Verses & Passages
94 itemsरोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात
श्री राधे, यदि मेरे रोम रोम जिह्वा होती तब भी आपके गुणों का बखान करने में असमर्थ है।
पिय सौं तू जोई जोई करै सोई छाजै
श्री हरिदासी सखी कहती हैं हे प्यारी जू [राधे] आप जो जो भी करती हैं प्रियतम [श्री बिहारीजी] को वो सब सब प्रिय लगता है। हे प्यारी, आपकी कौन समानता कर सक...
गुन की बात राधे तेरे आगैं को जानैं
श्री ललिता सखी [श्री हरिदासी सखी] निकुंज विहारिणी श्री राधा जू के गुणों का वर्णन कर रही हैं : "हे राधे, ऐसा कौन है जो आपके गुणों का वर्णन करने में समर...
भूलैं-भूलैं मान न करि री प्यारी
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं, जब श्री हरिदासी [ललिता सखी] भी उनके पास ही खड़ी हैं। हे राधे, भूल से भी आप हमसे मान मत कीजिये! जब मैं आपकी भौंहों च...
तेरौ मग जोवत लाल बिहारी
श्री हरिदासी सखी कहती हैं कि हे प्यारी जू, श्री बिहारीजी आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं, आप हैं कि समाधि लिए बैठी हैं, एवं समाधि भी आप तोड़ना नहीं चाहती, आ...
आवत जात बजावत नूपुर
निकुंज महल में सुंदर सेज शोभायमान है, श्री प्यारी जू आते जाते सुंदर मधुर नूपुरों की धवनि सुन श्री कुंज बिहारी की केली विलास की इच्छा तीव्र हुई। श्री क...
दामिनि कहत मेघ सौं
दामिनी मेघ से कहती हैं कि श्यामा श्याम की जो जन हमारे से उपमा [तुलना] देते हैं वह उपमा देना ही झूठ है। परंतु श्री लाल जी तो साँचे मेघ एवं श्री स्वामि...
झुलत डोल दोऊ जन ठाढ़े
आज दोऊ जन [श्री राधा कृष्ण ] आनंद में संलग्न झूला झूल रहे हैं। महा यौवन की प्रबलता से भरे वे झूले के डंडी-रस्सी अपने हस्त कमलों से पकड़े हुए एवं झूले क...
प्यारी अब सोइ गई
श्री हरिदासी [ललिता] सखी कहती हैं: हे प्यारे, प्यारी जू [राधिका] अब सो गयी हैं। जैसे जैसे मैं इन्हें जगाने की कोशिश करती हूँ, वैसे वैसे यह उतना ही नह...
प्यारी जू आगै चलि
हरिदासी [ललिता] सखी कहती हैं: श्री प्यारी ज़ू [राधा रानी] आगे आगे चलिए, गहवर वन के भीतर और भीतर जहाँ कोयल गा रही है। वहाँ अति ही विचित्र फूलों एवं पत...
जहाँ जहाँ चरन परत प्यारी
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि जहाँ भी आपके कमल स्वरूप चरण पड़ते हैं, मेरा मन मानो परछाईं की तरह उन्ही चरणों के पीछे फिरता है। [1] मैं अनेक रूप ...
हँसत खेलत बोलत मिलत
श्री हरिदासी सखी अन्य रसिक सखियों से कहती हैं: दिव्य दंपति प्रीतम प्यारी रस भरे सागर में हँस हँस - मिल कर खेल - खेल रहे हैं, बातें कर रहे हैं और रस म...
दुहुँनि की सहज बिसाँति
हरिदासी सखी अन्य सखी से कह रही हैं। श्री कुञ्ज बिहारी बिहारिनी एक संग सहज ही रसमय केलिपरायण हो शतरंज की मधुर विसाँति (बिछौना) बिछा खेल खेल रहे हैं। [1...
झूलत डोल श्रीकुंजबिहारी
सखी सखी से कह रही है- अति आनंद से भर पुष्यों के निकुंज में पिय प्यारी दोनों (डोल) झूला झूल रहे हैं। एक ओर कुंज बिहारी हैं तो दूसरी ओर रसिकों की स्वामि...
