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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

shri rup sakhi Collected Verses

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रसिकवर मोहि सनाथ कियो

रसिक-शिरोमणि श्रीस्वामी हरिदासजी महाराज ने हमें तो सब प्रकार से सनाथ कर दिया है। उन्होंने हमें दर्शन और चरणामृत का महाप्रसाद देकर जैसे ही हमारे मस्तक ...

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मेरी राधा प्रिय आधार

मेरी स्वामिनी श्री राधा प्रिय श्याम सुंदर का प्राण आधार है। इनकी गौर श्याम की छवि छबीली एवं अपरम्पार है। [1] वृंदावन निकुंज महल में सखियों संग यह नित...

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दोउ मगन भये रस होरी

श्रीप्रियालाल होरी के आनन्द में मगन हो रहे हैं। प्रेम की डोरी में बँधे दोनों परस्पर गलबहियाँ डाले मन्द-मन्द मुस्करा रहे हैं और एक-दूसरे के चित्त को चु...

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कुंजबिहारिन लाडिली

वृन्दावन के कुंजों में विहार करने वाले लाडिली-लाल [श्री राधा-कृष्ण] चम्पा-फूलों की माला हृदय में धारण किए, रस में उन्मत्त होकर मुस्कुरा रहे हैं।

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श्री स्वामी जू के सरन नित, रूपसखी विश्राम

मैं सदा ललिता-अवतार श्री स्वामी हरिदास जू की शरण में रहकर श्री वृन्दावन धाम में श्री श्यामा-श्याम की दिव्य जुगल-केलि का निरंतर दर्शन करता रहूँ—यही मे...

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राधे रूप की उज्यारी

श्री राधा रूप सौंदर्य से उज्ज्वल हैं। उनका चेहरा 'शरद पूर्णिमा' के चंद्र के समान है, नैंन रतनारे हैं, और तन सुख का सार स्वरूप है। [1] श्री राधा के अ...

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रूप सनातन ब्रज कह्यौ

समस्त रसिकों ने इस बात की प्रशंसा की है कि श्री रूप और सनातन गोस्वामी जी ने ब्रज का, श्री हरिवंश महाप्रभु ने वृन्दावन का और स्वामी श्री हरिदास जी ने न...

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श्री वृंदावन माधुरी

मैं सदा श्री वृन्दावन की माधुरी को निरख-निरखकर उसका गुणगान करता रहूँ। श्री राधा, श्री कृष्ण और उनकी निज सखियाँ ही मेरे जीवन-प्राण हैं।

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नित्य विहार अखंड है

श्री स्वामी हरिदास जी की उपासना में प्रिया-प्रियतम का अखंड नित्य-विहार ही प्रधान उपास्य तत्त्व है और वही उनका निज धर्म है। जहाँ अवतार-कथा का प्रवेश हो...

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करुना सिंधु दयाल हो, बाँके विरदनि नाथ

हे बाँके बिहारी! जग में आप करुणा-सिंधु एवं दीनों के नाथ कहाते हो, ऐसी कब कृपा होगी कि आप मुझे निशि-दिन अपने साथ ही रखेंगे?

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ललित लाडिली लाल कैं, कंठ रही लपटाइ

श्री लाड़िली (श्री राधिका), श्री लाल जू (श्री कृष्ण) के कंठ से ऐसे लिपटी हुई हैं मानो उज्ज्वल कुंदन (स्वर्ण) के साथ नीलमणि सुशोभित हो रही हो, अथवा घने...

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श्री स्वामी हरिदास को

जो जन अनन्य रूप से ललिता-अवतार स्वामी श्री हरिदास जी के सच्चे भाव से अनुगत होता है, वह सखी-भाव को प्राप्त होकर सदा श्री श्यामा-श्याम के अद्भुत नित्य-...

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जाँचें और न देव कौ, नहीं तीरथ वृत आस

वृन्दावन के एकांत निकुञ्जों में नित्य-विहार करने वाले श्री बिहारी-बिहारिन के सिवा हमारा न तो किसी अन्य देवता से कोई संबंध है और न किसी तीर्थ-व्रत आदि ...

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राधा नाम मुकट मनि मंत्र

समस्त मंत्रों का मुकुट मणि एवं शिरोमणि मंत्र श्री “राधा” नाम है जो आगम, वेद, पुराण आदि से भी परे है एवं तंत्र भी जिसे त्रिलोक में खोजने का प्रयास कर र...

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स्वामी बिना बिहार नहि, साधन करो अनेक

ललिता-अवतार, रसिक अनन्य नृपति, श्री स्वामी हरिदास जी की कृपा के बिना श्री राधा-कृष्ण के नित्य-विहार की प्राप्ति असंभव है, चाहे कोई असंख्य साधन क्यों न...

