ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
104 itemsतिहि समान बडभाग को
जो मन, वचन और कर्म से सदा युगल-किशोर को ही रिझाते और लाड़लड़ाते हैं, उनके समान भाग्यशाली कौन है? वही जन सिरमौर हैं।
बने दोउ रसिक बिहारी बिहारनी
(पद) बने दोउ रसिक बिहारी बिहारनी रूप भरे गुन भरे। अंग अंग सोहें रंग भीने अभरन रतन जरे॥ पहरें बसन सुबरनी छबि मनहरनी ढरनि ढरे। श्रीहरिप्रिया बैठे सिंहास...
यही है यही है भूलि भरमो न कोउ
साधकगण नित्य-वृंदावन को इस पृथ्वी पर स्थित वृंदावन से पृथक न समझें। इसी कारण श्री हरिव्यास देवाचार्य बार-बार कहते हैं—“यही है, यही है”; अर्थात यही वह ...
यह रस दुर्लभ हूँ ते दुर्लभ
यह रस दुर्लभ हूँ ते दुर्लभ, सुलभ नित्य रहत है ताहि। श्रीहरिप्रिया जान जन जिये में, हिये में अपनावत जब जाहि॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सिद्ध...
श्री हरिप्रिया नित हीय में लसौ
(पद) मनमोहै (री) सोहै अति सुन्दर बानिक मोहनलाल की। झुकनि छबीली रंग रँगीली पगिया गोर भाल की॥ [1] नवल नासिका नथ मोतीकी झलकनि रूप रसाल की। श्रीहरिप्रिया ...
जीवनि धन राधा वल्लभ लाल
॥पद॥ जीवनि धन राधा वल्लभ लाल। कृष्ण वल्लभा रसिकिनि राधा वारिज बदनी बाल॥ [1] जुगल किसोर किसोरी जोरी गोरी स्याम तमाल। बसहु निरन्तर हियें श्रीहरिप्रिया आ...
बिहरें बिपिन बिहारी बिहारनि
(पद) बिहरें बिपिन बिहारी बिहारनि। मानि मानि मन मोद परस्पर तनक न मानत हारनि॥ [1] अङ्ग अङ्ग रसरंग तरङ्गनि कोटि काम बलिहारनि। श्रीहरिप्रिया अटकि रहे दोऊ ...
करुनानिधि नागरि अहो
(पद) ऐसी करौ करुनानिधि नागरि होइ रहों कछु तिहारे चरन तर। यह कैं ऊ वह कै वा ओही इतने में कोई पाऊँ बर॥ मन बच क्रम निहचै उर मेरे और कछु अभिलाष न अतपर। ...
प्रान वारि बलिहारी लै
सहचरियाँ श्री प्रिया-प्रियतम के मुखचंद्र का दर्शन करके अत्यंत आनंदित और प्रफुल्लित हो उठती हैं। वे अपनी सारी सुध-बुध खोकर उनकी बलैया लेती हुई अपने प्र...
बिहारिनि जीवनि मेरी हो
(पद) बिहारिनि जीवनि मेरी हो। सदा प्रान प्रतिपालन हौं बलि जाऊं तेरी हो॥ [1] परमाधार प्रेयसी स्यामा सहज स्वरूपा एरी हो। श्रीहरिप्रिया आस अवलम्बनी तो पद ...
श्रीराधा पद कमल ते नूपुर कलरव होय
श्री राधा के चरण कमलों से जो नूपुरों की मधुर ध्वनि (कलरव) प्रकट होती है, वही वास्तव में निर्विकार और सर्वव्यापक 'शब्द ब्रह्म' है। जिसे शास्त्र 'ब्रह्म...
अलक-लड़ैती लाड़ली, अलक लड़ौ सुकुंवार
लाड़ करने योग्य या तो लड़ैती जू (राधा) हैं या इनके प्यारे लाड़िले सुकुमार हैं, या यह सुंदर निज महल या इन दोनों का नित्य विहार ही लाड़ करने योग्य है।
जो कछु सो तुव चरन बल, नहिं मेरो उपकार
हे सुखस्वरूपा स्वामिनी श्री राधा महारानी जू! जो भी सामर्थ्य, यश या प्रताप दिखाई देता है, वह सब आपके पावन युगल-चरणों की ही कृपा है; उसमें मेरा कोई योग...