बनी री तेरे चारि चारि चूरी करनि
श्री लाल जी [कृष्ण] श्री लाडिलीजी [राधा] से बोले- हे प्यारीजी, आपके सुकोमल करों में चार-चार चूड़ियाँ अत्यंत शोभायमान हैं।आपके कंठ में रत्नों हीरे से ज...
हरि के अंग कौ चंदन लपटानौ
एक सखी श्री प्रिया जी से कह रही है- हे श्यामा जू, श्री हरि के अंग से लगा हुआ चंदन आपके तन पर लग गया है। ऐसा लग रहा है, मानो आपने पीले रंग की चोली पहन...
चलिये छबीली छबीलौ बोलत
सखी कहती है: हे छबीली जी [श्री राधिका] चलिए मेरे संग, छबीलौ [श्याम सुंदर] आपको बुला रहे हैं। श्री श्याम सुंदर की आज की बानिक पर तृण टूटत है अर्थात आज ...
सुघर भयै हौ बिहारी याही छाँह तें
सखी [ललिता] श्री राधिका से कहती हैं: प्यारी राधे, श्री बाँके बिहारी जी आपकी छाया [चरण कृपा के बल] से ही सुघर [चतुर, कुशल] बन पाये हैं। उनका पूर्ण आकर्...
मानि तूब चलि री एक संग रह्यौ कीजै
सखी श्री राधे की मान की सम्भावना देख बोली - नयन बाँके कर कहाँ चली, हे मानिनी, आप दोनों एक संग रहें। ऐसा तभी कीजिए यदि आप उनके बिना जी सकती हैं। प्रिय ...
यह अचरज देख्यौ न सुन्यौ कहूँ
एक सखी अपनी अंतरंग सखी से कहती है: ऐसा आश्चर्य न ही कभी देखा है और न ही सुना है कि एक दामिनी [श्री राधा] एक नवीन मेघ [श्री कृष्ण] संग नित्य एक रस विलस...
कस्तूरी कौ मर्दन अंग में कियैं मुरली धरैं
सखी कहती हैं: आज श्री राधे ने अपने अंगों में कस्तूरी का मर्दन, होठों पर बांसुरी, एवं पीताम्बर वस्त्र धारण करके श्याम [कृष्ण] का रूप धारण किया है, और प...
ऐसी जिय होत जो जिय सौं जिय मिलै
श्री श्यामसुंदर प्यारी श्री राधा से कहते हैं - हे प्यारी जू, मेरी ऐसी इच्छा हो रही है कि हृदय से हृदय मिल जाये, तन में तन समा जाय, परन्तु हे प्यारी, ...
प्यारी तौपै कितौक संग्रह छबिन कौ
कुंज महल में श्री लाल जू प्रिया जी के चरणों से लिपटे हैं। श्री लाल जी [कृष्ण], श्री राधा से कहते हैं: हे प्यारी जू, तुम्हारे पास छबि के कितने संग्रह ह...
नील लाल गौर के ध्यान बैठे कुंजबिहारी
दिव्य दम्पति श्री कुंज बिहारी बिहारीनी विभिन्न रत्नों से जटित शैया पर विराजमान हैं। श्री लाडिली जी के अति अद्भुत श्रृंगार ने श्री लाल जी को मोह लिया ह...
प्यारी जू जब जब देखौं तेरो मुख
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं— हे प्यारी जू! जब भी मैं तुम्हारे मुख-कमल को देखता हूँ, तो ऐसा लगता है जैसे मैं तुम्हें पहली बार देख रहा हूँ। ऐसा भ्र...
अद्भुत गति उपजति अति नृत्तत
मंडलाकार सखियों के मध्य श्री श्यामा-श्याम नृत्य कर रहे हैं जिससे अद्भुत गति प्रकट हो रही है। [1] भोरी श्री राधा एवं श्याम सुंदर अंग-से-अंग मिलाकर सुध...
प्यारी जू हम तुम दोऊ इहाँ न कोउ हितू मेरौ
(श्री कृष्ण निभृत निकुंज में श्री राधा से कहते हैं): हे प्यारी जू, हम दोनों एक ही कुंज के साथी हैं, तो हम क्यों एक दूसरे से रूठें। यहां कोई हमारा ऐसा ...