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रस को रसिक स्वादी जानैं

रस का स्वाद तो रसिक ही जानता है। अनन्य नृपती ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी के संग के बिना श्री प्रिया प्रियतम के इस दुर्लभ प्रेम को कोई कैसे प्राप...

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श्री स्वामी हरिदास की, सरिवर रसिक न और

अनन्य नृपति रसिक-शेखर ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी समस्त रसिकों के सिरमौर हैं, जिनकी समानता किसी भी रसिक से की नहीं जा सकती, क्योंकि वे समस्त रसो...

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कोऊ जोग जज्ञ तप संजम क्रिया को करैं

कोई योग करता है, कोई यज्ञ। कोई तप करता है, तो कोई संयमपूर्वक क्रियाएँ करता है। कोई मौन व्रत धारण करता है, तो कोई स्वास पर केंद्रित प्राणायाम का अभ्या...

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सरद चंद प्यारी बदन, प्रीतम नैंन चकोर

प्रीतम कृष्ण के नेत्र चकोर समान हैं, जो शरद-चन्द्र समान श्री राधा के रूप को नित्य हर्षपूर्वक निहारते रहते हैं।

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भजन न कीनों मैं कछू, जानत नाहिन जोग

न तो मैंने कोई भजन किया है और न ही मुझे योग आदि का ज्ञान है। मुझे तो केवल रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास जी की अहैतुकी कृपा का ही बल है, जिसके प्रभाव...

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श्री वृंदावन चंद बिहारी

श्री बाँके बिहारी लाल जो नित्य नयी नयी केली करने वाले ठाकुर हैं वे वृंदावन धाम के मानो चंद्रमा हैं। इनकी विलक्षण रूप माधुरी बहुत सुहावनी लगती है जिसकी...

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रतन खचित भुव जगमगति

ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी के आराध्य श्री बिहारी-बिहारिणी जू श्री वृंदावन के निभृत निकुंजों में तमाल और बेलि के समान आलिंगनबद्ध होकर अनवरत केलि...

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कुंदन रतन भूमि लता तरु रही झूमि

प्रिया-प्रियतम की लीला भूमि श्री धाम वृंदावन की तो शोभा ही निराली है। यहाँ का कण-कण सुवर्ण तथा रत्न कणों से भी अधिक बहुमूल्य है तथा यमुना जी का स्पर्श...

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महा रूप रस माधुरी, दंपति केलि विलास

श्री वृन्दावन निकुंज-महल में महारूप एवं महारस-माधुरी की वर्षा होती है, जहाँ दिव्य दंपति केली-विलास करते हैं। उस विपुल 'नित्य विहार' को श्री स्वामी हरि...

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रंगीले दोउ कुंज महल में राजैं

रंगीली दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण सदा कुंज महल में विराजते हैं एवं नूपुर की दिव्य धवनि उत्पन्न कर अनवरत केलि रस बरसाते हैं। [1] यह रसीले दोउ एक दूसरे...

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रंगमहल निधिवन सदा

निधिवन के रंगमहल में प्रिया प्रियतम की अनवरत केली को सदा निहारने वाले, रसिक अनन्यों में चूड़ामणि, स्वामी श्री हरिदास जी की जय हो।

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श्री वृन्दावन कुञ्ज में करत सुधा रस पान

परम लावण्यमयी नवल किशोर जोड़ी श्रीश्यामा-श्याम श्रीवृंदावन के सघन कुंजों में नित्य विहार करते हुए अनवरत प्रेम-सुधा का रसास्वादन कर रहे हैं।

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श्री वृंदावन दंपति, जो चाहै रस रीति

जिसको श्री वृंदावन धाम की नित्य दंपति श्री बिहारी बिहारिनी जू की रस रीति प्राप्त करनी हो उसे श्री स्वामी हरिदास जी के चरणों से प्रेम बढ़ाना चाहिए।

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मेरी कुंजबिहारिन रानी

मेरी स्वामिनी कुँजबिहारिनी श्री राधारानी हैं, जिन्हें कुंजबिहारी श्री कृष्ण बड़े हर्ष से लाड़ लड़ाते हैं, जिनके अंग-अंग की छवि की कांति वाणी से परे है। [...

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विलसत रंग महल सुखरासी

(राग सारंग) विलसत रंग महल सुखरासी। स्यामा-स्याम केलि अवलोकत, आनंद निधि हरिदासी। [1] विविध केलि रस रंग माधुरी, छवि अद्भुत प्रकासी। श्री विपुल विहारिन स...

