shri maluk dasa
Biography & History
shri maluk dasa Collected Verses
भेष फ़क़ीरी जे करै मन नहिं आवै हाथ
जिन्होंने भेष तो साधु संतों वाला रख लिया है, परंतु मन संसार में ही आसक्त है, तो उससे क्या लाभ होगा? परंतु यदि मन फ़क़ीरी में रमा हुआ है, अर्थात् भगवान...
माला जपों न कर जपों जिभ्या कहूँ न राम
न तो मैं माला जपता हूँ, न ही किसी संख्या से भगवान का नाम जप करता हूँ, और न ही जिभ्या से कभी नाम ही लेता हूँ। मैंने श्री हरि की शरणागति प्राप्त कर परम ...
जहाँ-जहाँ बच्छा फिरै
जहां जहां बछड़ा जाता है वहाँ वहाँ गाय पीछे पीछे जाती है। श्री मलूक दास कहते हैं कि उसी प्रकार जहां जहां संत जन जाते हैं वहीं पीछे पीछे भगवान पहुँच जात...
गाँठी सत्त कुपीन में सदा फिरै निःसंक
जिसकी लंगोटी में भले ही सात गाँठें लगी हों, परंतु जो सदा निडर होकर विचरता हो एवं श्री हरि के अमृत नाम रस में सदा लीन रहता हो, ऐसा महात्मा देवराज इन्द्...
हम जानत तीरथ बड़े तीरथ हरि की आस
श्री मलूक दास जी कहते हैं कि मैंने तीर्थों के बारे में बहुत सुना है और यह भी जानता हूँ कि उनका बहुत महत्व है। परंतु जो भक्त मन लगाकर भगवान का भजन करते...
संध्या तरपन सब तजा तीरथ कवहुँ न जाऊँ
संध्या, तर्पण आदि समस्त कर्मों का मैंने परित्याग कर दिया है, और तीर्थ आदि के लिए भी नहीं जाता हूँ क्योंकि मैंने जान लिया है कि साक्षात् श्री हरि मेरे ...
कह ‘मलूक' हम जबहिं ते लीन्हों हरि की ओट
मलूकदास जी कहते हैं कि जबसे प्रभु की शरण ली है, तभी से सुख पूर्वक सोया हूँ अर्थात् पूर्ण रूप से निश्चिंत हो गया हूँ। सब प्रकार के संदेहों एवं चिंताओं ...
सुमिरन ऐसा कीजिए दूसरा लखै न कोय
भगवान का सुमिरन ऐसा गोपनीय करना चाहिए कि कोई आपके भजन को जान ही ना पावे। मन ही मन में ऐसी आराधना कीजिए कि दूसरा तुम्हारे होंठों को भी फड़कता हुआ ना दे...
जो तेरे घट प्रेम है तो कहि-कहि न सुनाव
यदि तुम्हारे अंदर प्रेम है तो तुम कदापि उसको बतलाकर सुनाओगे नहीं। भगवान अंतर्यामी हैं, वे सबके ह्रदय की बात को जानते हैं, तुम्हें किसी से कहने की ज़रू...
यह जोरी अविचल रहो ये आशीष हमारी
दूल्हा साँवरे श्री कृष्ण एवं दुल्हन प्यारी श्री राधा की यह सुंदर जोड़ी सदैव नित्य बनी रहे, यही हमारा आशीर्वाद है।
अजगर करै न चाकरी पंछी करै न काम
अजगर किसी की चाकरी नहीं करता और न ही पक्षी कोई काम करते हैं। श्री मलूकदास कहते हैं कि सबको देने वाले तो प्रभु ही हैं।
सोइ पूत सपूत है जो भक्ति करे चित लाय
केवल वही पुत्र वास्तव में धन्य है जो अपने मन को पूर्ण रूप से भक्ति में लगाता है। ऐसी भक्ति के माध्यम से वह जरा और मृत्यु से पार होकर, शाश्वत और अमर अ...
अब सागर के तरन को है हरि नाम आधार
इस भव-सागर को पार करने का एकमात्र सहारा हरि का नाम ही है। हे मूर्ख गँवार मन! तूने उसे सहज ही भुला दिया है।
करें भक्ति भगवंत की कबहुं करै नहिं चूक
जो निरंतर सच्चे भाव से भगवान की भक्ति करता है और क्षण मात्र को भी अपने मन को श्री हरि से अलग नहीं करता, वही श्री हरि-रस में सदा मगन रहता है। श्री मलूक...
बहुतक पीर कहावते बहुत करत हैं भेस
इस संसार में अनेक ऐसे झूठे पीर और गुरु हैं जो भेष धारण कर लोगों को अपने जाल में फँसाते हैं। परंतु यह बात भली-भाँति समझ लेनी चाहिए कि केवल भेष से कोई स...
प्रभुता ही को सब मरो प्रभु को मरै न कोय
हर कोई प्रभुता चाहता है, परंतु कोई स्वयं प्रभु को नहीं चाहता। यदि कोई प्रभु को समर्पित हो जाए, तो प्रभुता भी उसकी दासी बन जाए।
जब तें लीन्हीं हरि की ओट
जब से मैंने श्री हरि की शरण ली है, मैं भारी बोझ से मुक्त होकर हल्का हो गया हूँ और मैंने अपने पापों की उस भारी गठरी को उतार कर फेंक दिया है। [1] मैंने...
मक्का मदीना द्वारिका बदरी और केदार
चाहे कोई मक्का, मदीना, द्वारिका, बदरीनाथ, केदारनाथ आदि तीर्थों की यात्रा किया करे, परंतु यदि उसके भीतर दया नहीं है, तो ये सारी यात्राएँ निरर्थक हैं।