SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeGranthasश्री नागरीदास जी की वाणी
All Books
Sacred Scripture

श्री नागरीदास जी की वाणी

Verses & Passages

30 items
general

चरचा करी कैसे जाय

इस रस की चर्चा यदि करी जाए तो किस प्रकार करी जाए? इस रस का तत्व इतना गोपनीय है कि श्रोतीय एवं रस निष्ठ सभी महानुभाव असमर्थ हैं, किसी न किसी कारण से। [...

general

बृज ही मे मोरन के पच्छन कौ

इस ब्रज भूमि की ही महिमा है कि श्रीकृष्ण ने मोर के पंखों का मुकुट धारण किया है। केवल ब्रज ही में वह केली रस को करने के लिए हर्षोल्लास से परिपूर्ण रहत...

general

इतनी है सब ठौर हमारी

हमारी ठौर [निवास स्थल] इतनी ही है: वृंदावन, यमुना, गोवर्धन, राधाकुंड इत्यादि जो हृदय को सुख देने वाली है। [1] नंदगाँव और बरसाना जहां श्री श्याम सुं...

general

जात के हैं हम तो व्रजबासी

हमारी असली पहचान यही है कि हम ब्रजवासी हैं; अब अन्य जाति-पांति की कोई बाधा शेष नहीं रही। [1] हमारा देश केवल ग्वालों का समूह (व्रज) है, हमें और किसी द...

general

अब तो कृपा करो श्रीराधा

हे श्री राधारानी, अब तो कृपा कीजिये। दुनिया की सारी बाधाओं को दूर कर, श्री वृंदावन धाम में निवास दीजिये। [1] श्री वृन्दावन की प्रसिद्ध गाथाएँ तीनो लो...

general

सुनि व्यवहारिक नाम को ठाढे दूरि उदास

श्री नागरीदास जी वर्णन करते हैं कि जब वे वृन्दावन पहुँचे और लोग उन्हें किशनगढ़ के राजा के रूप में पहचानते थे, तब कोई विशेष स्वागत हेतु नहीं आया; पर जै...

general

कृष्ण कृपा आए दिन भले

श्री नागरीदास जी कह रहे हैं "आज तक मैं संसार के भ्रम मे बहुत भटकता रहा, परंतु अब श्री कृष्ण की अहेतु की कृपा हुई और अब मेरे भले दिन आ गए हैं क्यूँकि म...

general

कब बइकुण्ठ माहिं गायन चराय आए

श्री हरि ने बैकुण्ठ धाम में कब गाय चराई है, और वहाँ कौन सी गोपी उनके प्रेम के पाश बंधी है? [1] श्री हरि ने बैकुण्ठ धाम में ब्रज के समान कब केलि-लीला ...

general

पिय प्यारी वृंदाविपिन, नित विहार रस एक

श्री राधा-कृष्ण वृंदावन में सदा एकरस भाव में रहते हैं। वे अनवरत नित्य विहार में लीन रहते हैं और अनेक कल्प बीत जाने पर भी एक क्षण के लिए भी अलग नहीं हो...

general

मुरली की माला करी, नन्द लाला बस हेत

समुद्र मंथन के भारी श्रम के बाद ही समुद्र से श्री लक्ष्मी देवी निकली थी जिनकी छवि इस जग में प्रकाशित है। [1] समस्त जीव लक्ष्मीजी की कृपा (धन) को प्रा...

general

नागारिया नवनागरी

हे सखी, नित्य नवीन नागर एवं नागरी (श्री राधा कृष्ण) रास विलास खेल रहे हैं जिनकी छवि को निहार कर पल पल नागरीदास स्वयं को न्यौछवार कर रहे हैं।

general

अबैं कहा कहि हौं अहो राधा रूप रसाल

श्री राधा का रूप रस से भरपूर है जिसकी सुंदरता अद्वितीय है जिसके विषय में मैं क्या कहूँ? उनकी भौंहों की कुछ भंगिमा में ही, कामदेव को भी मोहित करने वाले...

general

तलहटी बरसाने की रहिये

बरसाने की तलहटी (नीचे के हिस्से) में निवास करें। गहवर वन की लताओं में बैठकर "राधा-राधा" गान करें। [1] सदा-सर्वदा, बरसाने पर्वत के ऊपर चढ़कर जाएं और श...

general

सहजै श्रीकृष्ण-कथा ठौर-ठौर

जहां ठौर-ठौर पर श्रीकृष्ण की कथाएँ सहजता से हो रही हैं, कीर्तन की मधुर ध्वनि हृदय में उल्लास लाती है। [1] श्यामा-श्याम के रूप, गुण, और लीलाओं के रंग ...

general

धेनु दुहत मोहन ठगे

गाय का दूध दुहते समय, जैसे ही श्यामसुंदर की दृष्टि श्रीराधा के दिव्य रूप पर पड़ती है, वे ठगे से रह जाते हैं जिससे गाय के थन से दूध सीधे बर्तन में न गि...