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जै श्रीहरिदास रसिक वर की

रसिकवर श्रीस्वामी हरिदासजी की सदा जय हो, जिन्होंने इस धराधाम पर अवतार लेकर ऐसा अनुपम अनन्य धर्म प्रकट किया, जिससे विधि-निषेधात्मक शुभ और अशुभ कर्म का...

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स्यामा स्याम निकुंज निधि

रसिक सिरमौर स्वामी श्री हरिदास जी के लाड़ले ठाकुर-ठकुरानी श्री श्यामा कुंजबिहारी निकुंज की निधि हैं। श्री रूप सखी जी कहते हैं कि उन दोनों की सुंदर छवि...

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स्यामा नित्य बिहार बनी

मेरी श्यामा जू नित्य विहार में अति शोभायमान हैं। उनके संग नित्य ही कुंज बिहारी भी शोभायमान हैं जो श्री श्यामा जू के रस में सदा मगन रहते हैं। [1] उनके...

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चरण कमल चित लाई कै गाऊँ गुन सुख-रासि

अपने चित्त को श्री प्रिया-प्रियतम के चरण कमलों में लगाकर उनके गुणों का गान करूँ, जो सुखों की राशि हैं। ऐसे आनंद निधि और नित्य कृपा बरसाने वाले श्री चर...

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श्री हरिदास अनूप अलि रसिक रूप बलिहार

रूप सखी कहते हैं कि स्वामी श्री हरिदास जी अद्वितीय हैं, मैं उनपर बार बार बलिहार जाता हूँ। वे इक-टक श्यामा कुंजबिहारी के अखंड नित्य विहार को ही अपलक न...

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होरी खेलैं श्यामा श्याम

श्री श्यामा-श्याम होली के आनंदमय रंगों में मग्न हैं, उनकी मोहक दृष्टियाँ प्रेम के रंगों में सराबोर हो रही हैं। कमान-सी टेढ़ी भौहें जल-वृष्टि करने वाली...

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प्यारी पिय प्रेम-भक्ति दीजै

हे युगल सरकार पिय प्यारी, मुझे अपनी प्रेम भक्ति प्रदान कीजिए। आपके नाम गुणगान से मेरी वाणी गदगद हो उठे, आपका यश सुन मेरा रोम रोम रोमांचित हो जाए, अश्...

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श्री हरिदास अनन्य जै, जिनकै प्रेम प्रधान

जो रसिकजन स्वामी श्री हरिदास जी के पूर्ण रूप से अनुगामी होते हैं, उनकी प्रधानता केवल प्रेम की ही होती है। वे सखीभाव को अंगीकार कर, प्रिया-प्रियतम को न...

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श्री स्वामी हरिदास के नवल निकुंज बिहार

श्री स्वामी हरिदास जी के परम लाड़िले, नवीन निकुंजों में नित्य विहार करने वाले बांके बिहारी ही सिरमौर हैं। उनकी छवि का छींटा पाकर ही दशावतार प्रकाश पात...

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श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि

जो स्वामी हरिदास जी के अनन्य जन हैं, वे युगलवर, श्री श्यामा कुंज बिहारी के नित्य विहार रूपी रस-केलि में ही अपने मन को लगाते हैं तथा युगल किशोर दंपति क...

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कुंजबिहारिन लाडिली, कुंजबिहारी लाल

प्रिया-प्रियतम अपनी अंतरंग केलि में, तन और मन से एक होकर अत्यंत मनोहर लग रहे हैं। उनके प्रत्येक अंग की शोभा परम मधुर है, और कुंज-महल ही उनकी केलि का न...

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श्रीराधा दे वृन्दावन वास

हे श्री नित्य बिहारिनि श्री राधा, अब तो मुझे आप वृंदावन वास दीजिए। नित्य ही मैं युगल स्वरूप का अवलोकन करूं एवं रंग हास में परायण रहकर, आपकी नित्य निष्...

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प्यारी तेरी छबि पर रबि ससि वारौं

हे प्यारी जू (श्री राधा)! तुम्हारे अनुपम सौंदर्य पर तो मैं सूर्य और चंद्रमा को भी अर्पण कर दूँ। निकुंज महल में सुंदर शय्या पर विराजित तुम्हारे संग प्र...

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करि मन रसिकनी सौं सत्संग

अरे मन रसिकों का सत्य संग कर, जिनके सत्संग के प्रभाव से हृदय के समस्त सुकृत भजन में भींज कर रसिकों के हृदय का निज रंग [श्री राधा कृष्ण] हमारे हृदय में...

