shri purushottama
Biography & History
shri purushottama Collected Verses
वृंदावन खेल रच्यो भारी
वृंदावन में होली का ऐसा अद्भुत खेल रचाता है कि यहाँ की गोरी नारियों के हार टूट जाते हैं एवं साड़ियाँ फट जाती हैं। [1] ब्रज की होली, ब्रज की गाली एवं ...
ब्रजमंडल देस दिखाओ रसिया
हे रसिया श्री कृष्ण, मुझे ब्रज मण्डल दिखा दो। आपके ब्रज में बहुत से मोर हैं, जिनकी कूक से हृदय प्रसन्नता से प्रफुल्लित हो उठता है। [1] आपके ब्रज में ...
रास रच्यौ वृंदावन बनवारी
वृंदावन में रसिक-बिहारी श्रीकृष्ण ने यमुना तट के वंशीवट कुंजों में रास रचा है।[1] वे नृत्य करते हुए सखियों का मन हर रहे हैं और प्रेम के रंगों में सब ...
दरसन दै निकसि अटा में ते
श्री पुरुषोत्तम जी श्री राधा की सुंदर छवि का वर्णन करते हुए तथा उनके दर्शन की याचना करते हुए कहते हैं— जब श्री राधिका अटारी से पधारकर अपने दर्शन प्रदा...
ब्रज की तोय लाज मुकुट वारे
हे गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण! ब्रज की लाज और प्रतिष्ठा तुम्हारे ही करकमलों में है। चंद्रमा और सूर्य भी तुम्हारे ही ध्यान में निमग्न रहते हैं, और आकाश के न...
दरसन दै मोरमुकुट वारे
हे मोरमुकुट से शोभायमान श्री कृष्ण! कृपा करके मुझे अपने दर्शन प्रदान कीजिए। आपकी कमर पर बँधी सुंदर काछनी अत्यंत मनोहर प्रतीत होती है और आपके पीतवर्ण व...
प्यारी को श्रृंगार करत नंदलाला
नन्दलाल (श्री कृष्ण) स्वयं अपनी प्रियतमा श्री राधा का श्रृंगार कर रहे हैं। वे बार-बार अपने हाथों से मोतियों की माला पिरो रहे हैं और उनके कानों में आभू...
प्यारो प्यारी झूले क़दम की डारियां
पिय-प्यारी (श्री राधा-कृष्ण) कदंब वृक्ष की डालियों पर एक संग झूला झूल रहे हैं। आकाश में बादल गरज रहे हैं, बिजली चमक रही है, और चारों ओर गोपियाँ हर्षित...
नेंक आगे आ श्याम तोपे रंग डारूँ
एक गोपी प्रेमपूर्वक कहती है— “हे श्यामसुंदर! थोड़ा और आगे आओ, मैं तुम्हें रंग लगाऊँ, तुम्हारे मस्तक और कपोलों पर गुलाल लगा दूँ।” [1] तुम्हारी पगड़ी त...
रस लै तो द्वार पर्यो रहियो
यदि तुम्हें वास्तविक रस का पान करना है तो किशोरीजी के द्वार पर ही अडिग पड़े रहना। यदि तुम सच्चे रसिक हो, तो समस्त कठिनाइयों और कष्टों को धैर्यपूर्वक स...