SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeSaintsshri ramasakhi maharaja
All Saints

Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

shri ramasakhi maharaja Collected Verses

general

साधन एक अनूप है, सो मैं कहत सुनाय

वृन्दावन-रस की प्राप्ति का एक ही अनुपम और सुनिश्चित साधन है—“राधा राधा” नाम का श्रद्धापूर्वक भजन। इसके अतिरिक्त अन्य कोई उपाय इतना सरल नहीं है।

general

राधा पद पंकज कृपा

श्री राधा के चरणों की कृपा से समस्त हृदय की अभिलाषाएँ पूर्ण हो जाती हैं। श्री हरि एवं श्री राधिका एक ही तत्त्व हैं; केवल लीला के हेतु ही इनके दो नाम ह...

general

जो भागन सों पाइये वृंदावन विश्राम

यदि किसी जीव को सौभाग्यवश वृंदावन-वास प्राप्त हो जाए, तो उसे इस अहैतुकी कृपा को सार्थक करते हुए सांसारिक द्वंद्वों का पूर्णतया त्याग कर दिन-रात दृढ़ भ...

general

वृन्दावन बसि ध्याइये

वृन्दावन वास करते हुए नित्य युगल किशोर श्री राधा कृष्ण के स्वरूप का ध्यान कीजिये। मधुर स्वर से श्री राधावल्लभ के गुणों का गान कीजिये।

general

'रा' श्रीराधा राजही

“रा” में श्री राधा विराजती हैं और “म" में मनमोहन श्याम, अत: राम नाम संपूर्ण युगल नाम ही है जो समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाला है।

general

खेलत दोऊ कुंजन होरी

श्री राधा कृष्ण कुंज में होली खेल रहे हैं। श्री राधा मुट्ठी भर-भरकर गुलाल उड़ा रही हैं और रंग से भरा घड़ा बहा रही हैं। [1] सखियां ढोलक, मृदंग और सारं...

general

जाग्रत स्वप्न सुषुप्तिही

जागृत, स्वप्न एवं सुषुप्ति अवस्था में भी श्रीराधा कृष्ण के चरण कमलों की छटा ही मेरे मन में स्फुरित होती रहे। बैकुण्ठ अथवा नरक में भी उनके अतिरिक्त मेर...

dham

श्री वृंदावन धाम, परम मंगल मुदखानी

श्री वृंदावन परम मंगल एवं सुखप्रद धाम है जहां युगल किशोर ठाकुर एवं ठकुरानी सदा नित्य विहार पारायण हैं।

general

अहो नवलाल पिय विनय सुन लीजिये

हे नवलाल (श्री लाडली लाल)! कृपया मेरी विनती सुनिए और मुझे श्रीवृंदावन का वास एवं वाहन की कुंजों की सोहनी सेवा करने का अवसर दीजिए। [1] मैं मोक्ष या बै...

general

जयति जय जयति ललितादि वर भामिनी

जय हो ललितादिक सखियों में श्रेष्ठ, सखियों की चूड़ामणि श्री राधा महारानी की। हे स्वामिनी! मुझ पर अनुग्रह कर मेरी सुध लें और कृपापूर्वक अपने चरणकमलों को...

general

अनुछिन लालहु रहत हैं सदा प्रिया आधीन

लालजी (श्रीकृष्ण) हर क्षण अपनी प्रिया (श्रीराधा) के अधीन रहते हैं। उसी भाव-रस में समस्त सहचरियाँ उसी प्रकार मग्न रहती हैं, जैसे मछलियाँ जल में तन्मय ह...

general

राम इन्है सब कहत हैं ताको अर्थ रसाल

सब लोग जिन्हें “राम” कहते हैं, उसका वास्तविक अर्थ रसिकों की दृष्टि में अत्यन्त मधुर रस से भरा हुआ है। “रा” में श्री राधिका हैं और “म” में मनमोहन लाल (...

general

प्यारे को नचवत प्रिया कबहुँ लकुट लै त्रासि

प्रिया जी (श्री राधा) अपने प्रियतम श्री कृष्ण को नाचना सिखा रही हैं, और कभी-कभी वे अपने हाथ में लकुटी (छड़ी) लेकर उन्हें तनिक डराती भी हैं। जैसे-जैसे ...

shloka

आरति करत नवल सुकुमारी

सखियाँ युगल की आरती कर रही हैं। युगल को पूर्ण श्रृंगार धारण कर जब वे दर्पण में उनका मुख उन्हें दिखाती हैं, तब प्रियतम और प्यारी परस्पर मंद-मंद मुस्कुर...

general

देखोरी वृन्दावन शोभा

हे सखी! श्री वृन्दावन की इस अनुपम शोभा को देखो, जो समस्त सौंदर्य का सार है। यहाँ की छबि को देखकर साक्षात् युगल-चन्द्र (श्री राधा-कृष्ण) भी चकित रह जात...