जगद्गुरु श्री कृपालु महाराज
जीवन चरित
श्री जगद्गुरु श्री कृपालु महाराज वाणी संग्रह
जहां राधा तहाँ कृष्ण, गोविंद राधे
जहां राधा हैं वहीं कृष्ण हैं, जहां राधा कृष्ण दोनो हैं वहीं रसिक हैं।
हम चाकर प्रीतम प्यारी के
हम केवल गौर - श्याम सरकार के ही दास हैं। वृन्दावन विहारी श्यामसुन्दर एवं बरसाने वाली किशोरी जी ही हमारी सर्वस्व हैं। [1] हम महाविष्णु एवं उनकी अर्धांग...
जय श्री वृषभानु दुलार की
जय श्री वृषभानु दुलार की, जय अलबेली सरकार की। वृषभानु नंदिनी श्री राधा रानी की जय। अलबेली सरकार की जय। जय स्वामिनी नंदकुमार की, जय अधाधुंद दरबार की।...
जय जय पिय प्यारी सुकुमारी
जय जय पिय प्यारी सुकुमारी, भोरी भारी नथवारी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
राधा मेरी गती मति, राधा पद मेरी रति
राधा मेरी गती मति, राधा पद मेरी रति - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी श्री राधा मेरे जीवन का अंतिम लक्ष्य है, जिन्होंने मेरे मन को पूर्...
"ब्रज रस ब्रजा-बईठीना बरसावता, होता सांझा ते भोर"
"ब्रज रस ब्रजा-बईठीना बरसावता, होता सांझा ते भोर" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज राधा कृष्ण ने ब्रज की गलियों में शाम से सुबह तक दिव्य प्रेम के म...
राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे
जहां भी कोई जाता है, कृष्ण हमेशा उसी का अनुसरण करते हैं, जो "राधा" नाम का उच्चारण करता है।
श्रुति सारांश एक, प्रेम नाम राधे
समस्त श्रुतियों का सारांश है कि श्री राधा रानी से प्रेम करो।
पूरी आयु में भी मैं गोविन्द राधे, राधा महिमा बता पाऊँ न बता दे
मैं अपनी सम्पूर्ण आयु में भी श्री राधारानी की महिमा को नहीं बता सकता।
हमारी निधि, श्री वृषभानु दुलार
हमारी निधि तो एकमात्र वृषभानुनन्दिनी श्री राधिका जी हैं। [1] जिनकी भृकुटि – विलास को ब्रह्म श्रीकृष्ण भी नित्य देखते रहते हैं ( जिनकी भौहों के इशारे ...
डरत कृपालु जासु डर गिरिधर
डरत कृपालु जासु डर गिरिधर, सो हमार रखवार। हमारी अलबेली सरकार.” - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज साक्षात डर (यमराज) भी सर्वशक्तिमान श्री कृष्ण से डर...
वृन्दावन, रसिकन रजधानी
वृन्दावन, रसिकन रजधानी। [1] जा रजधानी की ठकुरानी, महरानी राधा-रानी। [2] जा रजधानी पनिहारिनि बनि, चारिहुँ मुक्ति भरति पानी। [3] जा रजधानी रज अज याचत,...
दसहुँ दिशा में गोविन्द राधे
मैं समस्त दिशाओं में केवल श्री राधा रानी को ही देखता हूं।
हमारी सुधि लीजो भानुदुलार
हे निकुंजविहारिणी राधे ! हमारी भी खबर लीजिए। हमारे पास किसी प्रकार का कर्म, योग आदि साधन - बल नहीं है। मैं अत्यन्त हठी, दुष्ट एवं बातें बनाने वाला ही ...
मान लो पतित आपु कहँ कह बामा
यदि तुम स्वयं को पतित स्वीकार कर श्री श्यामा ज़ू की शरण में जाओ तो तुम्हारा काम बन जाए। बनना ठनना [पतित होते हुए स्वयं को पतित न मानना] त्याग कर जैसे ...
अपनी ओर टुक हेरो री
अपनी ओर टुक हेरो री, किशोरी राधे। [1] हौं तो कुटिल नीच सब दिन को, विश्व विदित अघ मेरो री किशोरी राधे। [2] पै 'बिनु हेतु पतितपावनि' यह, विरद दुर्यो कित...
वृन्दावन के तो गोविन्द राधे
वृन्दावन के लता, गुल्म एवं तरु सब कृष्ण भक्त हैं।
अनोखी, पिय प्यारी की बात
अरी सखी ! बात यह है कि जब मैं प्रियतम को देखती हूँ तब प्रियतम, प्यारी से भी अधिक सरस प्रतीत होते हैं, और जब प्यारी जी को देखती हूँ तब प्यारी, प्रियतम ...
अनोखी, वीणा वारी नारि
श्यामसुन्दर वीणा वाली नारी का भेष बनाये हुए हैं। [1] जिनके सोलहों श्रृंगार के माधुर्य को देखकर अनन्त कामदेव की स्त्रियाँ बलिहार जाती हैं। वह अनोखी व...
अहो पिय! जब तुम्हरी बनि
हे प्रियतम श्यामसुन्दर! मैं जब तुम्हारी बन जाऊंगी तब तुम्हारे मुखचन्द्र की रूप माधुरी को निरन्तर पीते हुए भी मेरे नेत्र रूपी चकोर थोड़ा भी तृप्त न हों...
किशोरी मोरी, करहु कृपा की
हे किशोरी जी! मुझ पर कृपा दृष्टि करो। यह प्रबल माया मुझे अनेक प्रकार के नाच नचा रही है। [1] काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह ये बड़े-बड़े शत्रु चारों ओर से घे...
डारो डारो री, रंग बनवारी पै
होली के अवसर पर एक सखी अन्य समस्त सखियों से कहती है कि चलो चलो सब लोग श्यामसुन्दर के ऊपर रंग डालो। लाल - लाल गुलाल उनके गालों में मल दो एवं अबीर उनके...
ब्रजरस रस ऐसा गोविंद राधे
ब्रज रस ऐसा है कि साक्षात रस भी कहता है मुझे और और और पीना है।
कबै हरि बनिहौं ब्रज को मोर
हे श्यामसुन्दर ! मैं तुम्हारे ब्रजधाम में मोर कब बनूँगा ? मोर बनकर काले बादलों के समान तुमको सचमुच ही काला बादल समझ कर कब प्रेम – विभोर होऊँगा ? [1] प...
चारों वेद सार यह गोविंद राधे
चारों वेदों का सार यही है कि मन से नित्य श्री राधा के रूप को निहारौ एवं मुख से राधे राधे गाओ।
राधे मोहिं, चरण कमल
हे रसिकन जीवनमूरि राधिके ! मुझे अपने चरण कमलों की धूलि बना दीजिए। तुम जब मान करोगी तथा श्यामसुन्दर तुम्हारे चरणों पर सिर रखकर रोते हुए मनाने जायेंगे,...
हमारी गौर वरनि सरकार
स्वामिनी श्री राधा जू गौर वर्ण वाली हैं। प्रियतम श्यामसुन्दर के चित्त को चुराने वाली वृषभानुनन्दिनी अत्यन्त ही भोली भाली हैं। [1] उनके शरीर की कान...
राधे नाम लेने वाला
जो जन “राधे" नाम जपता है वह सब को नचाने वाले श्री हरि को भी अपने इशारे पर नचा सकता है।
किशोरी मोरी , अब न लगाओ बार
हे अलबेली राधिके ! अब देर न करो । मैं तुम्हारे द्वार पर खड़ा होकर तुम्हारी कृपा की भिक्षा माँग रहा हूँ । [1] रसिकों के मुख से सुना है कि तुम्हारे दर...
द्वार पतित इक आयो री किशोरी राधे
हे राधे ! तुम्हारे द्वार पर एक महान् पापी निष्काम-प्रेम की भिक्षा माँगने आया है, किन्तु साथ में शुद्ध अन्त:करण रूपी पात्र नहीं लाया है। [1] हे किशारी ...
जय राधे जय कृष्ण जय वृंदावन
हौं भई सहचरि राधेरानी की, नित्यधाम वृंदावन महारानी की। नित्यसेवा नित्यधाम, नित्य पावूँ आठों याम, राखो रूचि सोइ जोइ, ठकुरानी की॥ [2] मेरो एक प्राणधन, ...
हमारो, दोउ प्यारी प्यारो
प्रिया - प्रियतम दोनों ही हमारे सर्वस्व हैं। एक गौर वर्ण और एक नील वर्ण के हैं तथा दोनों ही मेरी आँखों के तारों के समान हैं। [1] एक नीलाम्बर धारण किय...
वृषभानु लली गुन गाइये
भावार्थ - अरे मन ! वृषभानुनन्दिनी के गुण गाओ । उनके ही चरण - कमलों का निरन्तर ध्यान करो । [1] उनके ही नाम का निरन्तर गान करते हए आँसुओं की धारा बहाओ ...
बलि जाउँ निकुंज विहार की
मानो यह जोड़ी शृंगार एवं रूप की मूर्ति ही साक्षात् श्री राधा-कृष्ण का स्वरूप धारण करके प्रेम के अन्तरंग रसों को बरसाने के लिए अवतरित हुयी है। प्रिया प...
किशोरी जु कि, मधुर मधुर मुसकान
भावार्थ:-श्री किशोरी जी की मुस्कान अत्यन्त ही मीठी है। उनके नीलाम्बर की फहरान मुझे एक क्षण को भी नहीं भूलती। [1] मणियों से जड़े हुए उनके मुकुट के ऊपर च...
मम स्वामिनि राधा नामिनी
मेरी स्वामिनी एकमात्र श्री राधिका जी ही हैं। सरस रतिरस तथा रास रस के लोलुप रसिक शिरोमणि श्यामसुन्दर भी जिनको अपनी स्वामिनी मानते हैं। [1] त्रैलोक्य क...
चलो मन ! श्री वृंदावन धाम
चलो मन ! श्री वृंदावन धाम। जहँ विहरत नागरि अरु नागर,कुंजनि आठों याम। भूख लगे तो रसिकन जूठनि, खाइ लहिय विश्राम। प्यास लगे तो तरणि-तनुजा,तट पिवु सलिल लल...
मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी
मेरी राधारानी प्रेम, सौंदर्य और रस की खान हैं। जिनके स्वागत में सदैव पूर्ण ब्रह्म भगवान श्री कृष्ण प्रस्तुत रहते हैं। [1] मेरी स्वामिनी श्री राधारानी...
नहिं मान्यो अपराध पूतनहिं, गरल पिवावन वारी के
श्याम सुंदर इतने कृपालु हैं कि पूतना ने श्री कृष्ण को अपना ज़हर पिलाना चाहा, और उसका अपराध ज़हर पिलाने वाला न देखते हुए उन्होंने पूतना को अपनी माँ मान क...
ललिता चरण चापैं पौढ़ीं कुंज श्यामा
श्री श्यामा जू एक सुंदर कुंज में लेटी हुई हैं और श्री ललिता जी उनके चरण चाप रही हैं। श्री श्यामसुंदर ललचाते हुए कहते हैं "धन्य धन्य हैं श्री ललिता जी"...
दोउ कर-कमल पसारि निहारति, तोहि वृषभानु दुलार
अरे मन! तू कितना मूर्ख है, तुझे राधारानी अपनी खुली बांहों के साथ उत्सुकता से इंतज़ार कर रही हैं। वह ऐसी स्वामिनी हैं जो बिना साधन के ही द्रवित होकर पिघ...