सुनि धुनि मुरली बन बाजै
अरी सखी! कुंजों में बज रही मुरली की धुन सुन, श्री हरि ने रास रचाया है। प्रत्येक कुंज में वृक्ष एवं लताएँ प्रफुल्लित हैं एवं रास मण्डल सोने एवं मणियों ...
फूलीं सब सखी देखि देखि
रसिक सखीगण हरिदासी सखी को लाडिली-लाल को लाड़-लड़ाते, दुलराते निहार अति प्रसन्न हो रही हैं। [1] नैन कमल, मुख कमल, चरण कमल की सेवा में बिहारीजी मगन हैं।...
राधा रसिक कुंजबिहारी कहत जु हौं
रसिक श्री कुंजबिहारी श्री राधा से कहते हैं - प्यारी राधे, सुनो! आपकी सौगंध, में आपको छोड़ कर कहीं नहीं गया। [1] यदि आपके हृदय में संदेह उत्पन्न हो रह...
प्यारी तेरी बॉफिन बान सुमार
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं - हे प्यारी जू! आपकी चितवनि अर्थात् पलकें बाण के समान हैं एवं भौंहें धनुष के समान हैं जिसके प्रहार से कोई नहीं बच सकत...
यह कौन बात जु अबही और अबही और
श्री हरिदासी सखी मनोहर शैय्या पर विराजित लाल लाड़िली से लाड़ लड़ा रही हैं। श्री कुंजबिहारी कहते हैं हे प्यारी जी, यह कैसा अद्भुत आपका रूप लावण्य है जो...
सोई तौ बचन मोसौं मानि
निकुंज महल में दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण विराजमान हैं। उसी समय श्री राधा अपना प्रतिबिंब देखते हुए, अपने ही प्रतिबिंब से मधुर वचन कहने लगीं: हे सुंदर...
नव निकुंज ग्रह नवल आगैं
नवल निकुंज में नवल प्रियतम के समक्ष नवल वीना लिए श्री प्यारी जू [श्री राधा] ने गौरी राग का वादन आरम्भ किया । प्रिया पिय से बोलीं- जैसा मैं सिखा रही ह...
अजहूँ कहा कहति है री मारै नैंन आरनि
ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी श्री प्रियाजू (श्री राधा) से कहते हैं - हे प्रियाजू ! आपकी चितवन के प्रहार से लाल (श्री कृष्ण) के हृदय में ऐसी वेदन...
प्यारी तेरौ बदन चंद देखैं
लालजी (श्री कृष्ण) श्री राधा से कहते हैं - हे प्यारी जू, आपके चन्द्र वदन को देखकर मेरे हृदय रूपी सरोवर में चाह रूपी कमल प्रफुल्लित हुई है। [1] लालजी ...
प्यारी तू गुननि राइ सिरमौर
हे कुंजबिहारिणी श्री राधे! आप समस्त गुणों में अग्रणी, राजाओं में सिरमौर हैं। नृत्य और गायन की अनुपम कला में आप अद्वितीय हैं। आपकी मनोहर गति से नाना प्...
कुंजबिहारी कौ बसन्त सखि
अरी सखी ! चलो न, श्यामा- कुञ्जविहारी का वसन्तोत्सव देखने चलें। देखो, श्रीधाम वृन्दावन नव-नव उमंगों से पुलकित हो रहा है। इसकी कुंज निकुजें भी नवीन हैं ...
डोल झूलत बिहारी बिहारिनि
श्री श्यामा श्याम आनंद में भर अंग से अंग मिलकर निकुंज में झूला झूल रहे हैं एवं फूलों की वर्षा हो रही है। सुर लोक, गंधर्व लोक एवं अन्य लोकों की नारिय...
हिंडोरेंब झूलत लाल दिन दूलहु
सखी सखी से कह रही है- सखी देख! निकुंज के सुख पुंज महल में दोनों प्रिया प्रियतम हिंडोले में प्रेम रूपी रूपी डोरी से बंधे अंग संग दुल्हा दुलहिन बने झूल ...
