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Sacred Scripture

श्रृंगार रस के पद

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

25 items
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मेरी राधा प्रिय आधार

मेरी स्वामिनी श्री राधा प्रिय श्याम सुंदर का प्राण आधार है। इनकी गौर श्याम की छवि छबीली एवं अपरम्पार है। [1] वृंदावन निकुंज महल में सखियों संग यह नित...

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राधे रूप की उज्यारी

श्री राधा रूप सौंदर्य से उज्ज्वल हैं। उनका चेहरा 'शरद पूर्णिमा' के चंद्र के समान है, नैंन रतनारे हैं, और तन सुख का सार स्वरूप है। [1] श्री राधा के अ...

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तो सी तुही मेरी प्रान पियारी

हे मेरी प्रान प्यारी श्री श्यामा प्यारी, आपके समान तो केवल और केवल आप ही हो, अन्य कोई नहीं (अर्थात श्री राधा जू की तुलना अन्य किसी से कदापि नहीं की जा...

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राधा नाम मुकट मनि मंत्र

समस्त मंत्रों का मुकुट मणि एवं शिरोमणि मंत्र श्री “राधा” नाम है जो आगम, वेद, पुराण आदि से भी परे है एवं तंत्र भी जिसे त्रिलोक में खोजने का प्रयास कर र...

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रंगीले दोउ कुंज महल में राजैं

रंगीली दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण सदा कुंज महल में विराजते हैं एवं नूपुर की दिव्य धवनि उत्पन्न कर अनवरत केलि रस बरसाते हैं। [1] यह रसीले दोउ एक दूसरे...

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श्री वृंदावन चंद बिहारी

श्री बाँके बिहारी लाल जो नित्य नयी नयी केली करने वाले ठाकुर हैं वे वृंदावन धाम के मानो चंद्रमा हैं। इनकी विलक्षण रूप माधुरी बहुत सुहावनी लगती है जिसकी...

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विहरत विपिन भरत रंग ढुरकी

श्रीवृंदावन में नित्यविहार-परायण लाड़िली (श्री राधा) प्रसन्न होकर लाल (श्री कृष्ण) पर प्रेम-रंग की वर्षा कर रही हैं। हर्ष से भरकर उन्होंने कुसुम-पराग ...

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सुख रासि हमारी प्यारी जू

हमारी प्यारी जू [श्री राधा] सुख की राशि हैं। वे प्रगाढ़ आनंद से सदा भरी रहती हैं, रस में उन्मत्त होकर, रोम रोम से प्रेम बरसाती हैं। [1] उनकी प्रीति छ...

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मेरी कुंजबिहारिन रानी

मेरी स्वामिनी कुँजबिहारिनी श्री राधारानी हैं, जिन्हें कुंजबिहारी श्री कृष्ण बड़े हर्ष से लाड़ लड़ाते हैं, जिनके अंग-अंग की छवि की कांति वाणी से परे है। [...

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स्यामा नित्य बिहार बनी

मेरी श्यामा जू नित्य विहार में अति शोभायमान हैं। उनके संग नित्य ही कुंज बिहारी भी शोभायमान हैं जो श्री श्यामा जू के रस में सदा मगन रहते हैं। [1] उनके...

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लड़ैती जू की साहिबी अटल बनी

लड़ैती जू (श्री राधा) की साहिबी (सर्वोच्चता) अटल बनी हुई है, जिनके सुख में ही श्यामसुन्दर स्वयं का सुख मानते हैं। [1] अन्य समस्त रसों से मुख मोड़कर, ...

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विलसत रंग महल सुखरासी

(राग सारंग) विलसत रंग महल सुखरासी। स्यामा-स्याम केलि अवलोकत, आनंद निधि हरिदासी। [1] विविध केलि रस रंग माधुरी, छवि अद्भुत प्रकासी। श्री विपुल विहारिन स...