जो मन बुद्धि दै के भजे आठु यामा
जो जीव मन-बुद्धि का समर्पण कर निरन्तर श्रीराधा का स्मरण करता है उसका योगक्षेम वह उसी प्रकार वहन करती हैं जिस प्रकार नवजात शिशु की देखभाल माँ करती है।
कान्हा की जादू भरी मुसकान
कान्हा की जादू भरी मुसकान - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज श्याम सुंदर की मुस्कान इतनी जादुई है कि जो भी देखता है, वह लोक, वेद, कुल सब कुछ भूल जाता ह...
ब्रज बामा जब सेवा करें श्याम श्यामा
जब भी ब्रज गोपियाँ श्यामा श्याम की सेवा करती हैं, तो वे अपने दिव्य प्रेम परमानंद (सत्विका भाव) की अपनी गतिविधियों को छिपाने और दबाने का हर संभव प्रयास...
राधे नाम पुकारत आरत, भाजति तजि निज धाम
राधे नाम पुकारत आरत, भाजति तजि निज धाम । - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, सिद्धांत माधुरी भक्त के आर्त-भावयुक्त राधे नाम पुकारते ही ...
मंजू कुञ्ज पुंज बिच बैठे श्याम श्यामा
श्यामा श्याम ब्रज में सखियों के साथ एक कुञ्ज में विराजमान हैं। सखियों की प्यास श्री श्यामा श्याम को देखकर क्षण क्षण बढ़ती रहती है, उन्हें संतोष नहीं हो...
भाव मधुर ही मना, राधा रमना में रखना
"भाव मधुर ही मना, राधा रमना में रखना"। - सुमिरन करले मना, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज हे मन, श्री राधा कृष्ण भक्ति में केवल माधुर्य भाव को ही रखना...
श्याम गए मथुरा न गइ ब्रज बामा
श्यामसुंदर जब गोपियों से अलग हुए शरीर से तो गोपियाँ उनसे मिलने मथुरा नहीं गयी। उन्होंने केवल श्याम सुन्दर की रूचि में ही अपनी रूचि रखी।
माधुर्य भाव ही था ब्रज ब्रज बामा
ब्रज की सखियों का श्यामा श्याम के प्रति ब्रज में माधुर्य भाव था, माधुर्य में भी निष्काम भाव था।
प्रेम देखना जो चाहो चलो ब्रज धामा
यदि आप यह देखना चाहते हैं कि निःस्वार्थ एवं निष्काम प्रेम क्या है, तो ब्रज में जाकर गोपियों को देखें। वे निस्वार्थ प्रेम की अवतार हैं। वे अपना सुख श्य...
श्यामा श्याम पूछें कहा चाहो ब्रज बामा
श्यामा श्याम ने ब्रज सखियों से पूछा कि वे क्या चाहती हैं, सखियाँ बोलीं: आप दोनों नित्य मुस्कुराते रहो एहि हमारी चाह है।
जित देखूँ तित तोहि प्यारी, बरसानेवारी
जित देखूँ तित तोहि प्यारी, बरसानेवारी। - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी मैं जहां भी देखता हूं, मुझे केवल और केवल बरसानेवारी "श्री राध...
जय श्री वृषभानु दुलार की, जय अलबेली सरकार की
जय श्री वृषभानु दुलार की, जय अलबेली सरकार की। वृषभानु नंदिनी श्री राधा रानी की जय। अलबेली सरकार की जय। जय स्वामिनी नंदकुमार की, जय अधाधुंद दरबार की।...
यदपि ‘कृपालु’ एक दोउ स्वामिनि
जगद्गुरु कृपालु जी’ कहते हैं कि यद्यपि ये दोनों परस्पर अभिन्न हैं, फिर भी रसिकों के दृष्टिकोण से किशोरी जी श्यामसुन्दर की स्वामिनी हैं ।
ब्रज की रेनु रेनु लखि चिन्मय
अरे मन ! ब्रज के प्रत्येक कण-कण में चिन्मय-स्वरुप देखते हुए सदा ही तन्मय रहा करना। "श्री कृपालु जी" कहते हैं कि हे मन ! किन्तु यह न भूलना की इन सब में...
पलक ढांपत राखत पुतरिन जो
"पलक ढांपत राखत पुतरिन जो, प्रणत भये इक बार" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा जो एक बार भी श्री राधारानी को आत्मसमर्पण कर देता है, उस...
बार बार सोचो ये गोविंद राधे, एक दिन ब्रज रस पियूँगा बतादे
"बार बार सोचो ये गोविंद राधे, एक दिन ब्रज रस पियूँगा बतादे।" - राधा गोविंद गीत, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज (5937) बार-बार सोचना चाहिए कि एक दिन म...
बलि जाऊं प्रेम-रस-सार की
श्री राधा-कृष्ण के प्रेम की मधुरता पर मैं बार-बार स्वयं को न्योंछावर करता हूँ। रसिकों के चूड़ामणि प्रिय श्री श्यामसुंदर एवं उनकी प्राण-प्यारी रस की खान...
हमारी अलबेली सरकार
“हमारी अलबेली सरकार। रसिक रंगीली, गुण गरबीली, रसिकन की रिझवार। " - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा हमारी अलबेली सरकार, रसिकों की रं...
ब्रज रज महिमा जानें ब्रज बामा
ब्रज-रज की महिमा ब्रजांगनाए ही जानती हैं जिन्होंने युगल किशोर श्री श्यामा श्याम को इसी ब्रज की रज में लोटते हुए देखा है।
कुँवरि बिनु, अब तो रह्यो न जाय
( किशोरी जी के वियोग में प्रियतम श्यामसुन्दर का विलाप।) हाय ! हाय !! किशोरी जी के बिना अब तो किसी प्रकार भी रहा नहीं जाता। अरी सखियों ! जो कोई किशोरी ...
तू" कृपालु "कह रसिकन राधे
"तू" कृपालु "कह रसिकन राधे, यह परतीती उर राधे ।" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज हे राधे, रसिक संत कहते हैं कि "आप बहुत कृपालु हैं। इस तथ्य को ध्या...
है खेल एक नज़र का
“ है खेल एक नज़र का, घटना है क्या तुम्हारा करदो करम वो हमदम, भूलूं जहाँ सारा।” - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज हे श्री कृष्ण, बस एक नयन कटाक्ष करने की...
जाको श्यामहुन स्वामिनी मानी
"जाको श्यामहुन स्वामिनी मानी, धर मुकुट चरण युग महारानी । " - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज श्री कृष्ण जिनके चरणों में अपना मुकुट रखते हैं और स्वामिनी...
जय कोटि काम अभिराम हरे
“जय कोटि काम अभिराम हरे, रस बरसावत ब्रज धाम हरे ।” - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज जिनका सौंदर्य लाखों कामदेव को भी लज्जित करने वाला है और जो ब्रज म...
सोई पावे रास रस बिन बढ़ा
सोई पावे रास रस बिन बाधा, जोई आराधा श्री राधा - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज जो श्री राधा की भक्ति करता है, वह रास रस के अमृत को बिना किसी बाधा के ...
श्यामा श्याम जायँ नहिं तजि ब्रजधामा
दृढ़ विश्वास रखो कि श्यामा श्याम सदैव ब्रज में निवास करते हैं। उनके लिए रोकर आँसू बहाओ, निश्चित ही वे तुमको प्राप्त होंगें।
स्वामिनी राधा रानी गोविंद राधे
सब की स्वामिनी एक मात्र श्री राधा ही हैं। हे किशोरी जी आपके समान केवल और केवल आप ही हो, और कोई नहीं है।
बनि अलमस्त नाम गुन गाउँ
हम शरणागत के भय को दूर करने वाली लाड़लीजी के नाम एवं गुणों को गाते हुए मतवाले बने रहते हैं । ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि मैं तो नीलाम्बर धारण करने वाल...
तेरे ऋण उऋण ना होई सक राधे
तेरे ऋण उऋण ना होई सक राधे, अगनिता जनमहुँ राधे - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी हे राधे जू, आप बहुत उदार हैं और आपने मुझ पर हर क्षण ...
राधे राधे बोल नित करु राधे को ध्यान
श्री राधा का ध्यान करते हुए हर समय श्वास-प्रश्वास के साथ ‘राधे राधे’ का जप करें। ‘राधा’ नाम सुनते ही श्रीकृष्ण अपने गोलोक धाम को छोड़कर दौड़ते हुए आ ज...
प्रेम रूप रस सिंधु दोउ श्यामा श्याम
श्री राधा कृष्ण प्रेम, सौंदर्य और रस के सागर हैं जिन्हें वे बिना किसी दाम के समस्त प्यासे पिपासु जीवों को पिलाते हैं।
तेरे बने बिनु जीना जीना नहिं श्यामा
हे श्यामा [श्री राधा]! तुम्हारे बने बिना जीवन भी भला कोई जीवन है (अर्थात् व्यर्थ है)। यूँ तो पेट सूअर आदि भी भर लेते हैं। यदि तुमसे न मिले तो इस मानव ...
मेरी बरसाने वारी प्यारी प्यारी प्यारी
मेरी बरसानेवारी श्री राधारानी अत्यंत प्यारी हैं, जो वृषभानु दुलारी हैं, ब्रज रस प्रदान करने वाली हैं। [1] मेरी राधारानी प्रेम-रस की वर्षा करने वाली ह...
राधा नाम-रूप-गुण
निष्काम भाव से श्रीराधा नाम, रूप, गुण, लीला, जन एवं धाम में ही अपने मन को लगाओ। इसी में मानव-जीवन की सार्थकता है।
रहा नाहिं जाये जब मिले बिनु श्यामा
जब श्री राधा के मिलन के बिना प्राण व्याकुल हो उठें, तब समझो की प्रेम बीज का वपन ह्रदय में हो चुका है।
मेरो मन गौर चरण अनुराग्यो
मेरा मन तो किशोरी जी के चरणों में अनुरक्त हो गया है। मैं अनादि काल से मोह की नींद में सो रहा था, रसिकों ने मुझे जगा दिया है। [1] जागते ही मेरा स्वप्न...
रहु श्री बरसाने गाम रे
अरे मन! चलकर श्री बरसाने ग्राम में निवास कर, जहाँ पूर्णब्रह्म घनश्याम भी अपने मुकुट से झाड़ू लगाया करते हैं। [1] जहाँ बड़े-बड़े योगीन्द्र, मुनीन्द्र व...
जाऊँ बलि, जोरी-युगल निहार
श्यामा-श्याम की जोड़ी को निहार कर मैं बलिहार जाता हूँ। वृषभानुनंदिनी का शरीर गौर वर्ण का है , वे मनमोहन के मन को मोहित करने वाली हैं एवं स्वभावतः भोली ...
हमारे मन बसे युगल सरकार
हमारे मन, बसे युगल सरकार। गौर वरनि वृषभानुनंदिनी, नील वरन रिझवार। गरबाहीं दीने दोउ ठाढ़े, मंजु निकुंज मझार। [1] उत पहिरे नीलांबर सोहति, इत पीतांबर धार।...
प्रेम रूप रस खानी, ऐसी राधेरानी
हमारी राधारानी प्रेम, रूप तथा रस की खान हैं। (1) हमारी राधारानी श्रीधाम वृन्दावन की महारानी हैं। (2) हमारी राधारानी की कृपा से ही भगवान शंकर शिवानी...
माँगना हो तो माँगो सेवा श्याम श्यामा
यदि कुछ माँगना ही है तो केवल श्यामा-श्याम की सेवा माँगो। उस सेवा के लिए निष्काम प्रेम की याचना करनी चाहिये। इसके अतिरिक्त कोई अन्य इच्छा या याचना हृदय...