नाचत मोरनि संग स्याम
श्री श्यामसुंदर मोरों के संग मनभावन नृत्य कर श्री श्यामा जू को रिझा रहे हैं। [1] उसी प्रकार कोयल गान करने लगी और पपीहा भी उसके संग अपना सुर मिला देती...
द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा
श्री कुंजबिहारिणीजू (श्रीराधा) के गले में मोती की दो लरियों वाला हार, सादा और एकदम सुगठित है।हे सखी! मेरी दृष्टि उनसे हटती ही नहीं। [1] उनके दोनों हा...
चलि री भीर तें न्यारेई खेलैं
श्री कृष्ण श्री राधिका से कहते हैं: हे प्यारी जी! भीड़ से हट एकान्त में क्यों न हम और आप कुंजों एवं निकुंजों के मध्य कोई न्यारा खेल खेलें।[1] जहां को...
ऐसी तौ बिचित्र जोरी बनी
दिव्य वृन्दावन के निकुंज में प्रिया-प्रियतम की विचित्र जोड़ी अति शोभायमान है मानों श्याम तमाल पर कंचन बेलि श्यामा जी लिपटी हुई हैं। इस शोभा को निरख सखी...
बेंनी गूँथि कहा कोउ जानें मेरी सी
आज श्रीलाल (श्रीकृष्ण) की प्रबल अभिलाषा है कि उन्हें प्यारीजू (श्रीराधा) की वेणी गूंथने का सौभाग्य प्राप्त हो। श्री प्रिया जू का कथन है कि यह सेवा सखि...
प्यारी तेरी महिमा वरनी न जाय
प्रियतम कह रहे हैं— हे प्यारी जू, आपकी महिमा का वर्णन मैं कैसे करूँ? मुझे कामरूप प्रेम ने वश में कर रखा है, और आप अति सुकुमारी हैं; आलसवश केलि को भी म...
प्यारी जैसो तेरो आँखिन में मैं होँ
लाल जी प्रिया जी से कह रहे हैं- हे प्यारी जी ! आपके रस भरे नयनों में मैं अपनापन देख रहा हूँ । क्या आप भी मेरे नयनों में उसी भाँति अपनापन देख रही हैं य...
ऐसि तौ विचित्र जोरि बनी, ऐसि कहुँ देखि सुनि न बनी
ऐसि तौ विचित्र जोरि बनी, ऐसि कहुँ देखि सुनि न बनी - श्री हरिदास, केलिमाल श्री हरिदास जी कहते हैं की दिव्य दम्पति यह प्रिय प्रियतम की ऐसी जोरि है जो ...
देखि देखि फूल भई
(राग कान्हरौं) देखि देखि फूल भई। प्रेम के प्रकास प्रीति के आगैं ह्वै जु लई॥[1] सुनि री सखी बागौ बन्यौ आजु तुम पर तृन टूटत है जु नई। श्रीहरिदास के स्...
राधे दुलारी मान तजि
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं: हे दुलारी राधे, आप मान तज प्रसन्न हों। आपकी चढ़ी हुई चितवन मुझे अत्यंत भयभीत कर रही है। आपकी प्रसन्नता में मेरे प्रा...
कुंजबिहारी नाचत नीके; लाड़िली नचावति नीके
श्री कुंजबिहारी [श्री कृष्ण] सुंदर नृत्य कर रहे हैं, श्री राधिका उन्हें सुन्दर ढंग से नृत्य करा रही हैं। श्री बिहारीजी और उनकी प्रिया श्री राधिका दोनो...
आजु की बानिक प्यारे तेरी
सखी प्रिया-प्रियतम से कह रही है— आज आप दोनों की ऐसी अद्भुत शोभा बनी है, जैसी कभी देखी न गई। इस छवि का यथार्थ वर्णन करना संभव नहीं। [1] प्यारी जी! प्...
यह कौन बात जू अबहीं और अबहीं और
श्री हरिदास जी कहते हैं की श्री बिहारीजी श्री राधारानी से कहती हैं कि हे प्रिय जो आपका यह रस कितना अलौकिक है और किस प्रकार का है कि जितना भी इस रस को ...
“रोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात || ”
श्री राधे, यदि मेरे रोम रोम जिह्वा होती तब भी आपके गुणों का बखान करने में असमर्थ है।
रोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात
रोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात । कहा कहों एक जीभ सखी री, बात की बात बात । श्री हरिदास के स्वामी श्याम कहत री, प्यारी तू राखत प्राण आधार...
श्री हरिदास के स्वामी स्यामा-कुंजबिहारी की
यदि अनंत कोटि रसिक संत भी बताना चाहें, तो भी राधा कृष्ण के आलौकिक सौंदर्य का वर्णन नहीं कर सकते।
जहाँ जहाँ चरन पडत प्यारी जू तेरे
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि जहाँ भी आपके कमल स्वरूपी चरण पड़ते हैं, मेरा मन मानो परछाई की तरह उन्ही चरणों के पीछे फिरता है।
तुव जस कोटि ब्रह्माण्ड बिराजे राधे
श्री लाल जी श्री प्यारी जू से कहते हैं कि आपका यश अनंत कोटि ब्रह्माण्डों में व्याप्त है और आपकी शोभा अगाध एवं अनंत है अर्थात उसका वर्णन करना सर्वथा अस...
बचन दै मान न करौं
प्रियतम बाँके बिहारी श्री राधा रानी से कहते हैं— हे प्यारीजू! वचन दीजिये कि आप कभी मान न करेंगी। मन से कभी मान नहीं करेंगी, वचनों से कभी रुखाई न बरतें...
बात तौ कहत कहि गई
निकुंज महल में प्रिया प्रियतम सुख सेज विराजमान है। बिहारी जी बिहार की विनती कर रहे हैं। प्यारे जी की बात पर प्यारी जी को विश्वास नहीं। वह मुख फेर हँसत...
प्यारी तेरी पुतरी काजर हू तैं कारी
हे प्यारीजी [राधे], आपके नयनों की पुतली काजल से भी काली मानों दो भँवर रूप रस पान करने के लिए उड़ उड़ मँडरा रहे हैं। सुनहरे चम्पे के वृक्ष पर कुंदन की ...
राधे चलि री हरि बोलत
श्री हरि [कृष्ण] श्री राधा से बोलते हैं: चलिए कुंज में, जहां कोयल आलाप दे रही है, सुर पंछी गान कर रहे हैं मानो राग में गा रहे हों। [1] जहां मोर भी पं...
रुचि के प्रकास परस्पर खेलन लागे
निकुंजमहल श्याम श्यामा के बिहार से प्रकाशित है। पुष्पों की सेज पर दोनों एकान्त में विलस रहे हैं। प्रिया जी का मुख चन्द्र प्रफुल्लित है। ललिता सखी संगी...
ऐसैंई देखत रहौं जनम सुफल करि मानौं
सुन्दर निकुंज महल में पियप्यारी गलबाँहीं दिये विराजित हैं। दोनों ने पुष्पों के आभूषण धारण कर रखे हैं। आनन्द रस सागर में बिहार कर रहे हैं। सखीगण हर्षित...
तुव जस कोटि ब्रह्मांड बिराजै राधे
भावार्थ: प्यारी को अति प्रसन्न देख प्यारे जी कह रहे हैं - हे राधे, आपका यश प्रताप कोटि - कोटि ब्रह्मांड में विराज रहा है। [1] आपसे प्रेम करने वाले ने...
रोम रोम जो रसना होती तऊ तेरे गुन न बखाने जात
लाड़िली लाल सुन्दर गुलाबों की पत्तियों की सेज पर शोभायमान हो रहे हैं। महा आनन्द रस में पगे हुए हैं। प्यारे प्रियतमा की कृपा में भींगे हुए रोम रोम से प...
जोरी विचित्र बनाई री माई
निकुंज महल में प्रिया प्रियतम शैया पर बैठे एक दूसरे का मुख दर्शन करते हुए परस्पर एकटक निहार रहे हैं। आपस की प्रीति ऐसी है कि उन्हें ना दिवस की खबर है ...
भींजन लागे री दोऊ जन
श्री वृन्दावन की हरी भरी भूमि में दोनों प्रिया प्रियतम अनुराग रंग में रंगे नृत्य कर रहे हैं। प्रिया जी के अंग में सुंदर रंग की साड़ी शोभायमान हो रही ह...
