shri rasik govinda
Biography & History
shri rasik govinda Collected Verses
यह अगाध निधि मधुर रस
प्रिया प्रियतम के इस अथाह मधुर रस रूपी निधि की छवि का वर्णन करना असंभव है। चटक रूपी मन सम्पूर्ण रस का पान करना चाहता है, परंतु एक बूंद ही उसे पूर्ण रू...
कृपासिन्धु आनन्दकन्द दम्पति रसभीने
हे कृपा के सागर, आनंदकंद, और सदा रस में मग्न दिव्य युगल (श्री राधा-कृष्ण)! आपकी अनंत कृपा ने मेरे जैसे असंख्य मूर्खों और पतितों का उद्धार किया है।
जे जन रसिक चकोर, मीन चातक व्रत धारी
इस रस मार्ग में चलने के अधिकारी केवल वे रसिक जन हैं जो चकोर, मीन एवं चातक के समान अनन्य व्रत को धारण करते हैं। अनन्यता से विहीन अन्य जीव इस रस मार्ग क...
जिनके यह रससार
जिनके ह्रदय में श्रीधाम वृंदावन का यह सार रस समा गया है, उन्हें किसी अन्य रस की चर्चा सुनना भी सुहाता नहीं है। ऐसे रसिक भक्त नित्य ही इस रस में उन्मत्...
श्रीवृन्दावन सघन सरस-सुख
दिव्य श्रीवृन्दावन धाम सघन और सरस रस की खानी है, जिसकी छटा चारों ओर छा रही है। इन्द्र के नन्दनवन जैसे कोटि-कोटि वन श्रीवृन्दावन को निहारकर लज्जित हो र...
दोउ मिलि झूलैं आज हिंडोरैं
आज युगल सरकार (श्री प्रिया-प्रियतम) मिलकर हिंडोले पर झूल रहे हैं। झूलते हुए वे अत्यंत प्रफुल्लित हैं और परस्पर मंद-मंद मुस्कुराते हुए एक-दूसरे को निहा...
बधाई आज श्री वृषभानु के द्वार
आज श्री वृषभानु जी के द्वार बधाइयों की गूँज है। स्त्री-पुरुष सब गाते-बजाते, ताल दे-देकर नाच रहे हैं। [1] रसिक गोविन्द कहते हैं कि तीनों लोकों की स्वा...