चलो मन श्री वृंदावन धाम
रे मन! आप वृंदावन में अवश्य निवास करें जहाँ राधा कृष्ण हमेशा दिन रात कुंज में विहार करते हैं।
आरती भानु दुलारी की
मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। राधा रानी दिव्य धाम वृंदावन में रत्न जड़ित स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं। सुंदर सखिय...
पुनी प्राण प्यारी आजा
"पुनी प्राण प्यारी आजा, पुनी ब्रज, ब्रज रस बरसाजा । - "जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज श्री कृपालुजी महाराज कहते है, हे राधे ! आप पुनः कब ब्रज में आकर...
छबीली छबि, लखि छबि मानी हार
छवि की खान श्री राधा का दर्शन कर साक्षात् छवि भी पराजित हो गई। मूर्तिमती छवि हाथ जोड़े भानुनन्दिनी की सेवा में खड़ी रहती हैं। [1] समस्त कलायें साकार ...
संत जन बारह मास बसंत
संत महात्माओं के पास बारहों महीने बसन्त का निवास रहता है। संत लोग बसन्तकालीन कोयल की कूक के समान अत्यन्त प्रेम भरी ध्वनि में निरन्तर ‘पिउ’ ‘पिउ’ ऐसा क...
हमारे, मन भायो ब्रजधाम
हमारे, मन भायो ब्रजधाम। जहँ ज्ञानिन - आराध्य मुक्तिहूँ, निशिदिन रहति गुलाम। [1] पानी भरति बनी पनिहारिनि, निदरतहूँ ब्रजभाम। गहवरवन निधिवन वृंदावन, लतन-...
हमें तो अली लली सौं काम
अरी सखी! मुझे तो एकमात्र किशोरी जी से ही काम है। जो रसिकों को रिझाने वाली गुणों की खान एवं रूप रस की सीमा हैं। [1] पूर्णकाम श्यामसुन्दर भी जिनकी दिन-र...
कहो पिय किन तोहिं रसिक बनायो
एक सखी कहती है कि हे प्रियतम ! यह तो बताओकि तुमको रसिक बनाया किसने है? तुम पूर्व शूकरावतार में अपने सौन्दर्य के बल पर कब 'मदन मोहन' कहलाये थे? मत्स्या...
बलि जाउँ निकुंज लतान की
भावार्थ – मैं विविध प्रकार की लताओं के कुंजों की बार–बार बलैया लेता हूँ । मैं वृक्षों में लिपटी हुई लता एवं लताओं में फूले हुए विविध प्रकार के फूल तथ...
रंगीली राधा रसिकन प्रान
रंगीली राधा रसिकों को प्राण के समान प्रिय हैं। रसमयी किशोरी जी की प्रेम रस से सरोबार भोली सी मुस्कान अत्यन्त ही मधुर है। किशोरी जी की देह का रंग सुवर्...
श्याम धाम नंदगाम गोविन्द राधे
ब्रज में, श्री कृष्ण का निवास नंदगाँव है, श्री राधा का निवास बरसाना है। लेकिन दोनों युगल का (श्री कृष्ण और श्री राधा रानी) लीला धाम श्री वृंदावन धाम ...
माया की कौन कहे, मायापति घबराये
माया के बारे में क्या कहना है, यहां तक कि माया के शासक (श्री कृष्ण) भी उनसे डरते हैं जो श्री राधा के चरणों में आश्रय लेते हैं।
'कृपालु' धन नाम रूप गुण राधा
'कृपालु' धन नाम रूप गुण राधा। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज श्री कृपालु जी महाराज का कहना है कि श्री राधा का नाम, रूप और गुण मेरे जीवन की संपदा ह...
भरी भरी अंक लतन आनंद जल
वृंदावन के क्रूरों को गले लगाओ, दिव्य निवास और बारिश के मौसम की भारी बारिश के रूप में धीरे-धीरे प्रेम-आनंद के उत्साह से आँसू बहाए। जगद्गुरु श्री कृपाल...
श्यामा श्याम नाम, रूप, लीला, गुण, धामा
जिस ग्रन्थ में श्यामा श्याम के नाम, रूप लीला, गुण, धाम का वर्णन न किया गया हो, उसे दूर से ही प्रणाम करना चाहिये।
हमारी राधे, निराधार आधार
भावार्थ- हमारी किशोरी जी निरवलम्ब की अवलम्ब हैं । उनकी पतितपावनता की बान इसी से स्पष्ट है कि वे अपने को पतित मानने वाले को ही, दिव्य प्रेमदान प्रदान क...
रुक्मणी तो हैं दासी गोविन्द राधे
रुक्मणी (महालक्ष्मी अवतार) श्री कृष्ण की दासी हैं और श्री राधा, श्री कृष्ण की स्वामिनी हैं । श्री राधा के श्री कृष्ण दास हैं।
सखी सब, ह्वै गये लालहिं लाल
एक सखी वृन्दावन की होली के दृश्य का वर्णन करती हुई अपनी अन्तरंग सखी से कहती है कि अरी सखी ! युगल सरकार की होली में पिचकारियों से ऐसा रंग चला और ऐसा गु...
नरा तनु पाया 'कृपालु' भजन करू
"नरा तनु पाया 'कृपालु' भजन करू, यह जीवन अब जा रा " - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज मनुष्य जीवन जैसा अनमोल रत्न जो की देवताओं को भी दुर्लभ है बीता जा ...
यही दरबार दीन को आदर, जो जानन चह जानि
“ Yehi darbaar Deena Ko Aadara, Jo Jaanana Chaha Jaaniye. Kaha “Kripalu” yaha baata maani mana, lalihin prema rasa saaniye. ” - Jagadguru Shri Kripa...
श्यामा श्याम सखीजन गोविंद राधे
श्यामा श्याम सखीजन गोविंद राधे, प्राणप्यारा वृंदावन धाम है बतादे । - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5930) श्री वृन्दावन धाम राधा क...
तू हे मेरी तू हे मेरी स्वामीमिनी राधा रानी
"तू ही मेरी तू ही मेरी स्वामिनी राधा रानी, तू ही मेरी, तू ही मेरी जीवनी राधा रानी" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज हे राधा रानी, आप ही मेरी स्वामिन...
सब तजि जोइ भज श्याम अरु श्यामा
भावार्थ - जो समस्त आश्रयों का त्याग कर अनन्य भाव से एकमात्र श्यामा श्याम का ही आश्रय ग्रहण कर उनका निरंतर स्मरण करता है, श्यामा श्याम भी निरंतर उसका स...
तेरे जैसी करुणामयी न कोई श्यामा
हे श्री राधा, आपसे अधिक दया करने वाला एवं करुणामयी न कोई था, है, न होगा, इसीलिए मैं बार-बार आपके निज धाम ब्रज आता हूँ।
श्याम पै लुटा दो काम गोविंद राधे
हे मन, श्री कृष्ण पर अपनी सभी इच्छाओं का बलिदान कर दो और श्री राधारानी पर स्वयं श्री कृष्ण को न्योछावर कर दो।
हमें नहिं काहू सों कछु काम
भावार्थ - हमारा किसी से कुछ प्रयोजन नहीं है । [1] हम तो एकमात्र स्वामिनी किशोरी जी के ही दास हैं । इन्हीं का निरन्तर स्मरण करते हैं। [2] जिनकी दासता स...
रसिकन की, गति रसिकन जाने
एक रसिक कहता है कि रसिकों की अटपटी बातें रसिक ही समझ सकते हैं। [1] जिस प्रकार पाँच वर्ष के भोले बालक को कामयुक्त युवती के आलिंगन का सुख स्वप्न में भी ...
श्री राधेरानी प्रेम तत्व की सार
श्री वृषभानुनन्दिनी प्रेम तत्व की सार हैं। किशोरी जी वेदों और शास्त्रों से भी सर्वथा अगम्य होते हुए भी दीनजनों के लिए अत्यन्त सुगम हैं। [1] ब्रह्मा, व...
राधे नाम रस ऐसा
श्री राधे नाम का ऐसा अद्बुत रस है कि रसिक चाह करते हैं कि उन्हें अनंत कोटि रसना मिल जाए इसे पान करने कि लिए।
हमरी ओर टुक हेरो री किशोरी राधे
भावार्थ - हे वृषभानुनंदिनी राधे! थोड़ा इस अधम की ओर भी अपनी कृपा - कटाक्ष युक्त दृष्टि डालिए। यद्यपि मैं यह बात पूर्ण रूप से जानता हूँ कि तुम्हारे बिना...
रटो रे मन ! छिन छिन राधे नाम
हे मन ! क्षण-क्षण निरन्तर प्रेमपूर्वक राधे नाम का संकीर्तन कर। जिस राधे नाम को ब्रह्मा, विष्णु आदि की तो कौन कहे, स्वयं साक्षात् ब्रह्म श्रीकृष्ण भी...
गाओ छिन छिन नाम नाम राधे
"गाओ छिन छिन नाम नाम राधे, ध्याओ छिन छिन रूप राधे" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज क्षण क्षण (प्रतिक्षण) श्री राधा नाम का गान करिये और निरंतर उनके रू...
मोहिं तो भरोसो है तिहारो री किशोरी राधे
हे रासेश्वरी राधे ! मुझे तो एकमात्र तुम्हारा ही अवलम्ब है। मैं जिस कोटि का पतित हूँ, उसे तुम्हारे सिवा और कोई भी सांसारिक जीव नहीं जानता। [1] संसार ...
पिए ते मिला दे प्यारी
पिए ते मिला दे प्यारी, मैं भी तेरी ही हूँ प्यारी - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज हे भोरी भारी राधे, कृपा करके मुझे भी प्रिय कृष्ण से मिलवाइए, आखिरका...
दो मुख चंद्रा चकोर दो मुख भानता प्रेम विभोर
"दोउ मुख चंद्र चकोर दोउ मुख, भेंटत प्रेम विभोर" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज युगल सरकार चंद्र भी हैं और चकोर भी, जैसे चकोर सदैव चंद्र को ही देखता ...
नर चहे स्वर्ग सुख, गोविंद राधे
"नर चहे स्वर्ग सुख, गोविंद राधे, स्वर्ग सुर चहे नर, तनु दिलवा दे। " जगद्गुरु श्री कृपालु महाराज, राधा गोविन्द गीत इंसान स्वर्ग का सुख पाना चाहता है ...
मेरी राधा रानी ब्रजरस की खानी
मेरी राधा रानी ब्रजरस की खानी, ठाकुरहूँ की हैं ठकुरानी। [1] मेरी राधारानी सँग सारँगपानी, विहरत वृंदावन राजधानी। [2] मेरी राधारानी सम मेरी राधारानी,...
राधे कहे श्याम भजो श्याम कहे राधे, मेरी मानो भजो नित तुम श्याम राधे
“राधे कहे श्याम भजो श्याम कहे राधे, मेरी मानो भजो नित तुम श्याम राधे। ” - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज राधारानी कहती हैं, "श्री कृष्ण की भक्ति करो" ...
तोको दीन जन प्रिय भानुदुलारी, ऐसी कृपा करो दीन बनूँ सुकुमारी
“तोको दीन जन प्रिय भानुदुलारी, ऐसी कृपा करो दीन बनूँ सुकुमारी। " - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी हे सुकुमारी राधारानी! आप सभी दीन जनो...
वृषभानु ललहिं उर आनिये
वृषभानु ललहिं उर आनिये, अस उदार सरकार न मिलिहि, उन्हीं स्वामिनी मानिये। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, श्री राधा माधुरी (44) हे अ...
अवगुन चित न धरो श्री राधे
"अवगुन चित न धरो श्री राधे, अब तो कृपा करो श्री राधे!" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज हे राधे! आप मेरे दोषों पर ध्यान न दें, अब मुझ पर आप कृपा करें...