बड़े भाग पाई जु हम, जीवन प्रान-अधारि
रसिक दम्पति की यह जोड़ी हमें बड़े भाग्य से प्राप्त हुई है। यह हमारे जीवन और प्राणों की आधार-स्वरूपा है। यह जोड़ी रसिक-शिरोमणि है और सदा सहज सुख प्रदान...
सदा सनातन एक रस, सदा बसत सब काल
हम श्री वृन्दावन की महिमा का क्या वर्णन करें, जहाँ के राजा मोहन लाल और रानी श्री राधा सी हैं। ये अनादि काल से यहाँ सब काल, अर्थात् सतयुग, त्रेता, द्वा...
रहौ मेरो नेह चरन-बनजात
श्रीलालजू कह रहे हैं - ॥ दोहा॥ हे कुँवरि किशोरीजू, आप सुनिये, मेरी एकमात्र यही अभिलाषा है कि आपके चरण-कमलों में मेरा स्वाभाविक स्नेह सदा बना रहे। ॥ प...
अंग अंग सोभा जु पर
श्री राधा-कृष्ण के अंग-प्रत्यंगों की अनुपम शोभा पर करोड़ों कामदेवों को अर्पित किया जा सकता है। ऐसी अद्वितीय युगल-जोड़ी न तो कभी सुनी गई और न ही कहीं द...
जय जय चतुरि चूड़ामनी
(पद) [राग केदारौ] जय जय चतुरि चूड़ामनी। चारु चंचल-लोचनी चितहरनि चन्द्राननी॥ [1] जयति सुख-सौन्दर्य-संपति, सुद्ध चम्पक तनी। स्वामिनी श्रीहरिप्रिया नि...
जय राधे जय सब सुख साधा
जय राधे जय सब सुख साधा जय जय कमल नैन बस करनी । जय स्यामा जय सब सुख धामा जय जय मन मोहन मन हरनी । । जय गोरी जय नित्य किसोरी जय जय भागनी भरी सुभामिनी । ज...
अहो बिहारिनि कहत बलि
(पद) जोई जोई करति तुम प्यारी सोई सोई मो मन मानें। अहो बिहारिनि सौंह तिहारी उर प्रतीति अति आनें॥ [1] जब तुम नेंक रुखोंई चितवति प्रनय-कोप-रस सानें। श्री...
भ्रमत रहत निसिदिन छिना
श्री कृष्ण कहते हैं कि हे राधे! मेरे नेत्र-रूपी भौंरे तुम्हारे कमल-रूपी चरणों के प्रेम-रस में ऐसे सराबोर रहते हैं कि ये भौंरे उन चरण-कमलों पर रात-दिन ...
जय श्रीराधिका रवनी
(पद) जय श्रीराधिका रवनी। प्रानप्रीतम की प्रिया जय कलस्वनी कवनी॥ [1] जय श्रीबिहारिनि लाड़िली जय रसिक जोरी बनी। स्वामिनी सुखसनी श्रीहरिप्रिया दुखदवनी॥ [...
लाल बस बाल कें बाल बस लाल
(पद) लाल बस बाल कें बाल बस लाल। [1] सुरत-सुख-सेज पर हेज-भरे बिलसहीं, हुलसि चितचाड़िले लाड़िले लाल॥ [2] कमल-माला कलित ललित उर पर बलित, दलित अङ्ग अङ्ग रति...
कृष्णरूप श्रीराधिका, राधे रूप श्रीस्याम
श्री राधिका कृष्ण-रूप हैं और श्री श्यामसुंदर श्री राधा-रूपा हैं। ये दोनों दर्शन-मात्र को तो दो हैं, परंतु तत्त्वतः ये दोनों सुख-धाम एक ही हैं।
जिनकी दया सुदृष्टि की वृष्टिहि करें निहाल
(पद) प्यारी जू प्रानन की प्रतिपाल। जिनकी दया सुदृष्टि वृष्टि करि पल में होत निहाल॥ [1] तन मन परम पुष्ट पन पावै लावै रंग रसाल। श्रीहरिप्रिया प्रेम रस ब...