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मेरी बिहारिनि मेरी मेरी

मेरी बिहारिनी (राधा), मेरी है, मेरी है जो तन और मन से मिली हुई, रस में उन्मत्त होकर, विहारण करती है तथा मेरी ओर निहार निहार कर हर क्षण मुस्कुराती है। ...

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लडैती जू तेरी रङ्ग भरी मुसिक्यानि

हे लड़ैती जू (श्री राधा), आपकी मुस्कान प्रेम रंग से भरी है, जो सुख की अद्भुत खान है एवं तन-मन में आनंद को बढ़ाने वाली है। [1] परम प्रवीण किशोरी राधे ...

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होरी खेलैं श्यामा श्याम

श्री श्यामा-श्याम होली के आनंदमय रंगों में मग्न हैं, उनकी मोहक दृष्टियाँ प्रेम के रंगों में सराबोर हो रही हैं। कमान-सी टेढ़ी भौहें जल-वृष्टि करने वाली...

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श्रीकुंजबिहारिनि ललित लाडिली

निकुंज में विहार करने वाली कुंजबिहारिणी (श्रीराधा) अद्भुत रूप और माधुरी की खान हैं। [1] उनकी मधुर मुस्कान से प्रेमरस बरसता है जिससे वे श्यामसुंदर को...

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लडैती आनंद निधि सुखरासी

नित्य विहारिणी श्रीराधा आनंद की निधि और सुख का अगाध सागर हैं। वह महाप्रेम से भरी हुई, सहज रूप से छबीली एवं सदा अपने प्रियतम कुंजबिहारी के निकट रहती है...

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सहज बिहार निरन्तर मेरौ

प्रिया-प्रियतम की कृपा से उनका नित्य विहार मुझे अब सहज उपलब्ध है। दोनों प्रिया-प्रियतम तन-मन से एक होकर विहरण करते हैं, और हर क्षण प्रेम और भी अधिक गह...

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प्यारी तेरी छबि पर रबि ससि वारौं

हे प्यारी जू (श्री राधा)! तुम्हारे अनुपम सौंदर्य पर तो मैं सूर्य और चंद्रमा को भी अर्पण कर दूँ। निकुंज महल में सुंदर शय्या पर विराजित तुम्हारे संग प्र...

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बिहारिनि तेरेई रंग रंगी

हे मेरी प्यारी श्री बिहारीनी जू (श्री राधा), मैं तो सदा से तुम्हारे ही रंग में रंगी हुई हूँ। तुम्हारे पक्ष में ही सदा खड़ी होकर, तुम्हारे ही प्रेम में...

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श्री कुंजबिहारिनी सब सुखकारी

श्री कुंज बिहारिणी (श्री राधा) समस्त सुखों का दान करने वाली हैं। श्रीधाम वृंदावन के निभृत निकुंज में, वे अपने प्रियतम कुंजबिहारी के संग सदा “नित्य विह...

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बिहारिनि लाडिली रस माती

बिहारिनि रानी श्री राधा रस में उन्मत्त हैं। सुख की राशि लाड़िली, अति आनंद में भरकर, मंद-मंद मुस्कुरा रही हैं। [1] उनकी रूप-माधुरी अति अद्भुत है जो कहत...

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स्यामा तू करुना को सागर

हे श्यामाजू (श्री राधा)! आप अगाध करुणा की सागर हैं। आपकी दिव्य कान्ति को निहारकर रसिक-चूड़ामणि श्री कुंजबिहारी भी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। [1] आपके मु...

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रस मत्त बिहारिनि प्यारी है

श्री कुंजबिहारिन (श्री राधा) प्यारी प्रेमोन्माद में उन्मत्त रहती हैं। उनका रूप अद्भुत उज्ज्वलता से युक्त है; केवल थोड़ी सी दृष्टि से निहारने मात्र से ...

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मैं जानी मैं जानी लडैती जू

हे लाड़िली जू! अब मैंने आपके वास्तविक स्वरूप और महिमा को जान लिया है। हे किशोरी जी! आप अत्यंत उदारमयी हैं और विलक्षण प्रेम एवं आनंद की अक्षय निधि हैं।...