सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री सहजो बाई
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री सहजो बाई वाणी संग्रह

general

बैठे लेटे चालते, खान पान व्यौपार

बैठते, लेटते, चलते, खाते-पीते या व्यापार करते समय — जीवन की प्रत्येक अवस्था और प्रत्येक स्थान पर — श्री श्यामा-श्याम का अखंड, अनन्य भाव से स्मरण करते ...

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मन में तो आनंद है तनु बौरा सबअंग

सहजोबाई कहती हैं कि जब भगवत्प्रेम से मन अभिभूत हो जाता है तब मन में आनंद छा जाने पर शरीर के सब अंग भाव मग्न हो जाते हैं। उस दशा में न तो किसी के संग क...

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सब तीरथ गुरु के चरन

सहजोबाई जी कहती हैं कि गुरुदेव के चरणों में सारे तीर्थ रहते हैं तथा उनकी सेवा करने से सदा पर्व का फल मिलता है। सद्गुरु के चरणोदक लेने से कोई भी पाप शे...

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प्रेम दिवाने जो भये मन भयो चकना चूर

सहजोबाई कहती हैं कि जो जीव भगवान के प्रेम में दीवाना हो जाता है उसका मन उन्मत्त अवस्था में रहकर समस्त सांसारिक वासनों को चूर चूर कर देता है। ऐसा जीव प...

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सहजो कारज जगतके, गुरु बिन पूरें नाहिं

सहजो कारज जगतके, गुरु बिन पूरें नाहिं। हरि तो गुरु बिन क्या मिलें, समझ देख मन माहिं॥ - श्री सहजो बाई गुरु के बिना संसार में सफल होना भी दुरूह है, तो...

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सहजो संगति साधु की

सहजोबाई कहती हैं कि साधु के संग से इस संसार की समस्त व्याधियों से छुटकारा मिल जाता है। मन की समस्त बुराईयाँ एवं पाप आदि की वृत्ति भी नष्ट हो जाती है ...

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प्रेम दिवाने जो भये नेम धरम गयो खोय

जो भगवान के प्रेम में दीवाने हो चुके हैं, वे नियम और धर्म की सीमाओं से परे हो जाते हैं। यद्यपि संसार उन पर हँसता है, फिर भी उनका मन सदा आनंद में मग्...

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तुम गुनवंत मैं औगुन भारी

हे पतित पावन, श्री लाल बिहारी, श्रीकृष्ण! आप समस्त गुणों से पूर्ण हैं, जबकि मैं केवल दोषों से भरा हुआ हूँ। मैंने आपकी शरण में रहते हुए भी अनगिनत पाप क...

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अब तुम अपनी ओर निहारो

हे परम कृपालु, श्री श्याम श्याम! अब आप अपनी ओर निहारो। मेरे अवगुणों को न देखते हुए आप अपनी प्रतिष्ठा पर विचार कीजिए। [1] आपके यशोगान को युगों युगों स...

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ऐसा सुमिरन कीजिए सहज रहै लौ लाय

ऐसा सुमिरन (स्मरण) कीजिए जिससे तुम्हारा ध्यान सदा ही सहजता से बना रहे। जीभ या तालु का उपयोग किए बिना, केवल मन को लगाकर भगवान की प्रेमाभक्ति में लीन हो...

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प्रेम दिवाने जो भये कहैं बहकते बैन

जो प्रभु-प्रेम में मतवाले होते हैं, उनकी बातें सांसारिक लोगों को अटपटी और विचित्र लगती हैं। वे पल भर में प्रभु की याद में अश्रु बहाते हैं, तो अगले ही ...

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प्रेम दिवाने जो भये जाति बरन गइ छूट

जो जीव प्रभु के प्रेम में उन्मत्त हो जाते हैं, उनके लिए जात-पांत, ऊँच-नीच का भेद मिट जाता है। सहजोबाई कहती हैं—संसार उन्हें बावरा कहता है, परंतु वे लो...

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सहजो सुमिरन कीजिए हिरदे माहिं दुराय

सुमिरन चुपचाप, छिपा कर मन ही मन करना चाहिये। न जीभ हिलनी चाहिये और न होंठ हिलने चाहिए। सुमिरन इस प्रकार करना चाहिये कि केवल सुमिरन करने वाले को और जिस...

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मुकुट लटक अटकी मनमाहीं

श्रीकृष्ण की लटकती हुई मुकुट की छवि मन को मोह लेती है। नटवर नागर श्रीकृष्ण नृत्य करते हुए इतने सुंदर लग रहे हैं जिससे साक्षात कामदेव भी भी मोहित हो जा...

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कबहूँ हकधक हो रहै, उठै प्रेम हित गाय

सच्चे प्रेमी भक्त के लक्षण बताते हुए सहजो बाई कहती हैं कि कभी वह भक्त प्रेम-भाव में इतना डूब जाता है कि स्तब्ध रह जाता है और उसे बाहर की कोई सुधि नहीं...

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सहजो भवसागर बहै तिमिर बरस घर घोर

सहजोबाई कहती हैं कि यह संसार अगाध भवसागर के समान है, जिसमें अज्ञान का घना अँधकार बरस रहा है। ऐसे अंधकारमय सागर से केवल नाम-रूपी जहाज ही ऐसा साधन है, ज...

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आठ पहर सुमिरन करै बिसरै ना छिन एक

भगवान का सुमिरन आठों पहर, अर्थात् प्रत्येक श्वास के साथ निरंतर करते रहना चाहिए, और एक क्षण के लिए भी उन्हें नहीं भूलना चाहिए। चारों वेद, अठारह पुराण त...

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प्रेम दिवाने जो भये पलटि गयो सब रूप

जो भगवान के प्रेम में दीवाने हो जाते हैं, उनके लिए संसार का दृष्टिकोण बदल जाता है। सहजोबाई कहती हैं — अब उन्हें राजा और रंक में कोई भेद दिखाई नहीं देत...

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हम बालक तुम माय हमारी

हे गुरुदेव! मैं आपका बालक हूँ, और आप मेरी सच्ची माता हैं, जो प्रत्येक क्षण मेरी रक्षा करती हैं। [1] मुझे सदा अपनी गोद में रखें, अपने प्रेम-भरे वचनों ...

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जागत में सुमिरन करै सोवत में लौ लाय

जागृत अवस्था में निरंतर प्रभु का स्मरण बना रहे और निद्रा के समय भी उन्हीं की लौ (चिंतन) लगी रहे। सहजो बाई जी कहती हैं कि इस प्रकार भक्ति सदैव बनी रहनी...

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प्रेम दिवाने जो भये प्रीतम के रँग माहिं

परम प्रियतम भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम में रंगा हुआ जीव संसार, शरीर और परमार्थ की स्मृति से परे हो जाता है। उसे न जग की परवाह रहती है, न वैकुंठ/मुक्ति आ...