सुखनिधि सुन्दरि सरसनी
हे सुख-समुद्र रूपा सुंदरी जू, हे स्वामिनी जू! मेरी बात सुनिए, आप ही रस-उद्दीपन करने वाली हैं। हे श्री राधा गोरी जू, हे प्रिया जू! आपकी सदा जय हो, आप म...
प्रिया मोहिं दीजै हो पद पर्म
(पद) प्रिया मोहिं दीजै हो पद पर्म। प्रनतन पाल कृपाल कृसोदरि है तिहरो यह धर्म॥ [1] तुम बिन अहो सुकुँवारि सिरोमनि को समुझै निज मर्म। श्रीहरिप्रिया स्वाम...
अहो बलि स्वामिनी सुखसार
(पद) अहो बलि स्वामिनी सुखसार। जो कछु सो सब पद प्रताप करि, मोहि देत अधिकार॥ [1] तुम कारन के कारन तुमहीं, करता के करतार। श्रीहरिप्रिया प्रान-जीवन-धन, तन...
यही चाह चित मो चहौ
(पद) यही चाह चाहौ चित मेरौ, और चाह तन तनक न हेरौ। मधुकर ह्वै पदपंकज केरौ, रैंन दिना करि रहौं बसेरौ॥ श्रीहरिप्रिया प्रेम उरझरौ, उरझयौ रहु न होहु सुरझेर...
भ्रमत रहत निसिदिन छिना
(पद) प्यारी लाड़िली पदारविन्द नैन मधुकर मेरे। भ्रमत रहत निसिदिना छकि छिनछिना अधिकेरे॥ [1] कोटि जतन करहु कोउ फिरत नाहि फेरे। श्रीहरिप्रिया सहज सुभाव ...
मोहन मोहिनी आधीन
(पद) मोहन मोहिनी आधीन। रहें अति आसक्त अनुदिन कहा गति जल मीन॥ [1] नित्य नवतन नेह नेही परस्पर रस-लीन। हित श्रीहरिप्रिया रसिकन हेत बिबि तन कीन॥ [2] - श...
पल बिछुरें न कल परें
सहज रंगीली साँवरी गोरी जोरी परम उदार है। ये दोनों इस प्रकार के रस में ढरे हुए हैं कि यदि ये एक पल के लिये भी बिछुर जाएँ तो इन्हें कल नहीं पड़ती है।
जय श्रीराधिका रसभरी
(पद) जय श्रीराधिका रसभरी। रसिक सुन्दर साँवरे की प्रान-जीवन-जरी॥ [1] गौर अंग अनंग अद्भुत सुरति-रंगनि-ररी। सहज संग अभंग जोरी सुभग-साँचे-ढरी॥ [2] परम प्...
करुणा सब दुख चूरणा
सर्व दुःखों का नाश करने वाली, श्रीकृष्ण के लिए परम सुखदायिनी, शरणागत-पालिका प्राणप्यारी, सुकुमारी श्री राधा किशोरी की सदा ही जय हो।
करि कें आस जू और की तकत न इत उत होय
(पद) श्रीराधे! तो पद पंकज की परछाँहीं रहत सदा मन मेरौ। करिकें आस और इत उतकी तकत न दाहिन डेरौ॥ [1] सकल लोक सुख-संपति कौ सुख नाहिं सुहावत नेरौ। श्रीहरिप...
जयति जय राधा रसिक मनि मुकुट मनि
(स्तोत्र) जयति जय राधा रसिक मनि मुकुट मनि हरनी त्रिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणा निधि प्रिये॥ [1] जयति गोरी नव किसोरी सकल सुख सीमा श्रिये। परा...
जुगलवर को यह सुरत बिहार
(दोहा) जो कोई अधिकारी इस “सुरत-सुख” का स्मरण करता है, उस पर श्री प्रिया-प्रियतम रीझ जाते हैं और उसे सुरत-सुख से उत्पन्न अति दुर्लभ उस काम-रस सुख को प्...
अरी मेरे नैननि को आहार
(पद) अरी मेरे नैननि को आहार। कल न परै पल एक बिना मोहिं अवलोकें सुखसार॥ [1] सकल मनोरथ सफल होत तब करत हियें संचार। श्री हरिप्रिया प्रान-जीवन-धन कौ यह ...