श्री राधे जू हे माधव, माधव राधा
“श्री राधे जू हे माधव, माधव राधा। श्री राधा तजि भजता श्याम अपाराधा। ” - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज श्री राधा कृष्ण हैं और कृष्ण राधा हैं। श्री रा...
हमारो धन श्री राधे जू को नाम
हमारो धन, श्री राधे जू को नाम, राधे नाम प्रताप श्याम भये। रसिकन में सरनाम। राधे नाम सिद्ध कर मुरली, तानन मोह्यो बाम। [1] राधे नाम कृपा ते द्वापर, रास ...
मम प्यारी वृषभानु दुलारी
"मम प्यारी वृषभानु दुलारी, पिय नंदनंदन बनवारी।" मेरी प्यारी राधा राजा वृषभानु की दुलारी बेटी हैं और मेरे प्यारे कृष्ण नंद के बेटे हैं। "मम प्यारी बरस...
सखी यह कैसो है ब्रज धाम
सखी यह कैसो है ब्रज धाम - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज एक सखी दूसरे से कहती है - हे सखी! यह ब्रज किस प्रकार का धाम है? जहां पुरुषों और महिलाओं को प...
रहो रे मन! गौर चरण लव लाइ
“रहो रे मन! गौर चरण लव लाइ, जिन चरनन चरण-रेणुका, सेवत श्याम सदाई। " - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा, सिद्धांत माधुरी (91) रे मन! श्री...
अजु लखो मंजु निकुंज-बहार
अजु लखो मंजु निकुंज-बहार, झूलन की झाँकी अति बांकी, धनी जीन दृगन निहार । - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज वृंदावन में आज सुंदर निकुंज वनों की ओर निहारे...
प्रेम के अधीन रहें श्याम अरु श्यामा
भले ही वेदों में राधा कृष्ण को पूरी तरह से स्वतंत्र बताया गया है, फिर भी वे अपने भक्तों के प्रेम से बंधे हुए हैं।
सुमिरन कर ले मना, छिन छिन राधा रमरमना
“सुमिरन कर ले मना, छिन छिन राधा रमरमना। यह जग नहिं अपना, जाना होगा घर सजना। " - सुमिरन कर ले मना, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज हे मन ! क्षण क्षण श्...
अद्वितीय इक तत्व है राधा तत्व प्रधान
केवल एक सर्वोच्च एवं अद्वितीय तत्त्व है जिसकी कोई समानता ही नहीं—वह हैं श्री राधा। श्रीकृष्ण तो उन्हीं का दूसरा स्वरूप हैं।
हम चाकर कुंज विहारिणि के
हम तो निकुञ्ज-विहारिणी स्वामिनी के ही दास हैं; रुक्मिणीवल्लभ श्यामसुन्दर तथा लक्ष्मी-अवतार श्री रुक्मिणी के भय से भी नहीं डरते। [1] संसार-सागर से ता...
युगल रस वृन्दावन बरसे
दिव्य वृन्दावन में श्यामा-श्याम का दिव्य प्रेम-रस बरस रहा है। रसिकों के शिरोमणि, इन्द्रनील-मणि के समान कान्तिवाले, कौस्तुभ-मणि धारण किए हुए श्यामसुन्द...
नित सेवा मांगूँ श्यामा श्याम तेरी
नित सेवा मांगूँ श्यामा श्याम तेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं! बढ़ें भक्ति निष्काम नित मेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं! [1] तोहिं पतित जन...
मन करु सुमिरन राधे रानी के चरण
मन करु सुमिरन राधे रानी के चरण। हे मन, श्री राधारानी के चरण कमलों का स्मरण कर। राधे रानी के चरण, नव पल्लव बरन। श्री राधारानी के चरण कमल नये पल्लव की...
प्रेम रस रूप अगाधा राधा
श्री किशोरी जी प्रेम – रस एवं रूप की अनंत राशि हैं। उनकी जो उपासना करता है वह सहज ही दिव्य रास – रस प्राप्त करता है। [1] इतना ही नहीं, वह किशोरी जी ...
मैं तो राधे राधे गाऊँ कालिंदी तट पे
मैं तो राधे राधे गाऊँ कालिंदी तट पे, वो तो भाजो चलो आवे रोतो वंशी वट पे। मैं तो श्री यमुना तट पर बैठ राधे राधे गाऊँगी, श्री कृष्ण रोते रोते दौड़ते हुये...
राधा नाम महिमा
राधे राधे बोल मन गोविंद राधे, राधे नाम सुनी यम शीश झुका दे। राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे, जहां जाए, जाएं हरि साथ बता दे। राधे नाम लेने वाला गो...
श्याम हौं कब ह्वै हौं ब्रज धूरि
हे श्यामसुन्दर ! मैं कब ब्रज – धूलि बनूँगा ? ब्रज – धूलि बनकर, आनन्द विभोर होकर तुम्हारे अंग – अंग में कब लिपटूँगा ? [1] जिस ब्रज – धूलि को रसिक लोग ...
प्यारी सम प्यारी प्यारी बरसानेवारी
“प्यारी सम प्यारी प्यारी बरसानेवारी, है कृपालु अति प्यारी बरसानेवारी। " - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी राधारानी अत्यंत कृपालु हैं और...
युगलवर निरतत कुंज मझार
“युगलवर निरतत कुंज मझार। देखति ललितादिक सखियन सब, पुनि पुनि बलि बलिहार” - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा युगल वर कुञ्ज में विहार...
जापे टुक कृपा करे प्यारी, वाके पाछे डोले बनवारी
"जापे टुक कृपा करे प्यारी, वाके पाछे डोले बनवारी" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी जिसपर राधारानी कृपा करती हैं, श्री कृष्ण उनके पीछे ...
हमारो मन बसे युगल सरकार
“हमारो मन बसे युगल सरकार। गरबाहीं दिनें दोउ ठाड़े, मंजू निकुंज मझार। " - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा श्री राधा कृष्ण हमारे हृदय में...
श्याम हौं कब ब्रज बसिहौं जाय
हे श्यामसुन्दर! वह दिन कब आएगा, जब मैं सदा के लिए ब्रज में जाकर निवास करूँगा? कब राधा-कृष्ण के विविध नामों और गुणों का गान करते हुए मेरी आँखों से निरन...
नित सेवा मांगूँ श्यामा श्याम तेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं
नित सेवा मांगूँ श्यामा श्याम तेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी हे श्री श्यामा श्याम मैं केवल...
रटो निश दिन राधा नाम रे
“रटो निश दिन राधा नाम रे, जासु नाम घनश्याम यम बसु, रट नित्त पूरन काम रे ” - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज अरे मन! निरंतर "राधा" नाम का रटन कर, जो कि ...
केवल ब्रज रस की एक बूंद पीने से, सभी समस्त सुख उसके सामने तुच्छ लगते हैं
केवल ब्रज रस की एक बूंद पीने से, सभी समस्त सुख उसके सामने तुच्छ लगते हैं, जो लोग ब्रज रस भारी मात्रा में पी रहे हैं उनके बारे में क्या कहना है? - जगद्...
प्रत्येक श्वास से "राधे" नाम का उच्चारण करें।
प्रत्येक श्वास से "राधे" नाम का उच्चारण करें। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
जोई ब्रज रस बरसने वारी
"जोई ब्रज रस बरसाने वारी. जोई गौर बरन भोरी भारी" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज जो रात दिन ब्रज रस बरसाती हैं, और जो गौर वर्ण की भोरी भारी हैं, वे क...
हमारो धन राधा राधा राधा
हमारो धन राधा राधा राधा। मेरी धन संपत्ति एकमात्र श्री राधा हैं। प्राण धन राधा राधा राधा। मेरी प्राण धन एकमात्र श्री राधा हैं। जीवन धन राधा राधा रा...
मोहिं तो भरोसो है तिहारो री किशोरी राधे
हे रासेश्वरी राधे! मुझे तो एकमात्र तुम्हारा ही अवलम्ब है। मैं जिस कोटि का पतित हूँ, उसे तुम्हारे सिवा और कोई भी सांसारिक जीव नहीं जानता। [1] संसार क...
आयु जल बुलबुला गोविंद राधे
आयु [मानव देह] एक पानी के बुलबुले जैसा है, किसी को नहीं पता यह कब फूट [समाप्त] हो जाए।
राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे
श्री राधे नाम का ऐसा अद्बुत रस है की सनक इत्यादि परमहंसों की भी सनक छुड़ा देता है।
आपु को इकलो न मानो कह बामा
कभी एक क्षण के लिए भी स्वयं को अकेला न मानो। सदा सब स्थानों पर श्री राधा तुम्हारे साथ ही हैं।
चलो मन ! गहवर कुंज लतान
भावार्थ – अरे मन ! गहवर वन की लता कुंजों में चल, जहाँ वृषभानुनन्दिनी राधिका एवं नन्दनन्दन श्यामसुन्दर नित्य विहार करते हैं । [1] वे दोनों सहस्त्रों ब्...
बुधि प्रतीति द्रीन्हा इका दिन राधा
"बुधि प्रतीति दृढ़ इक दिन राधा, अपनहियों मोहिं राधा" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज साधक को ढृढ़ विश्वास होना चाहिए कि एक दिन दयालु राधा रानी मुझे सका...
तेरी कृपा ही ते कोऊ
" तेरी कृपा ही ते कोऊ, जाने तोहिं राधारानी । तेरी कृपा ही ते कोऊ, माने तोहिं राधारानी । " - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 2 (49) हे...
हम चाकर प्रीतम प्यारी के
हम चाकर प्रीतम प्यारी के । पास न फटकत महाविष्णु के, अरु उनकी घरवारी के । चिन्मय दिव्य धाम वृंदावन, विहरत संग बिहारी के । । - जगद्गुरु श्री कृपालु जी...
राधे राधे गाये जा गोविन्द राधे
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते है, कि बस तुम 'राधे राधे' नाम स्मरण किए जाओ, एक दिन राधे नाम 'श्री राधारानी' को बुला देगा।
राधे रानी की चरण, जीवन रसिकन
श्री राधारानी के चरण रसिकों के जीवन प्राण है।
बसे रे मेरे, नैनन दोउ सरकार
बसे रे मेरे, नैनन दोउ सरकार । गरबाहीं दीने रँग – भीने, छीने छवि – श्रृंगार । रस मुरली ने अस सुख दीने, कीने बस ब्रजनार । हँसनि दसन, दृग फँसनि गँसनि अस,...
राधे राधे बोल मन गोविंद राधे, सुर दुर्लभ तन सफ़ल बनादे
राधे राधे बोल मन गोविंद राधे, सुर दुर्लभ तन सफ़ल बनादे - राधा गोविंद गीत, जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज अरे मन ! नित्य ही "राधे राधे" का हर श्वास से...
जाकी पद-रज चाहत हरी हर
“जाकी पद-रज चाहत हरी हर, सोउ चह तव पद रज राधे. श्री राधे राधे राधे.” - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज ओह राधे, आपकी महानता का वर्णन कौन कर सकता है, य...
नित सेवा मांगूँ श्यामा श्याम तेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं
नित सेवा मांगूँ श्यामा श्याम तेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी हे श्री श्यामा श्याम मैं केवल...
दोउ एक हैं “कृपालु”, मन जनि अटके
“ दोउ एक हैं “कृपालु”, मन जनि अटके ” - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज श्री राधा और कृष्ण दोनों एक ही हैं, केवल रूप अलग है, प्राण एक ही है।
राधे बिनु कल नहीं गोविन्द राधे
श्री राधा रानी के बिना श्री कृष्ण आधे पल के लिए भी जीवित नहीं रह सकते।
वृन्दावन धाम भी है गोविन्द राधे
वृन्दावन धाम भी है गोविन्द राधे, कृष्ण के समान सेव्य बतादे । - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत - 5917 श्री वृन्दावन धाम भी श्री कृ...
