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मुख्यपृष्ठसंतश्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले]
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रसिक संत जीवनी

श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले]

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले] वाणी संग्रह

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जपौ मन राधा राधा नाम

अरे मन तेरा जीवन वृथा [बर्बाद] जा रहा है, बस तू अब एक ही काम कर: श्री राधा राधा नाम का नित्य ही जप कर। [1] जो जन राधा नाम का जप करते हैं उनके संग नित...

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मेरे गुरु मात पिता, लाड़ली किशोरी एक

मेरी गुरु, माता, पिता केवल एक श्री लाडिली किशोरी श्री राधिका हैं, केवल इन्हीं का बल मेरे हृदय में हर क्षण विद्यमान है। [1] मेरी यही अभिलाषा है कि सुख...

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मन श्री राधा-राधा कहि रे

हे मन! "श्री राधा राधा" नाम का रटन कर इसका निरंतर अपनी रसना से पान कर एवं दृढ़ता पूर्वक इस नाम की शरण ग्रहण कर। [1] यह जग एक झूठे सपने की तरह है और ह...

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प्रिया छवि बार बार कालिन्दी की धारधार

श्री प्रिया जी की रसमयी छवि को बार बार निहार, जहां कालिन्दी [यमुना] की लहरें हिलोरे ले रही हैं और जिनके के अंग संग चार दोनों तरफ़ चार चार सखियाँ खड़ी ...

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जीवन प्राण अब वन रहो

मेरा जीवन और प्राण श्री वृंदावन ही है—वह नवल-प्रिया का परम सुखधाम है, जिसकी अधिष्ठात्री स्वामिनी श्री राधा हैं और जो ललितादि सखियों को अत्यंत प्रिय एव...

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रसिक रासेश, रासेश्वरी, हृदयेश्वरी

हे रसिकों की स्वामिनी, रास की स्वामिनी, मेरे ह्रदय की स्वामिनी, हे राधे! अब तो मेरी ओर कृपा भरी दृष्टि डाल मुस्कुरा दीजिए। [1] मेरा जीवन बीता जा रहा ...

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नव निकुंज रसदायिनी, करुणामयी रसपुंज

नव-निकुंज रस का दान करने वाली, परम करुणामयी रस की धाम, श्री हित गोपाल को सुख देने वाली स्वामिनी श्री राधिका सेवाकुंज में विहार करती हैं।

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आशीष देतु तुम दोउन को

श्री हित गोपाल दास जी आशीष देते हुए कामना करते हैं कि श्री राधा-कृष्ण दिव्य लीला और नित्य रास करते रहें, और वे निरंतर उस विहार को निहारते रहें।

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प्यारी कृपा लाल उर जानी

प्यारी (श्री राधा) की कृपा को लालजी (श्री कृष्ण) ही ह्रदय से जानते हैं। इसीलिए वे सदैव श्री राधा के चरण कमलों में बिके से रहते हैं, सदैव उनकी अगवानी क...

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नवल प्रिया कृपालू ऐसी

नित्य किशोरी श्रीराधा अत्यंत कृपालु हैं। कोई कितना बड़ा अपराधी ही क्यों न हो, श्री राधा के चरण कमलों की शरण में आते ही समस्त बाधाएं सहजता से दूर हो जा...

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अब हम प्रिया कृपा धन पायो

अब मुझे श्री राधा की अमूल्य कृपा धाम प्राप्त हुआ है। श्री वृंदावन धाम में अब मैं, प्रेम में उन्मत्त सा होकर, घूमता हूँ। अब ऐसा क्या शेष पाना बचा है ? ...

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हमारो धन राधा-राधा नाम

मेरा एकमात्र धन श्री राधा नाम है। यह नाम ही मेरा जीवन-धन है, जिसके अतिरिक्त मेरा और कोई ठौर कहीं नहीं है। [1] जब मेरी रसना "राधा" नाम के रस का पान कर...

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राधे कौन भयो अपराध हमारो

हे श्री राधे! ऐसा कौन सा मुझसे अपराध बन गया कि मेरा वृंदावन वास छूट गया जो मेरे प्राणों से भी अधिक प्यारा है। [1] हे स्वामिनी! मेरे अवगुणों को अनदेखा...

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अब हम राधे चरण अली

अब मैं श्री राधा चरणों में पूर्ण रूप से आश्रित हो चुकी हूँ। वे मुझे जहां भी ले जायेंगीं, मैं वहीं चल दूँगी; अब मैं उनके द्वारा छली जा चुकी हूँ। [1] ए...

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मन तू राधा-राधा भज ले

अरे मन! तू “राधा राधा” नाम का भावपूर्ण भजन कर क्यूँकि इसका भजन निरंतर शुकदेव, शिव, नारद, सनकादिक एवं ब्रह्मा जी भी करते हैं। [1] ऐसा सुंदर अवसर तुझे ...

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हमारी लाड़ली अति ही भोरी

हमारी लाड़ली श्री राधा अति ही भोली हैं। वृषभानु नंदिनी अपने शरण में आये हुए के अवगुण नहीं देखती, वे परम कृपामयी हैं। [1] श्री राधा के चरण कमलों की शरण...

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अनन्य रसिक वृंदावन प्यारे

हे श्री वृंदावन धाम के प्यारे अनन्य रसिकों! आप ही मेरे प्राणों के सच्चे रक्षक हैं। मुझे ऐसी कृपा प्रसादी दीजिए कि मैं भी इस अद्भुत रसोपासना मार्ग का अ...