पराभक्ति रस वर्धिनी श्यामा सब सुख दैन
श्री श्यामा जू (श्री राधा) पराभक्ति दान करने वाली, रस को बढ़ाने वाली हैं तथा समस्त सुखों को प्रदान करने वाली हैं। रसिकों के लिए वे ही परम शिरोमणि हैं।...
सहज सनेही देहि द्वै
श्रीराधा-कृष्ण स्वभाव से ही परस्पर प्रेमी हैं और उनका यह दिव्य अनुराग नित्य एवं अखंड है। यद्यपि वे दो शरीरों में आभासित होते हैं, किंतु तात्विक रूप से...
कहि न परै सोभा या सुख की
दोहा - हे सखी ! मेरी यह प्रार्थना है कि ये लाल ललना उपरोक्त इसी अद्रभुत रस कि वर्षा करते रहें। और हम सब इनके मुखारविदु की रूप माधुरी को देख देख कर जिय...
पलकांतर अवलोक बिन
(पद) मेरें सरबस-धन स्वामिनी मोहिं और न कछू सुहावै री। पलकांतर अवलोके बिन मोहि कल्पांतरहि बिहावै री॥ [1] एक टेक यहि चित चढ़ी रहै बिन देखे अकुलावैं री। ...
प्रानन के आधार मेरे
(पद) प्रानन के आधार मेरे। अहो कुँवरी करुनामई स्वामिनि रहौ सदा मो नेरे॥ अन्तर आनि परत पल चितवत बितवत वर्ष घनेरे। श्रीहरिप्रिया यह टेव परी कोउ सूझ न साँ...
जै जै आनन्द कन्दनी, श्रीहरिप्रिया किसोरि
(पद) जै जै राधा रसिकिनी। रसिक बिहारी जोरी बनी॥ [1] जै जै स्यामा लाड़िली। मन मोहन मन चाड़िली॥ जै जै रूप उजागरी। नित्य नवीना नागरी॥ [2] जै जै आनन्द कन्दन...
जुगल किसोर किसोरी जोरी
श्री गौर वर्ण प्रिया जू (श्री राधा) एवं श्री श्याम वर्ण लाल जू (श्री कृष्ण) की जोड़ी सदैव मेरे हृदय में केलि-रूपी आनंद की वर्षा करती हुई विराजमान रहे।
मन मोहन मन मोहनी
सदैव आनंदमयी दिव्य युगल—श्री राधा का सुन्दर मुख और श्रीकृष्ण का नीला रंग—वृन्दावन के रसिक संतों के मन को मोह लेता है। यही आकर्षण ही रसिक संतों का खजा...
मोहि कृपा करि दीजिये
(दोहा) श्रीलालजू श्रीराधारानी से कहते हैं, मेरी एकमात्र आपके अंग-संग सेवा करने की ही अभिलाषा है, अतः आप कृपा करके यह सेवा मुझे प्रदान करें। सेवा-सम्ब...
हौं बलि बलि आनन्दनिधे अब
(पद) हौं बलि बलि आनन्दनिधे अब। तुव पद प्रापति की रहै लालस बाल कहौ यह कौंन विधे अब॥ जानि परी जिय में न कछू यह बानि सदा सुखदानि रिधे अब। श्रीहरिप्रिया अ...
जो तुम पुरवहौ मन काम
(पद) जो तुम पुरवहौ मन काम। तो मैं माँगत यही निसि दिन छिन न बिसरों नाम॥ रहौं टहलनी महल में व्है निरखि छबि अभिराम। श्रीहरिप्रिया हित बात सुनी सुनी धरौं ...
एक मैं कृपा सुदृष्टि चहौं
(पद) एक मैं कृपा सुदृष्टि चहौं। सोंह तिहारी मोही अहो जीय जो मैं राखि कहौं। जब तुम चितवत मो तन के तन तब सब सुखहिं लहौं। श्रीहरिप्रिया नाउँ तेरे बिन और ...