दृष्टि चौंप बर फंदा मन राख्यौ लै पंछी बिहारी
श्री राधा की रस भरी दृष्टि ही एक फंदे के समान है जिसमें बिहारी [कृष्ण] रूपी पक्षी नित्य ही फँसा हुआ है। श्री प्यारी जू का कृपालुता का स्वभाव इस बिहारी...
कुंजबिहारी हौं तेरी बलाइ
कुंजबिहारी की भावना है प्यारी जी आप मुझे अंग संग कर कुंजों विहार कर रही हैं , मैं आप की बलायें यानि बलिहारी पर लेता हूँ, आप अपनी कृपालुता बरसाती रहें ...
श्री हरिदास के स्वामी स्यामा, कुंजबिहारी रस बस करि लीन | प्यारी तेरी महिमा बरनी न जाए, जिहिं आलस काम बस कीन ||
- ललिता अवतार श्री हरिदास - केलिमाल श्री लाल जी लाडी जी को बताती हैं "ओह राधा, आपके महानता का वर्णन करने के लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं है। श्री हरिदास...
प्यारी जैसो तेरो आँखिन में मैं होँ
लाल जी प्रिया जी से कह रहे हैं- हे प्यारी जी ! आपके रस भरे नयनों में मैं अपनापन देख रहा हूँ | क्या आप भी मेरे नयनों में उसी भाँति अपनापन देख रही हैं य...
प्यारी तेरी महिमा वरनी न जाय जिहिं आलस काम बस कीन
प्रियतम कह रहे हैं- आपकी महिमा का वर्णन मैं कैसे करुँ ? मुझे काम - प्रेम ने बस मे कर रखा और आप अति सुकुमारी हैं, आलस में केलि को बिसार दिया। आपके लिए ...
रोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात
श्री कृष्ण श्री राधा रानी से कहते हैं कि यहां तक कि मेरे पास लाखों जिव्हा बोलना के लिए होती हो भी मैं आपके समस्त गुणों का पूरी तरह से वर्णन नहीं कर सक...
जहाँ जहाँ चरन पडत प्यारी जू तेरे
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि जहाँ भी आपके कमल स्वरूपी चरण पड़ते हैं, मेरा मन मानो परछाई की तरह उन्ही चरणों के पीछे फिरता है ।
प्यारी जू जब जब देखौं तेरो मुख
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं: हे प्यारी जू, जब भी मैं तुम्हारे मुखकमल को देखता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे मैं तुम्हें पहली बार देख रहा हूं। ऐसा भ्रम ...
यह कौन बात जू अबहीं और अबहीं और
श्री हरिदास जी कहते हैं की श्री बिहारीजी श्री राधारानी से कहती हैं कि हे प्रिय जो आपका यह रस कितना अलौकिक है और किस प्रकार का है कि जितना भी इस रस को ...
ऐसि तौ विचित्र जोरि बनी, ऐसि कहुँ देखि सुनि न बनी
श्री हरिदास जी कहते हैं की दिव्य दम्पति यह प्रिय प्रियतम की ऐसी जोरि है जो न तो कभी देखि है न सुनी है।
एक समै एकांत बन
एक समय एकांत वन में प्रिया प्रियतम [श्री राधा कृष्ण] एक दूसरे का शृंगार कर, एक दूसरे का प्रतिबिम्ब देख रहे हैं। [1] जैसा आज का श्रृंगार है वैसा अद्भुत...
प्यारी तेरौ बदन अमृत की पंक तामें बींधे नैंन द्वै
कुंजमहल में दोनों प्रिया प्रियतम विराज रहे हैं। प्यारे जी कह रहे हैं - हे प्यारी ! मेरे नयन तुम्हारे अमृत रूपी बदन कमल में फँस तुम्हारा रूप रस का पान ...
माई री सहज जोरी प्रगट भई
बाँके बिहारी लाल के प्राकट्य के समय हरिदास जी कहते हैं- हे सखी सहज जोड़ी नित्य श्याम-श्यामा की प्रकट हुई है। गौर श्याम वर्ण की यह जोरी घन दामिनी के सम...
