Verses & Passages
30 itemsचरचा करी कैसे जाय
इस रस की चर्चा यदि करी जाए तो किस प्रकार करी जाए? इस रस का तत्व इतना गोपनीय है कि श्रोतीय एवं रस निष्ठ सभी महानुभाव असमर्थ हैं, किसी न किसी कारण से। [...
बृज ही मे मोरन के पच्छन कौ
इस ब्रज भूमि की ही महिमा है कि श्रीकृष्ण ने मोर के पंखों का मुकुट धारण किया है। केवल ब्रज ही में वह केली रस को करने के लिए हर्षोल्लास से परिपूर्ण रहत...
इतनी है सब ठौर हमारी
हमारी ठौर [निवास स्थल] इतनी ही है: वृंदावन, यमुना, गोवर्धन, राधाकुंड इत्यादि जो हृदय को सुख देने वाली है। [1] नंदगाँव और बरसाना जहां श्री श्याम सुं...
जात के हैं हम तो व्रजबासी
हमारी असली पहचान यही है कि हम ब्रजवासी हैं; अब अन्य जाति-पांति की कोई बाधा शेष नहीं रही। [1] हमारा देश केवल ग्वालों का समूह (व्रज) है, हमें और किसी द...
अब तो कृपा करो श्रीराधा
हे श्री राधारानी, अब तो कृपा कीजिये। दुनिया की सारी बाधाओं को दूर कर, श्री वृंदावन धाम में निवास दीजिये। [1] श्री वृन्दावन की प्रसिद्ध गाथाएँ तीनो लो...
सुनि व्यवहारिक नाम को ठाढे दूरि उदास
श्री नागरीदास जी वर्णन करते हैं कि जब वे वृन्दावन पहुँचे और लोग उन्हें किशनगढ़ के राजा के रूप में पहचानते थे, तब कोई विशेष स्वागत हेतु नहीं आया; पर जै...
कृष्ण कृपा आए दिन भले
श्री नागरीदास जी कह रहे हैं "आज तक मैं संसार के भ्रम मे बहुत भटकता रहा, परंतु अब श्री कृष्ण की अहेतु की कृपा हुई और अब मेरे भले दिन आ गए हैं क्यूँकि म...
कब बइकुण्ठ माहिं गायन चराय आए
श्री हरि ने बैकुण्ठ धाम में कब गाय चराई है, और वहाँ कौन सी गोपी उनके प्रेम के पाश बंधी है? [1] श्री हरि ने बैकुण्ठ धाम में ब्रज के समान कब केलि-लीला ...
पिय प्यारी वृंदाविपिन, नित विहार रस एक
श्री राधा-कृष्ण वृंदावन में सदा एकरस भाव में रहते हैं। वे अनवरत नित्य विहार में लीन रहते हैं और अनेक कल्प बीत जाने पर भी एक क्षण के लिए भी अलग नहीं हो...
मुरली की माला करी, नन्द लाला बस हेत
समुद्र मंथन के भारी श्रम के बाद ही समुद्र से श्री लक्ष्मी देवी निकली थी जिनकी छवि इस जग में प्रकाशित है। [1] समस्त जीव लक्ष्मीजी की कृपा (धन) को प्रा...
नागारिया नवनागरी
हे सखी, नित्य नवीन नागर एवं नागरी (श्री राधा कृष्ण) रास विलास खेल रहे हैं जिनकी छवि को निहार कर पल पल नागरीदास स्वयं को न्यौछवार कर रहे हैं।
अबैं कहा कहि हौं अहो राधा रूप रसाल
श्री राधा का रूप रस से भरपूर है जिसकी सुंदरता अद्वितीय है जिसके विषय में मैं क्या कहूँ? उनकी भौंहों की कुछ भंगिमा में ही, कामदेव को भी मोहित करने वाले...
तलहटी बरसाने की रहिये
बरसाने की तलहटी (नीचे के हिस्से) में निवास करें। गहवर वन की लताओं में बैठकर "राधा-राधा" गान करें। [1] सदा-सर्वदा, बरसाने पर्वत के ऊपर चढ़कर जाएं और श...
सहजै श्रीकृष्ण-कथा ठौर-ठौर
जहां ठौर-ठौर पर श्रीकृष्ण की कथाएँ सहजता से हो रही हैं, कीर्तन की मधुर ध्वनि हृदय में उल्लास लाती है। [1] श्यामा-श्याम के रूप, गुण, और लीलाओं के रंग ...
धेनु दुहत मोहन ठगे
गाय का दूध दुहते समय, जैसे ही श्यामसुंदर की दृष्टि श्रीराधा के दिव्य रूप पर पड़ती है, वे ठगे से रह जाते हैं जिससे गाय के थन से दूध सीधे बर्तन में न गि...