मोरी अँखियाँ लगी रहौ नित
केवल एक ही अभिलाषा है कि मेरी अँखियाँ नित्य युगल सरकार श्री राधा कृष्ण को निहारती रहें एवं प्रिया जी के महल की टहल करती हुई अपना धन्य भाग्य मनावें।
सुखकारी सबके सदा
नित्य-नवीन प्रेम से परिपूर्ण श्रीलाड़िलीलाल (श्रीराधा-कृष्ण) समस्त सखी-सहचरियों के प्राणों के आधार और जीवन-धन हैं। वे परम सुख प्रदान करने वाले हैं और ...
मनमोहन बसकारिनी नखसिख रूप रसाल
उन स्वामिनी जी, रसकिनी श्रीराधा के गुणों का नित्य गान कीजिए, जो श्री कृष्ण को वश करने वाली हैं और जिन का नख से शिख पर्यन्त रूप रस से भरा हुआ है।
अलबेले आँगन खरे
अलबेले रसिक दम्पति श्री राधा-कृष्ण परस्पर गलबहियाँ दिए हुए निकुंज महल के आँगन में खड़े हैं और सहचरी दर्पण दिखला रही है।
जयति नवनित्य नागरि निपुन राधिके
॥ पद॥01॥ जयति नवनित्य नागरि निपुन राधिके रसिक-सिरमौरि मनमोहनी जू। चारु छबि चंचला चित्त आकर्षनी वर्षनी प्रेम-घन मोहनी जू॥ सहज सिद्धा प्रसिद्धा प्रक...
जै जै वृन्दावन रजधानी
(राग आसावरी) जै जै वृन्दावन रजधानी, जहाँ विराजत मोहन राजा श्री राधा सी महारानी। सदा सनातन एक रस जोरी महिमा निगम न जानी। श्री हरिप्रिया हितु निज दासी र...
मोहि कृपा करि दीजिये
श्री लाल जू श्री राधारानी से कहते हैं— “मेरी एकमात्र अभिलाषा आपके अंग-संग की सेवा करने की ही है; अतः आप मुझे यह सेवा प्रदान करें। हे बिहारिनि लाड़िली!...
नीरजनैंनी नागरी कलबैंनी सुकुँवारि
(पद) जय जय प्रिया प्राण-पिय प्यारी। जय जय रूप उजारी राधे, अति सुन्दर सुकुंवारी॥ [1] जय जय नीरजनैंनी नागरि, कलबैंनी कमला री। जय जय श्रीहरिप्रिया हिये, ...
राधाकृष्ण स्वरूपां वै कृष्ण राधास्वरूपिणम्
श्री राधा कृष्ण स्वरूपा हैं और कृष्ण श्रीराधा रूप हैं, मैं निकुञ्जस्थ गुरुरूपा श्रीराधा की शरण में जाता हूँ।
जो करुनामय कुंवर अहु
(पद) सहजहि रहौ एह सुभाव। प्रिया पद नख चन्द्रकी छबि टरि न उर ते जाव॥ [1] जो पै करुना करति हो तो और चित्त न चाव। श्रीहरिप्रिया की उरझनी सों रहौ उर उर...
एक स्वरूप सदा द्वै नाम
श्री युगल किशोर स्वरूप से एक हैं, लेकिन दो नामों को धारण करते हैं। श्री राधारानी स्वयं श्रीकृष्ण को आनंद प्रदान करने वाली हैं, जो कि स्वयं आनंद हैं। औ...
कल न पर छिन बिन लखे, तो मुख चंद्र प्रभाव
श्रीलाल जू श्री प्रिया जू से विनय पूर्वक कहते हैं :- (दोहा) हे प्रियाजू! मेरा स्वभाव अब कुछ ऐसा सहज हो गया है कि आपके मुख-चन्द्र की दिव्य आभा का एक ...
प्रिया बदन सुखमा सदन
श्री प्रिया जू का मुख कमल सुख का वह सदन है जो प्रेम से परिपूर्ण है, जिसमें प्रियतम के प्राण बसे हुए हैं। वही उनके प्राणों का आधार है।
मनहु द्रु मन तें सुमन झरि
(पद) देखि री दुहुनि की सहज बतरावनी। [1] मनहु दिबि द्रु मन तें सुमन झरि-झरि परत, हरत मन परस्पर बरन उचरावनी॥ [2] लागत कैसी रुचिर रदन छबि बदन में, मदन मन...
