shri priya sakhi (shri brahm gopal gosvami)
Biography & History
shri priya sakhi (shri brahm gopal gosvami) Collected Verses
श्री राधिका माधव छवी अपार
(पद) श्री राधिका माधव छवी अपार। करत प्रेम परिवार मिलीं, अलि आरति रति श्रृंगार॥ [1] वीनावेनु वाद्यवर विलसित, गावत जय जय कार। श्री प्रियासखी तृनतोर जोर...
रसिक किशोरी नागरी नागर रसिक किशोर
सहचरियों के चित्त को चुराने वाले, रसिक किशोरी श्री राधा नगरी एवं रसिक शेखर श्री कृष्ण चंद्र ही मेरे जीवन धन हैं।
धन्य धन्य वृन्दावनी
धन्य है यह वृन्दावन, जिसकी सुंदर लताएँ अनुपम शोभा बिखेर रही हैं। धन्य है युगल सरकार श्रीराधिका-माधव और उनके इस पावन कुंजों में होने वाले प्रेममय विहार...
परम प्राण धन कुंज में करत विहार विशाल
प्राणों के परम प्राण-धन, आनन्द-सिन्धु के चन्द्रस्वरूप श्री युगल राधा–माधव श्री धाम वृन्दावन के कुंजों में नित्य विहार परायण हैं।
विहरत कुंज कुटीर दोऊ श्री जमुना रस तीर
श्री राधा-कृष्ण दोनों श्री यमुना के रस-भरे तट पर कुंज-कुटीरों में नित्य विहार करते हैं। वहाँ प्रेम का अखण्ड, आनन्दमय क्रीड़ा-विलास प्रकट होता है — एक ...
जै जै माधो मन मोहिनी श्रीराधिके
(पद) जै जै माधो मन मोहिनी श्रीराधिके। जै जै रस सिन्धु सुधा रस अगाधि के॥ [1] रसिक विहारी जू के वेश केश आधिके। रंग अंग अंग की उमंग सुख साधिके॥ [2] वल्...
श्री राधा रस मोहिनी
श्री राधा महारानी जू साक्षात् रस मोहिनी हैं अर्थात् जिन्होंने अपने रस से सबको मोहने वाले मोहनलाल (श्री कृष्ण) को भी मोहित कर लिया है। श्री कृष्ण उनके ...