज रहे हो? वह तो नंदरानी के आँगन में ऊखल से बँधा हुआ सुलभ है। यदि मेरे वचन पर विश्वास न ...

general

ज्ञान मरै दै मुक्ति पद, कर्म मरै दै स्वर्ग

मोक्ष देकर ज्ञान समाप्त हो जाता है, स्वर्ग देकर अच्छा कर्म समाप्त हो जाता है। किंतु केवल एक भक्ति ही ऐसी है जो सदा अमर रहती है जहां भक्त को स्वर्ग, मो...

general

संत संग सत्संग करु

किसी वास्तविक रसिक की शरण ग्रहण कर, उनका सतत सत्संग करते रहने से श्रद्धा, रति एवं भक्ति क्रमशः स्वयं प्राप्त हो जाती है।

general

हौं मानत हौं सदा को

हे श्री कृष्ण ! अनादिकाल से मैंने सदा पाप ही किया है, यह मैं मानता हूँ। किंतु तुम भी तो अपनी पतित पावनी प्रतिज्ञा पर विचार करो।

general

कोटिन ज्ञानिन मध्य कोउ प्रेम-सुधा-रस पाय

करोड़ों ज्ञानियों में किसी बड़भागी को ही प्रेम सुधा रस प्राप्त होता है। जैसे सनकादि शुकादिक परमहंस ब्रजरस में डूब गये।

general

तुम मेरे थे रहोगे यह श्रुति वचन तिहार

हे श्री कृष्ण! भले ही मैं पतित हूँ, परंतु तुम अनादि काल से मेरे थे, और अनंतकाल तक मेरे ही बने रहोगे — यह वेदों में तुम्हीं ने स्वयं कहा है। फिर हे अधम...

general

जाके अगनित गुनन को गावत वेद ऋचान

जिन श्री कृष्ण के अनगिनत गुणों को गाते हुये चारों वेद नहीं थकते, वही ब्रह्म श्री कृष्ण ब्रज में गोपियों को हठात् छेड़ कर 'दारी के’, इत्यादि गाली को सु...

general

चितवत चित करषत जिते

श्री कृष्ण की एक रसमयी दृष्टि से बड़े-बड़े परमहंस समाधि भुला देते हैं और परमहंसों की तो गणना ही क्या, जब स्वयं देवाधिदेव भगवान् शिव ने भी उस रस के आस्...

dham

जय नंदनंदन सुख धाम हरे

जय नंदनंदन सुख धाम हरे, गोपी जन वल्लभ श्याम हरे। अनंत आनंद के धाम नंद के पुत्र की जय हो। गोपिजनों के प्रिय श्री कृष्ण की जय हो। जय जीवन धन ब्रज बाम ...

general

सबै शक्ति हैं नाम में

हे मन! भगवान के नामों में समस्त शक्तियाँ समाहित हैं, इसलिए तू रात-दिन केवल उसी का आराधन कर। किंतु स्मरण रहे, जो मनुष्य नामापराध करते हैं, उन्हें नाम क...

dham

अधम उधारन नाम सुनि

हे श्री कृष्ण! तुम्हारा पतित-पावन नाम सुनकर मन में आशा उत्पन्न होती है, क्योंकि मैं पतित हूँ और मेरा भी काम बन सकता है। किंतु जब “भक्त-वश्य”, “भक्त-वत...

shloka

सबै शक्ति हैं नाम में

श्री राधा कृष्ण के नाम में उनकी समस्त शक्तियां सदा हैं। अतः हे मन! तू निरंतर स्मरण कर। किंतु एक बात याद रखना। वह यह कि नामापराध न होने पाये।