प्रिया मोहिं दीजै हो पद पर्म
(दोहा) श्रीलालजी अत्यंत प्रसन्न होकर श्रीस्वामिनीजू के चरणारविन्दों को थामकर कहते हैं, "हे सुख की निधि श्रीस्वामिनीजू! आपके अतिरिक्त इस मर्म को कौन सम...
सुनीहूँ न देखी ऐसी जोरि जुगल किसोर किसोरि
(पद) सुनीहूँ न देखी ऐसी जोरि जुगल किसोर किसोरि। अंग अंग सोभा पर सजनी वारौं काम करोरि॥ [1] नहिं उपमा पटतर दीबे कों देखि थकी मति मोरि। श्रीहरिप्रिया अद...
कृपा कटाक्षि चितै 'श्रीहरिप्रिया'
श्रीहरि एवं प्रियाजू के श्रीचरणों की रेणु की उपलब्धि उनकी कृपा कटाक्ष चितवनि से ही सम्भव हो सकती है।
अंग अंग रस वृष्टि करि
(पद) सनमुख रुख लियें ललन चलत नव बाल कें। [1] एक आज्ञाहिं अनुकूल आनन्द उर, रहत ज्यों चहत त्यों प्रान प्रतिपाल कें॥ [2] दृष्टि-रस-वृष्टि करि पुष्ट अंग अ...
नैनन कौ लाठौ लीजिये
(पद) नैनन कौ लाठौ लीजिये। गोरी श्याम सलौनी जोरी सुरस माधुरी पीजिये॥ [1] छिन-छिन प्रति प्रमुदित चित चावहि निज भावहि में भीजिये। श्रीहरिप्रिया निरखि तन ...
रँगीली लाड़िली रँगभीने मोहनलाल
(दोहा) तदन्तर, परस्पर अनुराग में सराबोर दोनों—अर्थात् मूर्तिमान प्रेम स्वरूपा श्रीप्रियाजू और साक्षात् श्रृंगार-रस स्वरूप श्रीलालजू—एक-दूसरे के गले मे...
जीवनि धन राधा वल्लभ लाल
(पद) जीवनि धन राधा वल्लभ लाल। कृष्ण वल्लभा रसिकिनि राधा, वारिज बदनी बाल॥ जुगल किसोर किसोरी जोरी गोरी स्याम तमाल। बसहु निरन्तर हियें श्रीहरिप्रिया आनन...
जय राधे जय राधे राधे
“श्यामा गोरी नित्य किशोरी, प्रीतम जोरि श्री राधे। रसिक रसिलो छैल छबीलो, गुण गर्विलो श्री कृष्णा”॥2॥ श्री राधा: नित्य किशोरी हैं और अंग का वर्ण सुनहरा ...
कहि न परै सोभा या सुख की
हे सखी ! मेरी यह प्रार्थना है कि ये लाल ललना उपरोक्त इसी अद्रभुत रस कि वर्षा करते रहें। और हम सब इनके मुखारबिंद की रूप माधुरी को देख देख कर जिया करें।...
प्रिया मोहिं दीजै हो पद पर्म
(दोहा) श्री लालजी अत्यंत प्रसन्न होकर श्री स्वामिनी जू के चरणारविंदों को पकड़कर कहते हैं "हे सुख की निधान श्री स्वामिनी जू ! आपके बिना इस मर्म को कौन ...
कृपा कटाक्षि चितै 'श्रीहरिप्रिया'
श्रीहरि एवं प्रियाजू के श्रीचरणों की रेणु की उपलब्धि उनकी कृपा कटाक्ष चितवनि से ही सम्भव हो सकती है।
भर्म तजौ हरिप्रिया भजौ
(पद) यही है यही है भूलि भरमो न कोउ , भूलि भरमें तें भव भटक मरिहौं। लाडिली लाल के नित्य सुखसार बिन कौन बिधि वारतें पार परिहौं॥ एक अनन्य की टेक उर में ध...
एकहि तन मन एक ही
(दोहा) रसिक-दम्पति की यह अद्भुत युगल-छवि स्वाभाविक सुख से रञ्जित है और किसी अनिर्वचनीय साँचे में इस प्रकार उत्तम रीति से ढली हुई है जिससे इन दोनों के...