जग तो छोड़ना ही होगा गोविन्द राधे
“ जग तो छोड़ना ही होगा गोविन्द राधे, पहले ही छोड़ मन हरि में लगा दे ” - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज आपको इस जगत को छोड़ना है क्योंकि जगत अस्थायी ...
रटो रे मन! छिन छिन राधे नाम
ओह मेरे मन! जीवन के हर एक अनमोल क्षण का उपयोग श्री राधा के नाम को गाकर ही कर। श्री राधा का नाम न केवल ब्रह्मा आदि देवों के द्वारा नित्य लिया जाता हैं,...
"सरस सुरति रस सरस सो रति रस
"सरस सुरति रस सरस सो रति रस, बरसत वृन्दा विपिन मझार ।" - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज यह मधुर दिव्य प्रेम रस, जो ज्ञानियों की पहुंच से परे है, यह ...
राधे राधे रटें श्याम
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं कि श्याम "राधे राधे" रटते है और राधा "श्याम श्याम" रटती हैं परन्तु दिव्य युगल का युगल नाम "राधे श्याम" मेरा ज...
आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की
आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की। दुहुँन सिर कनक-मुकुट झलकै, दुहुँन श्रुति कुण्डल भल हलकै, दुहुँन दृग प्रेम सुधा छलकै, चसीले बैन, रसीले नैन...
कृष्ण कहु पाछे प्रथम कहु राधा
पहले श्री राधा का नाम और फिर श्री कृष्ण का नाम उच्चारण करें। श्री राधा के बिना श्री कृष्ण की पूजा करना एक अपराध है।
हमारी राधे रानी रस की खानी
हमारी श्री राधा रस की खान हैं। इनकी राजधानी श्री वृंदावन धाम है और वह हर पल वहां उपस्थित हैं।
श्री राधे हमारी सरकार फिकिर मोहे काहे की
"श्री राधे हमारी सरकार फिकिर मोहे काहे की ।" - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा जब श्री राधा रानी हमारी गुरु और स्वामिनी हैं, तो हमें ...
जब रस की बतियन महँ झगरैं
श्री राधे, मेरी एक इच्छा को पूर्ण करें जब भी आपके और प्रिय श्याम सुंदर के बीच प्रेम से झगड़ा होता हो, तो दिव्य प्रेम और रस में, मैं एक मात्र आपका पक्...
मेरे प्राणन प्यारे आजा
मेरे प्राणन प्यारे आजा , मेरे नैनन तारे आजा. मेरे नन्द दुलारे आजा, मेरे मुरली वारे आजा. - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज हे मेरे प्यारे कृष्ण! हे ...
“ रसिक शिरोमणि श्यामहु याचत, इनके पग की धूरि | हमारी राधे रसिकन जीवन मूरि || ”
रसिकों में शिरोमणि स्वयं श्री श्यामसुंदर भी श्री राधा रानी के चरणों की धूल की याचना करते हैं। ‘हमारी राधे’ — यही रसिक संतों के जीवन का प्राण और परमाध...
भीजैं दोउ कुंज महँ वृन्दावन धामा
श्री वृन्दावन धाम में एक बार तेज़ बरसात में श्री राधा कृष्ण भीगे तभी श्री श्यामा जू श्यामसुंदर के उर में छुप्प गयीं, और श्याम सुन्दर श्यामा जू के, अर्थ...
भक्ति एक ऐश्वर्य अरु एक माधुर्य कहाय
दो प्रकार की भक्ति होती है—एक ऐश्वर्य से युक्त और एक माधुर्य-प्रेमरस से युक्त। ब्रज के रसिकों को ऐश्वर्य-भक्ति नहीं सुहाती, उन्हें केवल माधुर्य-रस भक्...
युगल माधुरी ध्यान धरू उर। गाओ नाम रहु वृंदावन
"युगल माधुरी ध्यान धरू उर। गाओ नाम रहु वृंदावन। श्यामा श्याम शरण गहू रे मन। " - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी अरे मन युगल माधुरी अर...
डरत कृपालु जासु डर गिरिधर, सो हमार रखवार। हमारी अलबेली सरकार
“डरत कृपालु जासु डर गिरिधर, सो हमार रखवार। हमारी अलबेली सरकार.” - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज साक्षात डर भी जिससे कांपता है वही श्री कृष्ण जिनके...
अरे मन चार दिना की बात
अरे मन! यह केवल कुछ दिनों की बात है इस शुभ अवसर को खोने पर, मानव जीवन का उचित उपयोग नहीं कर पाने का पश्चाताप करेगा , यह अवसर चूक गया तो 84 लाख योनियो...
जय हो जय हो अलबेली सरकार बलिहार बलिहार
तेरी महिमा अपरंपार बलिहार बलिहार। आपकी महिमा अपरंपार है, आपकी बलिहार है, बलिहार है। तेरी ब्रम्ह करे जयकार बलिहार बलिहार। परम ब्रम्ह भी आपकी जय जयकार ...
कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी
कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी। तेरा मन है कृपा का प्यारी , तेरा तन है कृपा का प्यारी। तेरी कृपा तो कृपा है प्यारी, तेरा कोप भी कृपा है...
"बड़भागी 'कृपालु' जिन छिन छिन, जोरी युगल निहार"
"बड़भागी 'कृपालु' जिन छिन छिन, जोरी युगल निहार" - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज सबसे भाग्यशाली वह हैं जो दिव्य युगल सरकार की दुर्लभ दृष्टि से पाए हु...
" ब्रज है कमल जैसा गोविन्द राधे, वृन्दावन मकरंद जैसा बता दे | "
" ब्रज है कमल जैसा गोविन्द राधे, वृन्दावन मकरंद जैसा बता दे । " - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत (5912) यदि ब्रज कमल के समान है तो ...
युगल माधुरी ध्यान धरे उर, गाउ नाम रहु वृन्दावन | श्यामा श्याम शरण गहु रे मन ||
अरे मन, युगल सरकार श्री राधा कृष्ण की रूप माधुरी का ध्यान कर, नाम गायन कर, और वृन्दावन धाम में रह । श्री श्यामा श्याम के चरणों की शरण ग्रहण कर ।
राधा रानी ठकुरानी गोविन्द राधे
श्री राधारानी श्री कृष्ण कि ठकुरानी हैं, एवं दिव्य प्रेम रस एवं सुख का दान करने वाली दाता है, ऐसा रसिक कहते हैं ।
है चाह" कृपालु" मेरी, तेरी ही कहलाये
"है चाह" कृपालु" मेरी, तेरी ही कहलाये, भूले भटके कबहुँ, तव सेवा मिल जाये ।" - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी हे श्री राधा, मेरी यह...
तदापि रसिक जानकाही ना मानता
"तदपि रसिक जन कही न मानत, रहत विषय को चेरो री किशोरी राधे । हमरी ओर टुक हेरो री किशोरी राधे । । " - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा ...
सबई सरस रस द्वारिका
द्वारिका, मथुरा और ब्रज—इन तीनों ही धामों का रस अत्यंत सरस है। किंतु यदि तुलना की जाए, तो द्वारिका का रस मधुर है और मथुरा का मधुरतर (उससे अधिक मीठा),...
जयती जय, जय श्री गुरु महाराज
"जयती जय, जय श्री गुरु महाराज । छक्के युगल रस, रास सरस जनु, मूर्तिमान रस राज । " - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज श्री गुरुदेव की बलिहारी है जो य...
वेदों के ज्ञानी व्यक्ति अज्ञानी हैं यदि वह श्री राधारानी से प्रेम नहीं करते ।
"राधा मेरी ठकुरानी, ज्ञानी, विज्ञानी, अज्ञानी। " - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज वेदों के ज्ञानी व्यक्ति अज्ञानी हैं यदि वह श्री राधारानी से प्रेम...
राधा मेरी गति मति
राधा मेरी गति मति राधा पद मेरी रति। श्री राधा ही मेरे जीवन की अंतिम गति है। मेरा प्रेम केवल श्री राधा रानी के चरण कमलों तक ही सीमित है। राधा पति मेरी...
बलि जाउँ लाड़ली लाल की
मैं राधा – कृष्ण पर बार – बार बलि - बलि जाता हूँ । राधाकृष्ण परस्पर गले में हाथ डाले हुए तमाल लता की कुंजों में विहार कर रहे हैं, इधर तो कीर्ति – कुमा...
बताओ राधे ! जाऊँ काके द्वार
बताओ राधे ! जाऊँ काके द्वार ?। साधनहीन दीन अपनावत, ऐसो कौन उदार । ( प्रेम रस मदिरा दैन्य – माधुरी ) जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज हे मोहन मोहिनी राध...
मोहिं स्वामिनि! अपनी मान रे
हे किशोरी जी! मुझे अपनी दासी बना लीजिए। हम केवल तुम्हारे चरण–कमलों का ध्यान करते हैं एवं तुम्हारे ही गुणों को गाते हैं। [1] हम भुक्ति मुक्ति आदि कुछ ...
हमारी अलबेली सरकार
हमारी स्वामिनी रसिकता की सीमा स्वरूपिणी हैं। वे रसिकों को सुख देने वाली, रिझाने वाली तथा समस्त गुणों की खान हैं। इनके दरबार में वेद के विधि निषेध की म...
तेरे हैं अनन्त पाप
भावार्थ - हे जीव ! अनादिकाल से अनन्तानन्त पाप करने के कारण तेरा मन अत्यंत मलिन हो चुका है अतएव (साधना द्वारा अंतःकरण शुद्धि की मात्रानुसार) श्री राधा ...
धन्य धन्य ब्रजधाम गोविंद राधे
ब्रज धाम धन्य धन्य है। समस्त ब्रजवासी नित्य केवल "राधे राधे" ही बोलते हैं।
रसिकन की गति रसिकन जाने | कह कृपालु यह दिव्य विषय किमी
रसिक संत की गति केवल रसिक ही जानते हैं। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं कि रसिक संतों की बातें, आचरण दिव्य होते हैं, साधारण जीव जो विषय भोग कर...
कृष्ण तो हैं प्यारे प्यारे
श्री कृष्ण अत्यंत प्यारे हैं और श्री राधारानी उनसे भी अधिक प्यारी हैं।
राधा तत्व जाने बिनु गोविन्द राधे
जो श्री राधातत्व को जाने बिना श्री कृष्ण की ही केवल भक्ति करता है, उसके समान मूर्ख इस विश्व में केवल वही है ।
वृन्दावन धाम का तो गोविन्द राधे
" वृन्दावन धाम का तो गोविन्द राधे, चराचर प्रेम में ही मग्न है बतादे । " - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5932) श्री वृन्दावन धाम ...
प्रेम निष्काम जाको गोविन्द राधे
जिसका प्रेम निष्काम है प्रिया जी के चरणों में, वही ब्रज धाम में किशोरीजी की दासी बनता है ।
हमारी अलबेली सरकार
हमारी स्वामिनी, अलबेली सरकार, श्री राधारानी दिव्य प्रेम-आनंद की अंतिम सीमा है। रसिकों के लिए आनंद का एक स्रोत, वह सभी महान गुणों का भंडार है और जिनसे ...
धरो मन ! युगल माधुरी ध्यान
अरे मन ! तू प्रिया-प्रियतम की रूपमाधुरी का निरंतर ही ध्यान किया कर । रसिकों के सिद्धांत के अनुसार लीला-विलास के क्षेत्र में श्यामसुन्दर दास हैं, तथा न...
