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Sacred Scripture

श्री प्रेम दास जी की वाणी

Verses & Passages

11 items
general

ऐसी प्रीति देउ किन प्यारी

हे प्यारी जू (श्री राधा)! मुझे ऐसी अनन्य प्रीति प्रदान करें कि मैं क्षण-क्षण, हर पल आपके चरणकमलों का ही केवल अवलोकन करती रहूँ और मैं सदा-सर्वदा आपकी ह...

general

श्रीवृन्दावन-चन्द्र छवि श्रीराधा वर नाम

श्री वृंदावन की मनमोहक छवि और सर्वश्रेष्ठ "श्री राधा" नाम सदा रसिकों के हृदय में गूंजता हुआ विराजमान रहता है जो परम पावनता और सुंदरता का सार स्वरूप है...

general

मैं दरसन बिन अनमनी, बैठोंगी मुख मोर

श्री राधा के दर्शन प्राप्त न होने पर मैं व्याकुल होकर उनसे प्रेम में मान कर, मुख मोड़कर बैठूँगी। ऐसा कब होगा कि तब मेरी लाड़ली (राधा) आकर मुझसे कहेंग...

general

किशोरी मोहि श्रीवन वास बसावौ

हे किशोरी श्री राधे, मुझे श्री वृंदावन का वास प्रदान कीजिए, जहाँ मैं सदा आपके चरण-कमलों की दासी बनकर रह सकूँ। कृपा कर मेरी इस अभिलाषा को पूर्ण कीजिए। ...

general

यह रस रसिकन के लिये रसिकहि रस बरसंत

प्रिया प्रियतम का यह दिव्य रस रसिकों के लिए ही है, और इस रस की वर्षा भी केवल उन्हीं पर होती है जो वास्तविक रसिक हैं। केवल रसिकजन ही इस अनमोल रस-रत्न क...

general

प्यारी नख चन्दन कौं कीजिये चकोर मन

ऐसी कृपा हो कि मेरा मन प्यारीजू (श्री राधा) के नख-चंद्रिका में चकोर बन जाए, या मुझे राधेजू के मधुर यश का निरंतर गान करने वाली कोयल बनने का सौभाग्य प्र...

general

श्रीराधे अब बेग सम्हारौ

हे श्रीराधे! अब कृपया शीघ्र मुझे संभाल लीजिए। हे परम नागरी! अब तनिक भी देर न लगाइए, मुझे अपनी निज दासी जान, मुझ पर कृपादृष्टि डालिए। [1] मेरे हृदय ...

general

श्रीगुरु दीन दयाल जू यह अभिलाषा मोर

हे दीनदयाल गुरुदेव! मेरी यह अभिलाषा है कि युगल-चन्द्र (राधा-कृष्ण) के चरण-कमलों की छवि मेरे मन रूपी भौंरे की गति को चुरा ले, अर्थात् मेरा मन सदा उन श्...

general

एहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू की

हे सुकुमारी (श्री राधा)! आप कुंज-बिहारी श्री कृष्ण के प्राणों की प्यारी हैं। मेरी अल्पता को जानकर अपनी कृपा-दृष्टि मुझ पर डालिये। [1] मैं जीवन का वास...

general

रूप हद नेह हद मधुर अनूप हद

जो सुंदरता, प्रेम, अद्वितिय मधुरता, शीतलता, सुघरता की सीमा हैं एवं मन को हरने वाले हैं! [1] जो विमल पराग, अरुणता, कांति एवं सरसता की सीमा हैं, जो स...

general

किधौं रूप सागर तें प्रगटे कमल जुग

कभी वे ऐसे लगते हैं मानो रूप-सागर से प्रकट हुए दो कमल हों, कभी मानो कामदेव को भी लज्जित करने वाली शोभा युक्त हों। [1] कभी समस्त आभूषणों की शोभा को एक...