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नित्यविहार सों करि प्रीति

प्रिया-प्रियतम के नित्य-विहार रस से प्रीति करो क्योंकि वही अनन्य रसिक संतों का जीवन सार है। ऐसे अनन्य रसिकों के संग एवं दिखाए मार्ग के अनुसरण करने से ...

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मेरी स्वामिनी लाड़िली, लाड़ लड़ाऊँ भाई

अरे भाई, मेरी आराध्या, मेरी सर्वस्व स्वामिनी तो एकमात्र श्री राधा महारानी जू ही हैं, और उन्हीं को मैं नित्य लाड़ लड़ाता हूँ। न मैं किसी अन्य के गुण जा...

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कीजै रंगमहल की दासी

कीजै रंगमहल की दासी । सरस नागरी नरहरि रसिक ललित जु चरन उपासी । । वृन्दावन की सहज माधुरी श्रीस्वामी परकासी । - श्री रूप सखी, रूप सखी जी की वाणी, सिद्धा...

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स्यामा तू करुना को सागर

हे श्यामाजू (श्री राधा)! आप अगाध करुणा की सागर हैं। आपकी दिव्य कान्ति को निहारकर रसिक-चूड़ामणि श्री कुंजबिहारी भी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। [1] आपके मु...

shloka

तन वन सरस सुहावनों तरु बेली फल फूल

वृक्षों, लताओं, फलों और पुष्पों से सदा सरस एवं मनोहर बने हुए श्रीधाम वृंदावन में श्यामा-कुंजबिहारी (प्रिया-प्रियतम), दोनों परस्पर समरस भाव से एवं नित्...

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बंदे श्रीवृन्दावन की भूमि

श्री वृन्दावन की भूमि को वंदन (प्रणाम) है। जहाँ ललित लताएं, द्रुम,बेल आदि कुंदन मणि की तरह प्रतीत हो रही हैं एवं (झूम रही हैं) आनंदित हो रहे हैं। [1]...

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रतन-खचित वृदाविपुन भूमि लता-द्रुम रंग

श्रीधाम वृंदावन की दिव्य भूमि रत्नों से जड़ित है, जहाँ रंग-बिरंगी लताएँ और विविध रंगों के वृक्ष सौंदर्य बिखेर रहे हैं। उसी परम पावन भूमि पर श्री स्वाम...

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Syama-Syam Nikunj Nidhi

Syama-Syam Nikunj-Nidhi, Shri Swami Sirmaur.Roop Lalit Ura Main Base, Jaanat Naahin Aur.- Shri Roop Sakhi, Siddhant Ke Doha (37)The beloved deity of S...

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मेरे संत चरण रज अंजन

रसिक संतों के चरणों की रज ही मेरे लिए ह्रदय की आँखों को प्रकाश देने वाला अंजन है जिससे तीनों ताप एवं समस्त अंधकार का नाश हो जाता है और काम, क्रोध, लोभ...

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श्री वृंदावन बास वर, दियो न अनतहि जांउ

हे प्रभु! मुझे श्री वृंदावन का वास जो सर्वोपरि है उसे प्रदान कीजिए, जिसे पाकर मैं अन्यत्र कहीं न जाऊं। रसिक शिरोमणि ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी ...

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Shri Swami Haridas Ke Naval Nikunj Bihar

Shri Swami Haridas Ke, Naval Nikunj Bihar.Chhavi Chheentein Chhahrat Hain, Tinke Dasa Avtar.- Shri Roop Sakhi, Siddhant Ke Doha (44)Shri Swami Haridas...

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Shri Haridas Ananya Jai Jinkai Prem Pradhan

Shri Haridas Ananya Je, Jinkai Prem Pradhan.Pyari-Piya Niju Sakhini Ki, Roop Madhuri Paan.- Shri Roop Sakhi, Siddhant Ke Doha (31)Those Rasika devotee...

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Ratan-Khachit Vrindavipun Bhumi Lata Drum Rang

Ratan-Khachit Vrindavipun, Bhoomi Lata-Drum Rang.Shri Swami Ke Laadile, Rache Sukeli Anang.- Shri Roop Sakhi, Siddhant Ke Doha (22)The divine land of ...

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Sri Haridas Anany Jai Var Vihar-Ras Keli

Sri Haridas Anany Jai, Var Vihar-Ras Keli.Damapti Rati Gati Madhuri, Raakhi Nainani Jheli.- Shri Roop Sakhi, Siddhant Ke Doha (26)Those who are the ex...

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Piya Pyari Nij Keli Main

Piya Pyari Nij Keli Main, Tan Man Mili Abhiram.Ang Ang Sobha Saras, Kunj Mahal Nij Dham.- Shri Roop Sakhi, Shringar Rasa Ke Dohe (15)Absorbed in Their...