नित्य विहार करति वृन्दावन, कुंजनि प्रेम अगाधा।
नित्य विहार करति वृन्दावन, कुंजनि प्रेम अगाधा। किमी 'कृपालु' तहँ रहि सकत सपनेहुँ , भुक्ति मुक्ति दोई बाधा। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम र...
गौर रूप रस ऐसा गोविन्द राधे
गौर रूप रस ऐसा गोविन्द राधे, श्याम रूप रस को भी बौना बना दे। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (6150) गौररुपी श्री राधारानी का रस ऐ...
भोरे बनि जाओ क्योंकि भोरी भारी श्यामा
भोली भाली श्री राधारानी को रिझाना चाहते हो तो तुम्हे भी अत्यंत भोला बनना पड़ेगा, क्यूंकि भोली भाली राधा भोले हृदय में ही निवास करती हैं।
तेरी मेहरबानी का है बोझ इतना कि मैं तो उठाने के क़ाबिल नहीं हूँ
मैं आ तो गया हूँ ,मगर जानता हूँ कि तेरे दर पे आने के क़ाबिल नहीं हूँ॥ मैं पूर्ण रूप से यह जानकर आपके पास आया हूं कि मैं आपके पास आने के योग्य नहीं हूँ...
शब्द, रस, रूप, रस, गंध मन काम
अपने मन से कहो तू शब्द, रस, रूप, रस, गंध ही तो चाहता है, चल श्री राधा के निकट चल वहां तुझे दिव्य शब्द, रस, रूप, रस, गंध प्राप्त होगा।
और द्वार जाओ ना, अनन्य बनो बामा
जीव को अनन्य आश्रय एकमात्र श्रीराधा काही ग्रहण करना चाहिये। द्वार द्वार भटकने से क्या लाभ? जीव के त्रिगुण (सतोगुण, रजोगुण व तमोगुण) त्रिताप (दैहिक,दैव...
डरावे हरिहूँ को भौंह तानी
डरावे हरिहूँ को भौंह तानी, कृपा ते रसिकन अब मैं जानी। कृपालु नहिं कोउ जस राधारानी। 'कृपालु' की भी सुधि लो राधारानी। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज...
प्रिया पग चिन्हों पै गोविन्द राधे
प्रिया पग चिन्हों पै गोविन्द राधे, पिय का निछावर प्राण बता दे। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (6131) श्री प्रिया जू के चरण चिन्ह...
राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे
राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे, राधे बल हरि को भी अंगूठा दिखा दे। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविंद गीत श्री राधे नाम लेने वाला (श्री राध...
ब्रजरसरसिक तो गोविंद राधे
ब्रज रस के रसिक, द्वारिका के रस को भी ब्रजरस के सामने फीका बताते हैं।
कब झूमत वृन्दावन कुंजानी
" कब झूमत वृन्दावन कुंजनी, फिरउँ हिये हुलसाई ।" - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज ऐसा कब होगा कि मैं प्रेम रस में विभोर ब्रज की कुंजों में विहरण करूँ...
श्री राधे बरसाने वारी, नँदनंदन सुखघन बनवारी
बरसाने वाली श्री राधा की जय, सुखघन नंदनंदन बनवारी की जय। जब श्री कृष्ण को महारास करने की इच्छा हुई, तब उन्होंने अपना मुकुट उतार कर श्री राधा के चरणों ...
सब ज्ञान भूल जावो गोविंद राधे
उन सभी ज्ञान के विषय में भूल जाइए जिन्हें आपने प्राप्त किया है और श्री हरि के लिए आँसू बहाइए। इन्ही आँसूओं पर श्री हरि रीझ कर आपके पास आएँगे।
अनूपम, जोरी श्यामा श्याम
श्यामा – श्याम की युगल जोड़ी सर्वथा अनुपमेय है । किशोरी जी ने अपना सोलह श्रृंगार कर रखा है एवं श्यामसुन्दर ने नटवर भेष बना रखा है । दोनों ही गलबाहीं दि...
मन ! मैं को मत छोड़ तू
हे मन! तू “मैं” को मत छोड़; वरन् “मैं” के आगे “दास” जोड़ दे—“मैं दास हूँ।” “मेरा” भी मत छोड़; वरन् “मेरा” के आगे रसिक-शेखर श्रीकृष्ण जोड़ दे—“मेरे स्व...
धरो मन ! युगल माधुरी ध्यान
अरे मन ! तू प्रिया-प्रियतम की रूपमाधुरी का निरंतर ही ध्यान किया कर । श्यामसुन्दर को मोहित करने वाली किशोरी जी एवं किशोरी जी को मोहित करने वाले श्यामसु...
नाम पतित पावन सुनि
मैंने “पतित-पावन” नाम सुनकर ही निर्भयतापूर्वक दिन-रात धुआँधार, बिना सोचे-विचारे, पाप किए। किंतु इसमें मेरा क्या दोष है? दोष तो आपके नाम का ही है।
प्रेम-रस-बोरी भानुदुलार
भावार्थ :-- हमारी किशोरी जी प्रेम-रस में सराबोर हैं। जड़े हुए रत्नों से युक्त सिंहासन पर सुशोभित हैं एवं उनकी रूप-माधुरी को देखकर मूर्तिमान श्रृंगार भी...
वृन्दावन धाम भी है गोविंद राधे
वृन्दावन धाम भी श्री कृष्ण के समान ही दिव्य एवं चिन्मय है। वृन्दावन धाम एवं श्री कृष्ण में भेद है ही नहीं।
राधा जैसी राधा हैं गोविंद राधे
श्री राधा रानी जैसी केवल श्री राधा हैं। उनके जैसी कोई और संपूर्ण ब्रह्माण्ड में कहीं नहीं है। श्री राधा सौंदर्य पर कोटि कोटि कामदेव भी न्यौछावर हैं।
मन करू सुमिरन राधा रानी के चरन
मन करु सुमिरन राधे रानी के चरण। हे मन, श्री राधारानी के चरण कमलों का स्मरण कर। राधे रानी के चरण, नव पल्लव बरन। श्री राधारानी के चरण कमल नये पल्लव की...
साँचो दास न कबहुँ चह
सच्चा दास केवल युगल-सरकार की सेवा ही चाहता है और उनके सुख में ही सुखी रहता है तथा पाँचों प्रकार की मुक्तियों को स्वप्न में भी नहीं चाहता।
राधा तेरे उर में हैं गोविंद राधे
हे मन, श्री राधारानी तेरे हृदय में ही है, तू उनकी पतंग बन जा और डोरी श्री राधारानी को थमा दे, अर्थात श्री राधारानी के पूर्ण शरणागत हो जा।
सब साधन सम्पन्न कहँ
संसारी लोग उसी से प्रेम करते हैं, जिसके पास सांसारिक वैभव होता है; किन्तु श्यामसुन्दर तो अकिंचन जनों से ही प्रेम करते हैं।
जर लता पता तत्वज्ञानी, बोलत राधे राधे बानी
जर लता पता तत्वज्ञानी, बोलत राधे राधे बानी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ब्रज में श्री राधारानी का ऐसा प्रभाव है कि यहां तक कि जड़, लताएँ, पत्ते इत...
प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी
वृषभानु दुलारी श्री प्रिया जू, जो भोरी हैं, प्यारी हैं, बरसाने वाली हैं, उनकी जय हो, जय हो, जय हो। [1] श्री प्यारी जू आगे-आगे चल रहीं हैं, पीछे सखियाँ...
ह्म लोक पर्यंत सुख
ब्रह्मलोक पर्यन्त के सुखों की कामना तथा पाँचों मुक्तियों की अभिलाषा का त्याग करके ही विशुद्ध भक्ति-सरिता में अवगाहन करना चाहिए; अन्यथा प्रेम के उज्ज्व...
बार बार चारों धाम वारों ब्रजधामा
बार बार चारों धाम को ब्रज धाम पर वारों जहां श्री राधा कृष्ण नित्य विहार रस बरसाते हैं।
केलि निकुंज की हैं गोविंद राधे
श्री राधारानी केली निकुंज की भूषण मणि हैं।
किशोरी तोरे, चरनन की बलि जाऊँ
भावार्थ - हे किशोरी जी ! मैं तुम्हारे चरणों की बलैया लेता हूँ । इन चरणकमलों की लालिमा की उपमा ढूँढकर थक गया, कहीं नहीं पाता । इन्द्र वधूटी ( एक लाल रं...
हमारी स्वामिनी राधे रानी
हमारी स्वामिनी वृषभानु नंदिनी श्री राधारानी हैं। [1] जो अत्यंत भोली-भाली सरलहृदया एवं प्रेमसुख की खान हैं। उनका नित्य निवास-धाम श्री बरसाना है, एवं उन...
राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे
श्री राधा नाम रस का ऐसा प्रभाव है की नीरस ब्रह्म भी इस नाम का श्रवण करने से रसिक बन जाते हैं।
अब तो कृपा करो श्री राधे!
अब तो कृपा करो श्री राधे! तुम्हरे द्वार परो श्री राधे! हे श्री राधे, मैं आपके द्वार पर पड़ा हूँ, अब तो कृपा कीजिये। जात त्रिताप जरो श्री राधे! अवगुन च...
राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे
श्री राधा नाम रस ऐसा है, जैसा रस न कभी था, ना है और ना ही आगे कभी होगा।
स्वामिनी का नाम आगे गोविंद राधे
सबसे पहले हमारी एकमात्र प्रिय स्वामीनी श्री राधा के नाम का उच्चारण करें, आप श्याम (श्री कृष्ण) के नाम का उच्चारण राधा नाम के पीछे कर सकते हैं।
प्रेम रस रूप अगाधा राधा
श्री किशोरी जी प्रेम–रस एवं रूप की अनंत राशि हैं। उनकी जो उपासना करता है वह सहज ही दिव्य रास–रस प्राप्त करता है। [1] इतना ही नहीं, वह किशोरी जी की सहच...
राधे राधे बोल मन गोविंद राधे
हे मन, नित्य राधे राधे रटन करो। इसका मुल्य मत पूछो, बस इस पर अपना जीवन न्योछावर कर दो।
श्री राधे हमारी सरकार फिकिर मोहे काहे की
जब श्री राधा रानी हमारी गुरु और स्वामिनी हैं, तो हमें किस बात का भय? हमें चिंता क्यों करनी चाहिए?
कान्हा की जादू भरी मुसकान
श्याम सुंदर की मुस्कान इतनी जादुई है कि जो भी देखता है, वह लोक, वेद, कुल सब कुछ भूल जाता है और उन्ही का गुणगान करता है।
प्रेम देखना जो चाहो चलो ब्रज धामा
यदि आप यह देखना चाहते हैं कि निःस्वार्थ एवं निष्काम प्रेम क्या है, तो ब्रज में जाकर गोपियों को देखें। वे निस्वार्थ प्रेम की अवतार हैं। वे अपना सुख श्य...
प्रेम रस रूप अगाधा राधा
श्री किशोरी जी प्रेम – रस एवं रूप की अनंत राशि हैं । उनकी जो उपासना करता है वह सहज ही दिव्य रास – रस प्राप्त करता है । [1] इतना ही नहीं, वह किशोरी जी...
राधा जैसी राधा हैं गोविंद राधे
श्री राधा रानी जैसी केवल श्री राधा हैं। उनके जैसी कोई और संपूर्ण ब्रह्माण्ड में कहीं नहीं है। श्री राधा सौंदर्य पर कोटि कोटि कामदेव भी न्यौछावर हैं।
राधा नाम महिमा
Radhe radhe bola mana! Govind radhe, Radhe naam suni yama, sheesh jhuka de. The one, who chants the name of Shri Radha, makes even the god of death bo...