मोहि कृपा करि दीजिये अंग संग की सेवा।
श्री लाल जू श्री राधारानी से कहते हैं, मेरी एक मात्र आपके अंग संग सेवा करने की ही अभिलाषा है, अत: आप मुझे यह सेवा प्रदान करें। हे बिहारिनि लाडिली मेरे...
जै जै वृन्दावन रजधानी
सभी रसिक संतों की राजधानी श्री वृन्दावन धाम की जय हो, जय हो, जहां श्री राधा सर्वोच्च रानी ('महारानी') और श्री कृष्ण राजा (’महाराज') हैं। यह दिव्य युगल...
बने दोउ रसिक बिहारी बिहारनी
(दोहा) श्रीहरि एवं प्रिया, मानों सुन्दरता रूपी साँचे में अच्छी प्रकार से ढले हुए सिंहासन पर सुशोभित हैं । ये दोनों रसिक बिहारी बिहारनी रूप तथा समस्त ग...
Manmohan Baskarini Nakhasikh Rup Rasal
Manmohan Baskarini, Nakhasikh Roop Rasaal.So Swamini Nit Gaaiye, Rasikani Radha Baal.- Shri Harivyas Devacharya, Mahavani, Utsah Sukh (23)Sing ceasele...
बिलसौ दोउ लाल मेरे हिय
॥दोहा॥ श्रीस्वामिनी जी का दिव्य मंगल विग्रह एक प्रकार की स्वर्ण कमलों की माला होकर श्रीलालजू के अंग-अंग में सुशोभित है। श्रीहरिप्रियाजू प्रार्थना करती...
रसिकन के हित कारने
रसिक दम्पति की यह गौर-साँवरी जोड़ी रसिकों के हित के लिए अहर्निश नित्य विहार में लवलीन रहती है इसलिए इस जोड़ी जैसी उदारता और जोड़ियों में नहीं है।
जय वृन्दावन धाम सब जनमन पूरन काम
उस पावन श्री वृन्दावन धाम की सदा जय हो, जो सब जनों की अभिलाषाओं को पूर्ण करने वाला है। वहीं श्री श्यामा-श्याम सुंदर अपनी सुघर सहेलियों के साथ मधुर विह...
जुगल किसोर किसोरी जोरी
श्री गौर वर्ण प्रिया जू (श्री राधा) एवं श्री श्याम वर्ण लाल जू (श्री कृष्ण) की जोड़ी सदैव मेरे हृदय में केलि-रूपी आनंद की वर्षा करती हुई विराजमान रहे।
अलबेले आँगन खरे, अंस अंस भुज धारि
अलबेले रसिक दम्पति श्री राधा कृष्ण परस्पर गलबहियाँ दिए हुए निकुंज महल के आँगन में खड़े हैं और सहचरी दर्पण दिखला रही हैं।
मोरी अँखियाँ लगी रहौ नित
केवल एक ही अभिलाषा है कि मेरी अँखियाँ नित्य युगल सरकार श्री राधा कृष्ण को निहारती रहें एवं प्रिया जी के महल की टहल करती हुई अपना धन्य भाग्य मनावें।
जय राधे जय सब सुख साधा
नित्य किशोरी वाम, सुख धाम स्वरूप उन राधारानी की सदा जय हो जो अपनी प्रेम माधुरी से अपने प्यारे कमल नैन को अपने वश में करे रखती हैं। सब सुखो की सिद्धि स...
जयति नवनित्य नागरि निपुन राधिके
।। दोहा । । श्रीलाल जू के चित्त को आकर्षण करने वाली उन विधुत स्वरूपा श्रीस्वामिनी जू की जय हो, जो रसघन स्वरूप श्रीलाल जू को पिघला कर (द्रवीभूत) कर प्र...
मन मोहन मन मोहनी
सदैव आनंदमयी दिव्य युगल—श्री राधा का सुन्दर मुख और श्रीकृष्ण का नीला रंग—वृन्दावन के रसिक संतों के मन को मोह लेता है। यही आकर्षण ही रसिक संतों का खजान...
