Verses & Passages
20 itemsधन धन वृन्दावन के माछर प्यारे
श्री वृन्दावन के मच्छर भी धन्य धन्य हैं, जो साधु-संत जनों के अंग से लगते हैं, एवं उनसे भजन करवाते हैं। [1] श्री यमुना किनारे जल पर बैठकर मच्छर मतवारे...
धन धन वृन्दावन के गदहा प्यारे
श्री वृंदावन धाम के प्यारे गधे धन्य हैं जो अपनी पीठ पर मिट्टी एवं ईंट को ढोते हैं एवं सब के घरों एवं मंदिरों के निर्माण में सहायता करते हैं। [1] वे व...
धन धन वृंदावन के मैंडक प्यारे
श्री वृंदावन धाम के मेंडक धन्य धन्य हैं जो ठाकुर जी के मंदिर की नाली में बैठ कर न्यारे न्यारे ढंग से बोलते हैं। [1] वे महाप्रसाद का पानी पीकर सारे अप...
धन धन वृन्दावन के मोर
श्री वृन्दावन के मोर धन्य हैं, जो कुंजों के ऊपर नृत्य करते हैं एवं जिन्हें श्री कृष्ण देखते हैं। [1] इनकी बोली बड़ी सुहावनी लगती है, जो निशिदिन हरि की...
धन धन वृंदावन के विरक्त सन्त
श्री वृंदावन धाम के विरक्त संत धन्य धन्य हैं। सुबह होते ही यह संत श्री यमुना जी में नहाते हैं एवं यहाँ की परम पावन रज का सेवन करते हैं (एवं अपने अंगों...
धन धन वृन्दाविपिन गुसाँई
श्री वृंदावन धाम के गोसाईं धन्य धन्य हैं। यह सुंदर आसन डाल कर जप करने बैठते हैं, इनके समान दूसरा कौन होगा। [1] इनको वृंदावन की रज के महत्व का सदा तत्...
धन धन वृन्दावन में राधारानी
श्री वृन्दावन में विराजमान श्री राधारानी धन्य-धन्य हैं, स्वयं सूर्य एवं चंद्र उनके महल के पहरेदार हैं एवं मुक्ति यहां पानी भरती है। [1] पवन आकर वहां ...
धन धन वृंदावन की कोयल कारी
श्री वृंदावन धाम की कोयलें धन्य हैं, जो सदा वृंदावन के बागों में रहकर मतवारी होकर बोलती हैं। [1] वे आम के वृक्षों की डालियों पर बैठकर मधुर स्वर में ग...
धन धन वृन्दावन की गैयाँ
धन्य धन्य हैं श्री वृंदावन की गायें, जिन्हें स्वयं श्री कृष्ण नंगे पैरों से चराने ले जाते हैं। [1] वे यमुना के तट पर पानी पीने पीने जाती हैं और कदंब ...
धन धन वृन्दावन के स्वान प्यारे
श्री वृन्दावन के श्वान (कुत्ते) धन्य धन्य हैं, जो यमुना घाटों और गलियों में सोते हैं और चोरों से रक्षा करते हैं। [1] ये साधु-संतों के जूठे पत्तल चा...
धन धन वृन्दावन की मालिन प्यारी
श्री वृंदावन धाम की प्यारी मालिन धन्य-धन्य है! वह ठाकुरजी के द्वार पर बैठकर प्रेमपूर्वक उनके लिए सुंदर-सुंदर फूलों की मालाएँ पिरोती हैं। [1] वह पुष्प...
धन धन वृन्दावन में वसैं कुम्हार
वृंदावन में रहने वाले कुम्हार धन्य हैं—वे चाक चलाकर ब्रज रज के सुंदर-सुंदर बर्तन बनाते हैं और करूवा एवं कुलरा (कुल्हड़) गढ़ते हैं। [1] वे साधु-संतों ...
धन धन वृन्दाविपिन भई पनिहारी
धन्य धन्य हैं वृन्दावन की पनिहारियाँ। प्रातःकाल यमुना में स्नान करने सभी गोप-कन्याएँ आती हैं। [1] वे आपस में बातें करती हूँ, सिर पर घड़ा रखकर मतवाली ...
धन धन वृन्दावन की लता प्यारी
वृन्दावन की प्यारी-प्यारी लताएँ धन्य-धन्य हैं जो कदम के वृक्षों से लिपटी हुई मधुरता से खिल रही हैं, और जिनके ऊपर काली कोयलें मधुर स्वर में गान कर रही...
धन धन वृन्दावन की चैंटी
धन्य है वृंदावन की चींटी जो महाप्रसाद का कण लेकर बिल में बैठ कर खाती है। [1] जिसके माध्यम से यह जन्म और मृत्यु की व्याधि को नष्ट कर, भीतर से ज्ञान एव...
धन धन वृंदावन के बंदर
श्री वृंदावन धाम के बंदर धन्य धन्य हैं जो किसी की नहीं मानते, सभी के सामान लूट लेते हैं। [1] वे गलियों में कूदते डोलते रहते हैं चाहे महल हो या मंदिर,...
धन धन वृंदावन के सुआ
वृंदावन के तोते धन्य, धन्य हैं। वृंदावन के वृक्षों के कोटर में ही इनका जन्म बड़े भाग्य से होता है। [1] यह “राधा राधा” रटते हुए डोलते हैं, और जीवन पर्...
धन धन वृन्दाविपिन पपीहा प्यारे
वृन्दावन में रहने वाले पपीहे धन्य हैं। वे अन्य जल नहीं पीते, केवल स्वाति नक्षत्र की बूंद की ही प्रतीक्षा करते हैं। [1] जिनके रक्षक स्वयं श्रीहरि हैं,...
धन धन वृन्दावन गोपेश्वर बाबा
श्री वृन्दावन के गोपेश्वर महादेव धन्य, धन्य हैं। उन्होंने वंशीवट पर अपनी बैठक बनाई है और वे वृन्दावन के कोतवाल (रक्षक) होने का अधिकार रखते हैं। [1] ...
धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
श्री वृन्दावन में प्रवाहित होती श्री यमुना जी का जल परम धन्य है। जब यमुना जी की लहरें उठकर शरीर का स्पर्श करती हैं, तो वे संचित पापों के घने समूह (परत...