वेदों के ज्ञानी व्यक्ति अज्ञानी हैं यदि वह श्री राधारानी से प्रेम नहीं करते ।
वेदों के ज्ञानी व्यक्ति अज्ञानी हैं यदि वह श्री राधारानी से प्रेम नहीं करते ।
प्रेम के अधीन रहें श्याम अरु श्यामा
भले ही वेदों में राधा कृष्ण को पूरी तरह से स्वतंत्र बताया गया है, फिर भी वे अपने भक्तों के प्रेम से बंधे हुए हैं।
ब्रज बामा जब सेवा करें श्याम श्यामा
जब भी ब्रज गोपियाँ श्यामा श्याम की सेवा करती हैं, तो वे अपने दिव्य प्रेम परमानंद (सत्विका भाव) की अपनी गतिविधियों को छिपाने और दबाने का हर संभव प्रयास...
राधा रानी ठकुरानी गोविन्द राधे
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत (6414) श्री राधारानी श्री कृष्ण कि ठकुरानी हैं, एवं दिव्य प्रेम रस एवं सुख का दान करने वाली दाता है...
तो को का पतो नाँय गोविन्द राधे, वृन्दावन राधारानी का है बतादे
क्या आपको पता नहीं हैं कि वृन्दावन धाम एक मात्र श्री राधारानी का है। श्री वृन्दावन धाम की रानी एक मात्र श्री राधारानी ही हैं।
बसे रे मेरे, नैनन दोउ सरकार
भावार्थ – मेरी आँखों में युगल – सरकार बस गये हैं। परस्पर गलबाहीं दिये हुए प्रेम रस सराबोर छवि एवं श्रृंगार की भी छवि को चुरा रहे हैं। मधुर मुरली की सु...
दसहुँ दिशा में गोविन्द राधे
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत (6114) मैं समस्त दिशाओं में केवल श्री राधा रानी को ही देखता हूं।
सुनो मन! यह अनन्य की रीत
अरे मन अनन्यता की रीति सुन, केवल और केवल श्यामा श्याम और उनके रसिकों को छोड़कर सपने में भी कहीं प्रीती भूल कर भी मत करना।
कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी
तेरा मन है कृपा का प्यारी , तेरा तन है कृपा का प्यारी। तेरी कृपा तो कृपा है प्यारी, तेरा कोप भी कृपा है प्यारी | तेरी कृपा चह बनवारी, तेरी कृपा की है ...
जय जय पिय प्यारी सुकुमारी
All glories to Radhey Shyam. Radha is extremely gentle and personified innocence. While Giridhari Shyam’s walk, thought and even His way of expressing...
हमारी राधे, दीनन की रखवार
हमारी कीर्ति - कुंवरि राधिका दीनों की रक्षा के हेतु सदा कटिबद्ध रहती हैं । [1] दीनों की करुण - पुकार को सुनते ही तत्क्षण ही विह्वल होकर उसके पास आ जा...
श्यामा श्याम में जो गुण सोइ ब्रजधामा
ऐसी निष्ठा से ब्रज धाम वास करो कि जो श्यामा श्याम में गुण एवं शक्तियाँ हैं वह समस्त गुण शक्तियाँ ब्रज धाम में भी हैं।
जुग जुग जिए जोरी कहें ब्रजबामा
जब श्री श्यामा श्याम युगल सरकार गलबाहिं देकर वृंदावन के विभिन्न कुंजों से विचरण करते हैं तब ब्रज सखियाँ भाव विभोर आशीर्वाद देती हैं और कहती हैं: “जुग ...
बार बार आया करो वृन्दावन धामा
बार बार वृंदावन धाम आओ और पूर्णत: विश्वास रखो की श्यामा श्यामा कभी तो वृंदावन धाम में मिलेंगे ही।
निकले सवारी जब संग श्याम श्यामा
जब श्री श्यामा श्याम युगल सरकार की सवारी निकलती है तो ब्रज सखियाँ भाव विभोर होकर बलिहारी बलिहारी कहती हैं।
अरे मन मूरख निपट गवाँर
भावार्थ- अरे मन! तू वास्तव में अत्यन्त ही मूर्ख एवं नासमझ है। [1] तू आप अपना भी नाश कर रहा है, साथ ही मेरा भी नाश कर रहा है। तू इस विषय में थोड़ा सा भ...
हम चाकर प्रीतम प्यारी के
हम अकेले श्री राधा कृष्ण के शाश्वत सेवक हैं। किसी और के बारे में क्या कहना है, हम महाविष्णु और उनकी पत्नी महालक्ष्मी से बहुत दूर रहते हैं। हमेशा श्री ...
हमारी अलबेली सरकार
हमारी स्वामिनी, अलबेली सरकार, श्री राधारानी दिव्य प्रेम-आनंद की अंतिम सीमा है। रसिकों के लिए आनंद का एक स्रोत, वह सभी महान गुणों का भंडार है और जिनसे ...
श्याम गए मथुरा न गइ ब्रज बामा
श्यामसुंदर जब गोपियों से अलग हुए शरीर से तो गोपियाँ उनसे मिलने मथुरा नहीं गयी । उन्होंने केवल श्याम सुन्दर की रूचि में ही अपनी रूचि रखी।
" ब्रज है कमल जैसा गोविन्द राधे, वृन्दावन मकरंद जैसा बता दे | "
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत (5912) यदि ब्रज कमल के समान है तो वृन्दावन मकरंद के समान है |
है चाह" कृपालु" मेरी, तेरी ही कहलाये
हे श्री राधा, मेरी यही इच्छा है कि मैं आपकी ही केवल कहलाऊँ, और भूले भटके देर से ही सही, मुझे आपकी सेवा प्राप्त हो जाए।
तेरे जैसी करुणामयी न कोई श्यामा
हे श्री राधा, आपसे अधिक दया करने वाला एवं करुणामयी न कोई था, है, न होगा, इसीलिए मैं बार-बार आपके निज धाम ब्रज आता हूँ।
केलि निकुंज की हैं गोविंद राधे
श्री राधारानी केली निकुंज की भूषण मणि हैं।
कब झूमत वृन्दावन कुंजानी
ऐसा कब होगा कि मैं प्रेम रस में विभोर ब्रज की कुंजों में विहरण करूँगा।
राधे रानी की चरण, जीवन रसिकन
श्री राधारानी के चरण रसिकों के जीवन प्राण है ।
वृन्दावन रसिक राजधानी
श्री वृंदावन रसिकों की राजधानी है। जगदगुरु श्री कृपालु जी कहते हैं कि यह कहना पर्याप्त है कि श्री वृंदावन का महत्व श्यामसुंदर द्वारा कुछ ही हद तक, श्र...
राधे बिनु कल नहीं गोविन्द राधे
श्री राधा रानी के बिना श्री कृष्ण आधे पल के लिए भी जीवित नहीं रह सकते।
रसिकन की गति रसिकन जाने | कह कृपालु यह दिव्य विषय किमी
रसिकन की गति रसिकन जाने | कह कृपालु यह दिव्य विषय किमी, जाने विषय रस साने || - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, रसिया - माधुरी (15) रसि...
हमारी स्वामिनी राधे रानी
हमारी स्वामिनी राधे रानी॥ [1] श्री वृषभानु किशोरी भोरी, सरल प्रेम-सुख-खानी। श्री बरसानो नित्य-धाम अरु, वृन्दावन रजधानी॥ [2] सखिन-जूथ सँग नित प्रति नव-...
प्रेम निष्काम जाको गोविन्द राधे
जिसका प्रेम निष्काम है प्रिया जी के चरणों में, वही ब्रज धाम में किशोरीजी की दासी बनता है |
राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे
श्री राधा नाम रस का ऐसा प्रभाव है की नीरस ब्रह्म भी इस नाम का श्रवण करने से रसिक बन जाते हैं।
प्रेम
भावार्थ :-- हमारी किशोरी जी प्रेम-रस में सराबोर हैं। जड़े हुए रत्नों से युक्त सिंहासन पर सुशोभित हैं एवं उनकी रूप-माधुरी को देखकर मूर्तिमान श्रृंगार भी...
श्यामा श्याम शरण गहु रे मन
अरे मन ! तू राधा-कृष्ण के चरण-कमलों की शरण में जा, तथा राधा-कृष्ण का स्वरूप अपने हृदय में रखकर उनके विविध नाम गुणादिकों को प्रेम-विभोर होकर गाता हुआ न...
श्यामा श्याम पूछें कहा चाहो ब्रज बामा
श्यामा श्याम ने ब्रज सखियों से पूछा कि वे क्या चाहती हैं, सखियाँ बोलीं: आप दोनों नित्य मुस्कुराते रहो एहि हमारी चाह है।
गौर रूप रस ऐसा गोविन्द राधे
गौररुपी श्री राधारानी का रस ऐसा है कि श्याम रुपी श्री कृष्ण का रस भी उसके आगे एकदम फीका है।
राधे राधे रटें श्याम
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं कि श्याम "राधे राधे" रटते है और राधा "श्याम श्याम" रटती हैं परन्तु दिव्य युगल का युगल नाम "राधे श्याम" मेरा जी...
वृन्दावन धाम भी है गोविंद राधे
वृन्दावन धाम भी श्री कृष्ण के समान ही दिव्य एवं चिन्मय है। वृन्दावन धाम एवं श्री कृष्ण में भेद है ही नहीं।
माया की कौन कहे, मायापति घबराये
माया के बारे में क्या कहना है, यहां तक कि माया के शासक (श्री कृष्ण) भी उनसे डरते हैं जो श्री राधा के चरणों में आश्रय लेते हैं।
नर चहे स्वर्ग सुख, गोविंद राधे
इंसान स्वर्ग का सुख पाना चाहता है , लेकिन स्वर्गीय देवता भक्ति का आनंद रस प्राप्त करने के लिए मानव रूप प्राप्त करना चाहते हैं।
प्रियतम सोचें मन गोविन्द राधे, जहाँ भी प्यारी पग धरें बता दे।
प्रियतम श्री कृष्ण मन में यह सोचते हैं कि ऐसा मेरा कब भाग्य होगा कि जहाँ जहाँ प्यारी राधा चलें वहां कि भूमि ही मैं बन जाऊं ।
अरे मन चार दिना की बात
अरे मन! यह केवल कुछ दिनों की बात है इस शुभ अवसर को खोने पर, मानव जीवन का उचित उपयोग नहीं कर पाने का पश्चाताप करेगा , यह अवसर चूक गया तो 84 लाख योनियो...
नित्य विहार करति वृन्दावन, कुंजनि प्रेम अगाधा।
वृन्दावनेश्वरी श्री राधा (मानो प्रेम की अगाध समुद्र), जो वृन्दावन धाम में नित्य विहार करती हैं एवं अपने जन को नित्य विहार रस देती हैं , उनका कृपा पात्...
रुक्मणी तो हैं दासी गोविन्द राधे
रुक्मणी तो हैं दासी गोविन्द राधे, स्वामिनी हैं श्यामा श्री कृष्ण की बता दे || - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत (5992) रुक्मणी (महालक...
श्याम धाम नंदगाम गोविन्द राधे
“ श्याम धाम नंदगाम गोविन्द राधे, श्यामा जू को धाम बरसानो बता दे | श्यामा श्याम दोनों का ही गोविन्द राधे, लीला धाम तो है वृन्दावन बता दे || ” - जगद्गुर...