रँगीली लाड़िली रँगभीने मोहनलाल
(दोहा) फिर परस्पर के अनुराग में भीगे हुए दोनों लाल अर्थात् मूतिमान प्रेम श्रीप्रियाजू और साक्षात् श्रृंगार रस स्वरूप श्रीलालजू परस्पर गल बहियाँ दिये ह...
Nirjanani Nagari Kalbaini Sukumari
(Doha)Nirjanani Nagari, Kalbaini Sukumari.Shrihari Pyari Nit Hiye, Basau Sada Sukhkari.(Pad)Jai Jai Priya Pran-Piya Pyari.Jai Jai Roop Ujari Radhe, At...
Kari Ken Aas Ju Aur Ki
(Doha)Kari Ken Aas Ju Aur Ki, Takata Na It Ut Hoy.Tuv Pad Parchhaahi Bina, Nahin Bhaavat Man Koy.(Pad)Shri Radhe! Toh Pad Pankaj Ki Parchhaahi Rihat S...
Pyari Ladili Padaravind Nain
(Doha)Bhramat Rahat Nisidin Chhina, Chhake Adhik Ras Neh.Pyari Tuv Pad Kanj Par, Mo Drig Madhukar Eah.(Pad)Pyari Ladilee Padaravind Nain Madhukar Mere...
Pal Bichhurein Na Kal Parein
Pal Bichhurein Na Kal Parein, Dhare Rahain Rasadhaari.Sahaj Sanwaree Gori Yah, Jori Param Udaari.- Shri Harivyas Devacharya, Mahavani, Utsah Sukh (37)...
Karuna Sab Dukh Churana
Karuna Sab Dukh Churana, Mam Sarana Sukunvari.Shri Radhe Pranadhike, Jayati Krishna Sukhakari.- Shri Harivyas Devacharya, Mahavani, Utsah Sukh (117)Al...
Sunihun Na Dekhi Aisi Jori Jugal Kisor Kisori
(Doha)Ang Ang Sobha Ju Par, Varaun Kaam Karori. Suni Na Hun Dekhi Kahun, Aisi Adbhut Jori. (Pad)Sunihun Na Dekhi Aisi Jori Jugal Kisor Kisori.&nb...
Rasikan Ke Hit Karane
Rasikan Ke Hit Karane, Bisad Bihar-Nihari.Jori Gori Sanwari, Anhoni Param Udari.- Shri Harivyas Devacharya, Mahavani, Sahaj Sukh (55)This fair-and-dar...
Sukhkari Sabke Sada
Sukhkari Sabke Sada, Pranan Ke Pratipal. Sarbas Jivan Sakhin Ki, Naval Ladili Lal.- Shri Harivyas Devacharya, Mahavani, Utsah Sukh (146)The ever-new d...
जय वृन्दावन नित्य जै
(पद) जय वृन्दावन नित्य बिहार। श्रीराधा पिय परम उदार। जय सहचरी आदि रंगदेव्य। स्यामास्यामहि जिनकें सेव्य॥ [1] जय नव नित्य कुंज सुख सार। जय जमुना कंकन आ...
Jay Shri Radhika Ras Bhari
(Doha)Puran Prem Prakas Ken, Pari Payodhini Puri.Jay Shri Radha Ras Bhari, Shyam Sajeevan Muri.(Pad)Jay Shri Radhika Ras Bhari.Rasik Sundar Sanware Ki...
Ari Mere Nainani Ko Aahar
(Doha)Safal Manorath Hot Sab, Avat Hiye Jitek.Mere Nainani Ko Ari, Yah Aahar Hain Ek.(Pad)Ari Mere Nainani Ko Aahar.Kal Na Parai Pal Ek Bina Mohin Avl...
Parabhakti Ras Vardhini Shyama Sab Sukh Den
Parabhakti Ras Vardhini, Shyama Sab Sukh Den.Rasik Mukut Mani Radhika, Jai Nav Neeraj Nain.- Shri Harivyas Devacharya, Mahavani, Sewa Sukh (51)Śrī Śyā...
Priya Badan Sukhma Sadan
Priya Badan Sukhma Sadan, Rahyo Prem Paripoori.Ja Madhi Preetam Praan Ki, Sarbas Jeevani Moori.- Shri Harivyas Devacharya, Mahavani, Sewa Sukh (05)The...