shri hit kamalanaina
Biography & History
shri hit kamalanaina Collected Verses
सजनी नव निकुंज सु केलि
हे सखी, श्री प्रिया प्रियतम की नव निकुंज की केलि परम अद्बुत है। गौर वर्ण श्री राधिका श्याम वर्ण श्री कृष्ण से ऐसे आनंद से लिपटी हैं मानों तमाल वृक्ष स...
आनँद की मूरति देखौ माई
अरे सखी, आनंद की मूर्ति श्री श्यामा श्याम को निहार, कैसा सुंदर दृश्य है जब यह एक दूसरे से लिपटे हुए हैं। [1] इस दिव्य दम्पति के अंगों में प्रेम स्वरू...
बिहरत दोऊ लाड़िली लाल
श्री लाड़िली लाल दोनों वृंदावन में विहार परायण हैं। श्री श्यामा श्याम के बड़े एवं सुंदर नैनों को देख देख देख सहचरियों के हृदय और नयन शीतल बने रहते है...
प्रीतम मोहि प्रानन हूँ तें प्यारौ
श्री राधा कहती हैं - प्रियतम मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं। मैं प्रेम से रात-दिन उन्हें हृदय से लगाये रहती हूँ। किंचित् भी अपने से दूर नहीं करती। ...
किशोरी ! मेरी जीवन प्राण
श्री लाल जी के वचन श्री प्रिया जी से: हे किशोरी जी केवल आप ही मेरी जीवन प्राण हो, मैं बार बार ऐसा कह कर तुमको क्या समझाऊँ, मेरी अन्य दूसरी कोई गति है...
वन विहरन चले दोऊ प्यारे
श्री श्यामा श्याम वन-विहार करने चले हैं। दोनों नृत्य एवं गान करते हुए सखियों के ह्रदय में प्रेम बढ़ा रहे हैं, दोनों रूप की राशि हैं एवं तीनों लोकों के ...