general

बहुत भूमि इत-उत फिरयौ

बहुत समय से मैं माया से मोहित होकर संसार में यहाँ-वहाँ भटक रहा हूँ। हाय! वह शुभ दिन कब आएगा जब मेरे पाँव वास्तव में सफल होंगे — जब वे वृंदावन की ओर बढ...

general

उचित नहीं कहनी इती, रहस केली रस काम

यद्यपि यह प्रिया-प्रियतम के अद्भुत केलि-रस का वर्णन करना उचित नहीं है क्योंकि यह एक गोपनीय रहस्य है; परंतु इसमें मेरा दोष ही कहाँ है? क्योंकि इसके प्र...

general

अब तो कृपा करो सब संत

श्री नागरीदास जी समस्त संतों से प्रार्थना कर रहे हैं की "हे समस्त संत जनों, इस शरीर और मन में अहम् बुद्धि के भ्रम से भटकते हुए अनंत जीवन बीत गए, अब तो...

general

रहै दोऊ बदन निहार निहार

श्री नागरीदास कहते हैं, "रमणीक श्री वृन्दावन मे श्री श्यामसुंदर अपने सखाओं के संग पुष्प चयन कर रहे हैं एवं उसी समय वहाँ अति सुकुमार श्री श्यामा जू आ ग...

general

अब तो करिये कृपा विहारी

हे बिहारी जी, अब तो आप हमपर कृपा कीजिए। जग जंजाल से हमें निकल कर आप हमें वहाँ बसाइए जहां आपकी कुंज (वृंदावन) है। [1] वृंदावन धाम में हम जब बसेंगे तब ...

general

अब तो कृपा करो व्रजवासी

हे ब्रज वासी जन, अब मुझपर कृपा कीजिए। आप सब तो जुगों जुगों से श्री श्यामसुंदर के सखा हो और उनकी लीला की उपासी हो। [1] मेरा अन्य किसी पवित्र स्थल से ...

general

ब्रह्मपुरी शिव जू की पुरी

ब्रह्मलोक, कैलाश और स्वर्गलोक — ये सब चाहे कितने भी महान क्यों न हों, परंतु मेरे हृदय में इनके लिए तनिक भी रुचि नहीं है। [1] देव, दानव और नागों के लो...

general

वृन्दाविपुन रसिक रजधानी

श्री वृन्दावन धाम (वृंदाविपिन) रसिकों की राजधानी है। [1] जहाँ के राजा भी श्री रसिकबिहारी जी तथा रानी भी श्री रसिक बिहारिणी जी (राधा रानी) हैं। [2] जहा...

general

अब तो कृपा करो श्री राधा

हे श्रीराधा, अब तो कृपा कर दीजिए। संसार के बंधन को छुड़ाकर मुझे वृंदावन का वास प्रदान कर दीजिए। [1] तीनों लोक वृंदावन धाम की ललित लीलाओं का गान कर रहे...

general

हमारी सब ही बात सुधारी

इस पद में नागरीदास कहते हैं कि अब तो श्री राधा कृष्ण ने कृपा करके हमारे जीवन की समस्त बिगड़ी बना दी। [1] उन्होंने वृंदावन में मुझे रखा जो रूप उजागर (र...

general

कीरति महारानी, वृषभानु आदि गोपी गोप

यदि श्री राधा ब्रज में प्रकट नहीं होती तो महारानी कीर्ति एवं महाराज वृषभानु जी समेत समस्त गोप और गोपियां इस कलयुग में भी कैसे धन्य कहलाए जाते। [1] यद...

shloka

हमारी सब ही बात सुधारी

इस पद में नागरीदास कहते हैं कि अब तो श्री राधा कृष्ण ने कृपा करके हमारे जीवन की समस्त बिगड़ी बना दी। [1] उन्होंने वृंदावन में मुझे रखा जो रूप उजागर (र...

general

हमारी बाँह गही वृन्दावन

वृंदावन ने मुझे मेरी बाँहों से पकड़ लिया है। मुझे अपनी शीतल छाया प्रदान कर, संसार के दुख-द्वंद्वों के तापों से सदा के लिए छुड़ा लिया है। [1] मेरे में...

general

कहा है परायो

सखी श्याम सुंदर से कहती है, यहाँ श्री ब्रज धाम में कुछ पराया कहाँ है? सब कुछ जो दिख रहा है, वह तो हमारी स्वामिनी श्री राधा जी का ही है। आपने बिना विचा...

shloka

कबै झुकत मो ओर कौं

ऐसा कब होगा जब श्री प्रिया लाल वृंदावन में यमुना तट पर लता पताओं के मध्य विहार करते हुए, एक दूसरे को गलबहियां दिए एवं एक दूसरे की ओर झुके हुए, अलमस्त ...