बहुत भूमि इत-उत फिरयौ
बहुत समय से मैं माया से मोहित होकर संसार में यहाँ-वहाँ भटक रहा हूँ। हाय! वह शुभ दिन कब आएगा जब मेरे पाँव वास्तव में सफल होंगे — जब वे वृंदावन की ओर बढ...
उचित नहीं कहनी इती, रहस केली रस काम
यद्यपि यह प्रिया-प्रियतम के अद्भुत केलि-रस का वर्णन करना उचित नहीं है क्योंकि यह एक गोपनीय रहस्य है; परंतु इसमें मेरा दोष ही कहाँ है? क्योंकि इसके प्र...
अब तो कृपा करो सब संत
श्री नागरीदास जी समस्त संतों से प्रार्थना कर रहे हैं की "हे समस्त संत जनों, इस शरीर और मन में अहम् बुद्धि के भ्रम से भटकते हुए अनंत जीवन बीत गए, अब तो...
रहै दोऊ बदन निहार निहार
श्री नागरीदास कहते हैं, "रमणीक श्री वृन्दावन मे श्री श्यामसुंदर अपने सखाओं के संग पुष्प चयन कर रहे हैं एवं उसी समय वहाँ अति सुकुमार श्री श्यामा जू आ ग...
अब तो करिये कृपा विहारी
हे बिहारी जी, अब तो आप हमपर कृपा कीजिए। जग जंजाल से हमें निकल कर आप हमें वहाँ बसाइए जहां आपकी कुंज (वृंदावन) है। [1] वृंदावन धाम में हम जब बसेंगे तब ...
अब तो कृपा करो व्रजवासी
हे ब्रज वासी जन, अब मुझपर कृपा कीजिए। आप सब तो जुगों जुगों से श्री श्यामसुंदर के सखा हो और उनकी लीला की उपासी हो। [1] मेरा अन्य किसी पवित्र स्थल से ...
ब्रह्मपुरी शिव जू की पुरी
ब्रह्मलोक, कैलाश और स्वर्गलोक — ये सब चाहे कितने भी महान क्यों न हों, परंतु मेरे हृदय में इनके लिए तनिक भी रुचि नहीं है। [1] देव, दानव और नागों के लो...
वृन्दाविपुन रसिक रजधानी
श्री वृन्दावन धाम (वृंदाविपिन) रसिकों की राजधानी है। [1] जहाँ के राजा भी श्री रसिकबिहारी जी तथा रानी भी श्री रसिक बिहारिणी जी (राधा रानी) हैं। [2] जहा...
अब तो कृपा करो श्री राधा
हे श्रीराधा, अब तो कृपा कर दीजिए। संसार के बंधन को छुड़ाकर मुझे वृंदावन का वास प्रदान कर दीजिए। [1] तीनों लोक वृंदावन धाम की ललित लीलाओं का गान कर रहे...
हमारी सब ही बात सुधारी
इस पद में नागरीदास कहते हैं कि अब तो श्री राधा कृष्ण ने कृपा करके हमारे जीवन की समस्त बिगड़ी बना दी। [1] उन्होंने वृंदावन में मुझे रखा जो रूप उजागर (र...
कीरति महारानी, वृषभानु आदि गोपी गोप
यदि श्री राधा ब्रज में प्रकट नहीं होती तो महारानी कीर्ति एवं महाराज वृषभानु जी समेत समस्त गोप और गोपियां इस कलयुग में भी कैसे धन्य कहलाए जाते। [1] यद...
हमारी सब ही बात सुधारी
इस पद में नागरीदास कहते हैं कि अब तो श्री राधा कृष्ण ने कृपा करके हमारे जीवन की समस्त बिगड़ी बना दी। [1] उन्होंने वृंदावन में मुझे रखा जो रूप उजागर (र...
हमारी बाँह गही वृन्दावन
वृंदावन ने मुझे मेरी बाँहों से पकड़ लिया है। मुझे अपनी शीतल छाया प्रदान कर, संसार के दुख-द्वंद्वों के तापों से सदा के लिए छुड़ा लिया है। [1] मेरे में...
कहा है परायो
सखी श्याम सुंदर से कहती है, यहाँ श्री ब्रज धाम में कुछ पराया कहाँ है? सब कुछ जो दिख रहा है, वह तो हमारी स्वामिनी श्री राधा जी का ही है। आपने बिना विचा...
कबै झुकत मो ओर कौं
ऐसा कब होगा जब श्री प्रिया लाल वृंदावन में यमुना तट पर लता पताओं के मध्य विहार करते हुए, एक दूसरे को गलबहियां दिए एवं एक दूसरे की ओर झुके हुए, अलमस्त ...