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अहो कृपामयी लाड़ली

हे परम करुणामयी लाड़ली, परम उदार प्यारी जू आपकी जय हो! वन में मंजुल रस बरसाने वाली, रसिकों की प्राणाधार, श्री राधा महारानी की जय हो।

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राधे तुमको मेरी लाज

हे श्री राधे, मेरी लाज आपके हाथ है। हे ब्रज की चूड़ामणि, हे करुणामयी, आपके बिना संसार में मेरा और कोई नहीं है। [1] आपका ही नाम मैं रात-दिन रटता हूँ ...

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हमारी प्रिया छबीली राधा

हमारी प्रिया श्री राधा अत्यंत छबीली और मनमोहिनी हैं, जिनकी छवि का स्मरण करने और दर्शन करने मात्र से सभी प्रकार की बाधाएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं। [1]...

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राधे अलबेली सरकार

श्री राधारानी अलबेली सरकार हैं — वे सम्पूर्ण वृन्दावन की अधिष्ठात्री महारानी हैं, रसिकों की जीवन-प्राण हैं, परम उदार एवं अत्यन्त सुकुमार हैं। [1] जि...

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राधे आन पड़ो तेरे द्वार

हे राधे! मैं तुम्हारे द्वार पर आन पड़ी हूँ। हे वृषभानु नंदिनी! तुम्हें छोड़कर अब मैं किसे पुकारूँ? [1] मैं संसार-सागर में डूब रही हूँ, कृपया अपनी कृप...

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श्यामा, सूझत नहीं कछु मोहे

हे श्यामाजू! मुझे कुछ भी सूझ नहीं रहा। तुम तो मेरे मन की समस्त बातों को जानती हो, फिर मैं तुम्हें क्या बताऊँ? [1] अनंत जन्मों में भटकने के बाद अब मैं...

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श्यामा अब तो रह्यौ न जाय

हे श्यामा (राधा), अब मैं आपके बिना एक पल भी नहीं रह सकता। आपकी याद मुझे हर क्षण सताती रहती है एवं आपकी नित्य स्थली सेवाकुंज मेरे हृदय को अत्यंत मनोहर...

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प्रिया तेरे चरण कमल की चेरी

हे प्रिया जू (श्री राधा)! मैं तुम्हारे चरण कमलों की दासी हूँ। मैं कब से कुञ्ज के द्वार पर आपकी प्रतीक्षा में खड़ी हुई हूँ, कृपा कर ब देर न करो। [1] ...

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धन-धन प्यारौ राधा नाम

प्यारौ श्री राधा नाम धन्य धन्य (परम पूजनीय) है। इस दिव्य श्री राधा नाम को जब जीव आठों याम हृदय से धारण कर लेता है तब सहज ही श्याम सुंदर का हृदय में प्...

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आज सखी सेवाकुंज कुंजन ते आवत जू

हे सखी! देखो, आज श्री राधा प्यारी अपने प्रियतम श्री कृष्ण के संग सेवाकुंज की सघन लताओं से प्रेम और सुख की अमृतवर्षा करती हुई आ रही हैं। [1] उनकी मधुर...

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अब तो भई राधा चरण गुलाम

श्री हित गोपाल दास जी कह रहे हैं की हे श्री राधा, अब तो मैं आपकी गुलाम हो गयी हूँ। आपके चरण कमलों पर मैं सदा के लिए बिक गयी हूँ, और बिना मूल्य के इनकी...

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जयति जयति वृषभानु दुलारी

वृषभानु दुलारी, श्री राधा महारानी की बार-बार जय हो। उस परम मनोहर श्री धाम वृन्दावन की जय हो, जहाँ लताओं, कुंजों और पुष्पों की सुगन्धित फुलवारी सदा शोभ...

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राधा नाम जपौ दिन रैना

निशदिन राधा‑नाम का ही भजन करना चाहिए। जब कोई मुझे यह नाम सुनाता है, तभी मेरे हृदय को वास्तविक शांति (चैन) मिलती है। [1] मैं प्रत्येक क्षण श्रीराधा का...

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श्यामा चरण कमल की आस

हे श्यामा जू! मुझे केवल आपके चरण-कमलों से ही आशा है। हे श्री वृन्दावन की स्वामिनी श्री राधे! कृपा करके मुझे अपने समीप ही स्थान दीजिए। जहाँ यमुना जी का...

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व्रजधाम में मिलेंगी, लाड़ली प्यारी तोहे

ब्रजधाम में श्री लाड़िली जी [प्यारी राधा] तुम्हें अवश्य ही मिल जाएँगी, बस वृंदावन की कुंजों में जाकर थोड़ा प्रेम से लोट लगा लो। [1] यहाँ के तोते और ...

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राधा नाम परम सुखदायी

श्री राधा नाम परम सुख दायी है, जो भी इस नाम का सुमिरन करता है, तत्काल ही सुंदर कृष्ण कन्हैया लाल उस जीव के हृदय में आ जाते हैं। [1] इस नाम के प्रभाव ...

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कृपा करो अब नवल नवेली

हे नवल-नवेली श्रीराधा! अब मुझ पर कृपा कीजिए, सेवाकुंज और निकुंज के भवन की मैं लता, फूल एवं बेली बन जाऊं। [1] मैं सदा आपके रस में ही निमग्न रहूँ, कृपा...

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वृन्दावन छाँड़ि कहूँ सुख नाहीं

वृंदावन छोड़ कर कहीं भी आनंद नहीं है। मनोहर यमुना, सुंदरयुगल सरकार श्री प्रियतम-प्यारी (राधा-कृष्ण), एवं कदंब की छाया आदि अति मन मोहक है। [1] वंशीवट ...

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किशोरी मोहे सोहनी देन सिखावो

हे श्री राधा, मुझे सोहनी सेवा करना सीखा दो। हे लाड़िली, मंद-मंद मुस्कुराकर नव कृपा की कोर बरसाइये। [1] हे किशोरी, आपके अंगों से प्रकाश के कोटि-कोटि कि...