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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

shri sundaradasa Collected Verses

general

कांम ही न क्रोध जाकै

जिसमें न काम है, न क्रोध है; न लोभ, न मोह; न अहंकार, न ईर्ष्या; उसमें कोई भी विकार नहीं है। [1] जो न सुख-दुख में भेद करता है, न पाप-पुण्य में, न हर...

general

कोऊ फिरै नाँगे पाइ कोऊ गुदरी बनाइ

कोई नंगे पाँव फिरता है, कोई फटे कपड़े पहनता है, वे अपने शरीर को कष्ट देकर केवल अपना वैराग्य दिखाना चाहते हैं। [1] कुछ केवल दूध पर रहते हैं, कुछ केवल ...

general

श्वान कहूं कि शृगाल कहूं कि

मैं इस मन की विचित्र गति को क्या कहूँ? कभी इसकी प्रवृत्ति कुत्ते जैसी प्रतीत होती है, जो लोभ और भूख से हमेशा व्याकुल रहता है; कभी सियार जैसी, जो छल-कप...

shloka

बैठत केवल उठत केवल

बैठना, उठना और सम्भाषण—सब कुछ उस ब्रह्म का ही रूप है। जाग्रत अवस्था हो या निद्रा, अथवा जगत में जो कुछ भी दृष्टिगोचर होता है, उन समस्त प्रपंचों में केव...

general

योग यज्ञ जप तप तीरथ ब्रतादि दान

योग, यज्ञ, जप, तप, तीर्थाटन, व्रत और दान—ये सभी साधन मिलकर भी 'संत-सेवा' की समानता नहीं कर सकते। [1] यदि कोई अन्य नाना प्रकार के देवी-देवताओं की साधन...