कस्तूरी कौ मर्दन अंग में कियैं मुरली धरैं
कुंजमहल में हरिदास जी पिय प्यारी को नये-नये लाड़ लड़ा रही हैं। इस सुख आनंद की चर्चा सखीजन आपस में कह रही हैं। सखी कहती है- राधे जी ने श्री श्याम का श्...
प्यारी पहिरैं चुनरी
प्रिया प्रियतम निकुंज में विराज रहे हैं। प्यारी की अंग अंग की संदरता अद्वितीय है। आनंद रस बरस रहा है। प्यारे तो उन पर न्योछावर हो रहे हैं किंतु प्यारी...
जो कछु कहत लाड़िलौ लाड़िली
सखी के समझाने पर कि प्रिय के उर में और कोई नहीं विलस रही यह आप ही हैं। परन्तु लाड़िली मानी नहीं। तब लाल जी के कहने पर सखी कहने लगी- प्यारे जो कुछ भी क...
डोल झूलत दुलहिनि दूलहु
सखी सखी से कह रही है - दोनों प्रिया प्रियतम नये-दुल्हा दुलहिन, पुष्पों से शोभित निकुंज प्रांगण में नवीन भावों के श्रृंगार कर झूला झूल रहे हैं। [1] होल...
आजु की बानिक प्यारे तेरी , प्यारी तुम्हारी छवि बरनी न जाइ छबि। (29)
सखी प्रिया प्रियतम से कह रही है - आज आप दोनों की शोभा ऐसी बनी सो न कभी नहीं देखी । इस छवि का वर्णन नहीं किया जा सकता । प्यारी जी ! प्यारे की श्यामता आ...
तुव जस कोटि ब्रह्माण्ड बिराजे राधे
श्री लाल जी श्री प्यारी जू से कहते हैं कि आपका यश अनंत कोटि ब्रह्माण्डों में व्याप्त है और आपकी शोभा अगाध एवं अनंत है अर्थात उसका वर्णन करना सर्वथा अस...
आज तृण टूटत है री, ललित त्रिभंगी पर
कुंजमहल में विराजमान प्यारे पर प्यारी जी कृपा बरसा रही हैं। प्यार से कहती हैं - हे प्यारे ! मैं बिहारी बनूंगी और आप प्यारी बने । दोनों ने अपने रूप सज...
Kunjbihari Ko Basant Sakhi
(Raag Gaud)Kunjbihari Kau Basant Sakhi,Chalahu Na Dekhan Jahin.Nav Ban Nav Nikunj Nav Pallav,Nav Juvatin Mili Mahin. [1]Bansi Saras Madhur Dhuni Suniy...
तू रिस छाँड़ि री राधे राधे
श्री कुंज बिहारी लाल प्यारी जू से कहते हैं कि हे राधे, हे राधे, आप अपना मान त्याग दीजिए। [1] आपका मान जितना जितना बढ़ता है उतना उतना मुझे कष्ट होता है...
Pyari Tu Gunani Rai Sirmaur
(Raag Sarang)Pyari Tu Gunani Rai Sirmaur.Gati Mein Gati Upjati Nana Raag Raagini, Taar Mandar Sur Ghor. [1]Kahu Kachu Liyau Rekh Chhaya, Tau Kaha Bhay...
Bachan Dai Man Na Karaun
(Rag Kalyan) Bachan Dai Man Na Karaun. Man Bach Kram Tin Hun Ten Na Taraun. [1] Terei Kiyen Man Vyapi Hot, Tan Kahi Kaisen Kain Bharaun. Shriharidas K...
Beni Gunthi Kaha Kou Jane Meri Si
(Raga Saramga)Beni Gunthi Kaha Kou Jane Meri Si Teri Saun. Bicha Bicha Phula Seta Pita Rate Ko Kari Sakai Eri Saun. [1]Baithe Rasika S.nvarani Barani ...
Dvai Lar Motin Ki Ek Punja
(Raag Kanharau)Dvai Lar Motin Ki Ek Punja Poti Kau SaadaNetrani Drishti Laagai Jini Meri.Haathani Chaari Chaari Churi Paaeni Ikasaar ChuraChaupahalu I...