युगल माधुरी ध्यान धरे उर, गाउ नाम रहु वृन्दावन | श्यामा श्याम शरण गहु रे मन ||
अरे मन, युगल सरकार श्री राधा कृष्ण की रूप माधुरी का ध्यान कर, नाम गायन कर, और वृन्दावन धाम में रह | श्री श्यामा श्याम के चरणों की शरण ग्रहण कर |
भरी भरी अंक लतन आनंद जल
वृंदावन के क्रूरों को गले लगाओ, दिव्य निवास और बारिश के मौसम की भारी बारिश के रूप में धीरे-धीरे प्रेम-आनंद के उत्साह से आँसू बहाए। जगद्गुरु श्री कृपाल...
हमारी राधे रानी रस की खानी
हमारी श्री राधा रस की खान हैं। इनकी राजधानी श्री वृंदावन धाम है और वह हर पल वहां उपस्थित हैं।
मन रह वृन्दावन गोविंद राधे
हे श्री राधा गोविंद, मेरा शरीर भले ही चौरासी लाख योनियों में भटकता रहे, परंतु मेरे मन को श्री वृन्दावन धाम का वास दिला दीजिये।
वृन्दावन, रसिकन रजधानी
वृन्दावन, रसिकन रजधानी। [1] जा रजधानी की ठकुरानी, महरानी राधा-रानी। [2] जा रजधानी पनिहारिनि बनि, चारिहुँ मुक्ति भरति पानी। [3] जा रजधानी रज अज याचत, प...
दशहूँ दिशा में मोहिं गोविंद राधे
हे श्री राधा गोविंद, मुझपर ऐसी कृपा कर दीजिये की मैं दसों दिशाओं में जिस ओर भी देखूँ, मुझे केवल आप ही दिखाई दें।
रटु निशिदिन राधे नाम रे
भावार्थ - अरे मन ! तू निरन्तर राधे नाम की रटना कर, जिसके नाम को पूर्णकाम श्यामसुन्दर भी रटते हैं, जिसकी अनुपम रूप माधुरी का श्यामसुन्दर निरन्तर ध्यान ...
जिस पै हो राधा कृपा गोविंद राधे
जिस भाग्यशालि पर श्री राधा रानी कृपा कर दें, वही उनकी महिमा को जान सकता है, दूसरा नहीं।
श्याम हुन कबा ब्रज बसिहुं जाए
हे श्याम सुंदर, मुझे ब्रज में शाश्वत निवास के साथ कब आशीर्वाद मिलेगा।
मन रह वृन्दावन गोविंद राधे
हे श्री राधा गोविंद, मेरे शरीर को क्यों न नरक की प्राप्ति करा दो, परंतु मेरे मन को श्री वृन्दावन धाम का वास दिला दो।
माई री मैं तो! आजु परी निधि पाई
अरी माई! मुझे तो आज बिना परिश्रम के ही पड़ा हुआ खजाना मिल गया। जिस निधि को खोजते हुए मुझे अनन्तानन्त जन्म बीत गये फिर भी जो कहीं नहीं प्राप्त हुई, रसिक...
सर्वप्रथम प्राथना है गोविंद राधे
हे श्री राधा गोविंद, मैं सर्वप्रथम आपसे यह प्रार्थना करता हूँ की कृपया अपने प्रेम का थोड़ा सा रस प्रदान कर मुझे उस रस का चस्का (आसक्ति) लगा दीजिये।
हम डरहूँ डर ते ना डरेँ
भावार्थ:- हम साक्षात् भय के भय से भी भयभीत नहीं होते। [1] कोई निन्दा करे चाहे अभिनन्दन करे जिसको जो रुचे, करे। [2] हम तो सदा श्याम रंग में मस्त रहते ह...
कृष्ण तो हैं प्यारे प्यारे
श्री कृष्ण अत्यंत प्यारे हैं और श्री राधारानी उनसे भी अधिक प्यारी हैं ।
वृन्दावन के तो गोविन्द राधे
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविन्द गीत (5931) वृन्दावन के लता, गुल्म एवं तरु सब कृष्ण भक्त हैं।
बलि जाउँ निकुंज लतान की
भावार्थ – मैं विविध प्रकार की लताओं के कुंजों की बार–बार बलैया लेता हूँ | मैं वृक्षों में लिपटी हुई लता एवं लताओं में फूले हुए विविध प्रकार के फूल तथा...
हमारी राधे, निराधार आधार
भावार्थ- हमारी किशोरी जी निरवलम्ब की अवलम्ब हैं | उनकी पतितपावनता की बान इसी से स्पष्ट है कि वे अपने को पतित मानने वाले को ही, दिव्य प्रेमदान प्रदान क...
राधे राधे नाम सुनि गोविंद राधे
जब मृत्यु के देवता यमराज किसी को श्री राधा के नाम का जाप करते हुए सुनते हैं, तो वे उस व्यक्ति के पापों की बही (अच्छे बुरे कर्मों का लेखा जोखा रखने की ...
माधुर्य भाव ही था ब्रज ब्रज बामा
ब्रज की सखियों का श्यामा श्याम के प्रति ब्रज में माधुर्य भाव था, माधुर्य में भी निष्काम भाव था।
वृन्दावन रसिकन राजधानी
श्री राधा वृंदावन की एकमात्र सर्वोच्च रानी है, जो रसिक संतों की राजधानी है।
वृन्दावन धाम का तो गोविन्द राधे
श्री वृन्दावन धाम के चर और अचर जीव तो केवल प्रेम में ही मग्न हैं |
मंजू कुञ्ज पुंज बिच बैठे श्याम श्यामा
श्यामा श्याम ब्रज में सखियों के साथ एक कुञ्ज में विराजमान हैं। सखियों की प्यास श्री श्यामा श्याम को देखकर क्षण क्षण बढ़ती रहती है, उन्हें संतोष नहीं हो...
"सरस सुरति रस सरस सो रति रस
यह मधुर दिव्य प्रेम रस, जो ज्ञानियों की पहुंच से परे है, यह रस वृंदावन में बह रहा है।
श्याम हौं कब ह्वै हौं ब्रज धूरि
O Krishn! When would I become the dust of Braj? When would I, being dust of Braj, cover whole body with a great joy and bliss. I wish to be that dust,...
जब रस की बतियन महँ झगरैं
श्री राधे, मेरी एक इच्छा को पूर्ण करें जब भी आपके और प्रिय श्याम सुंदर के बीच प्रेम से झगड़ा होता हो, तो दिव्य प्रेम और रस में, मैं एक मात्र आपका पक्ष...
राधे कहे श्याम भजो श्याम कहे राधे, मेरी मानो भजो नित तुम श्याम राधे
राधारानी कहती हैं, "श्री कृष्ण की भक्ति करो" और कृष्ण कहते हैं, "श्री राधा की भक्ति करो"। जगद्गुरु श्री कृपालुजी कहते हैं यदि मेरी बात मानो तो तुम दोन...
वृन्दावन धाम भी है गोविन्द राधे
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत - 5917 श्री वृन्दावन धाम भी श्री कृष्ण के समान ही सेव्य एवं वंदनीय है।
जयती जय, जय श्री गुरु महाराज
श्री गुरुदेव की बलिहारी है जो युगल रस नित्य छके हुए हैं, रास रस दाता हैं, और श्री राधा कृष्ण का ही साक्षात रस रूप हैं।
भीजैं दोउ कुंज महँ वृन्दावन धामा
श्री वृन्दावन धाम में एक बार तेज़ बरसात में श्री राधा कृष्ण भीगे तभी श्री श्यामा जू श्यामसुंदर के उर में छुप्प गयीं, और श्याम सुन्दर श्यामा जू के, अर्थ...
दोउ एक हैं “कृपालु”, मन जनि अटके
श्री राधा और कृष्ण दोनों एक ही हैं, केवल रूप अलग है, प्राण एक ही है।
धरो मन ! युगल माधुरी ध्यान
धरो मन ! युगल माधुरी ध्यान, रिझवत नित निकुंज श्यामा कहँ, मरम न सक कोउ जान। यह ‘कृपालु’ रस रसिकहिं जानत, जो नित कर रह पान ।। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी ...
प्रेम रूप रस सिंधु दोउ श्यामा श्याम
श्री राधा कृष्ण प्रेम, सौंदर्य और रस के सागर हैं जिन्हें वे बिना किसी दाम के समस्त प्यासे पिपासु जीवों को पिलाते हैं।
रटो रे मन! छिन छिन राधे नाम
ओह मेरे मन! जीवन के हर एक अनमोल क्षण का उपयोग श्री राधा के नाम को गाकर ही कर । श्री राधा का नाम न केवल ब्रह्मा आदि देवों के द्वारा नित्य लिया जाता हैं...
डरत कृपालु जासु डर गिरिधर, सो हमार रखवार। हमारी अलबेली सरकार
साक्षात डर भी जिससे कांपता है वही श्री कृष्ण जिनके डर से कांपते हैं, वह हमारी अलबेली सरकार श्री राधा हैं।
राधा तत्व जाने बिनु गोविन्द राधे
जो श्री राधातत्व को जाने बिना श्री कृष्ण की ही केवल भक्ति करता है, उसके समान मूर्ख इस विश्व में केवल वही है |
तदापि रसिक जानकाही ना मानता
"तदपि रसिक जन कही न मानत, रहत विषय को चेरो री किशोरी राधे | हमरी ओर टुक हेरो री किशोरी राधे | | " - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, प्रेम रस मदिरा दैन...
कृष्ण कहु पाछे प्रथम कहु राधा
पहले श्री राधा का नाम और फिर श्री कृष्ण का नाम उच्चारण करें। श्री राधा के बिना श्री कृष्ण की पूजा करना एक अपराध है।
श्यामा श्याम सखीजन गोविंद राधे
श्री वृन्दावन धाम राधा कृष्ण और सखियों को अपने प्राणों के समान प्रिय है |
रंगीली राधा रसिकन प्रान
रंगीली राधा रसिकों को प्राण के समान प्रिय हैं। रसमयी किशोरी जी की प्रेम रस से सरोबार भोली सी मुस्कान अत्यन्त ही मधुर है। किशोरी जी की देह का रंग सुवर्...
पुनी प्राण प्यारी आजा
श्री कृपालुजी महाराज कहते है, हे राधे ! आप पुनः कब ब्रज में आकर बृजरस रुपी अमृत बरसाएंगी ?
तेरी कृपा ही ते कोऊ
हे श्री राधे, केवल आपकी कृपा से ही कोई भाग्यशाली जीव आपको जान सकता है एवं आपकी अहैतुकी कृपा से ही कोई जीव आपकी शरण ग्रहण कर पाता है।
मेरे प्राणन प्यारे आजा
हे मेरे प्यारे कृष्ण! हे मेरी आंखों के तारे! कृपया प्रकट हो जाओ। हे नंद के पुत्र! हे बांसुरी धर ! कृपया मेरे पास आ जाओ।
"बड़भागी 'कृपालु' जिन छिन छिन, जोरी युगल निहार"
सबसे भाग्यशाली वह हैं जो दिव्य युगल सरकार की दुर्लभ दृष्टि से पाए हुए हैं ।
नित सेवा मांगूँ श्यामा श्याम तेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं
हे श्री श्यामा श्याम मैं केवल आपकी सेवा मांगती हूँ, न मुझे मुक्ति चाहित न भुक्ति।
राधे राधे गाये जा गोविन्द राधे
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते है, कि बस तुम 'राधे राधे' नाम स्मरण किए जाओ, एक दिन राधे नाम 'श्री राधारानी' को बुला देगा।
किशोरी मोरी अब न लगाओ बार
हे मेरी किशोरीजी अब आप मुझ पर कृपा कीजिये। मैंने रसिकों से सुना है कि आपका ही केवल एक दरबार है जहाँ दीन जन को आदर की दृष्टि से देखा जाता है।
अद्वितीय इक तत्व है राधा तत्व प्रधान
केवल एक सर्वोच्च एवं अद्वितीय तत्त्व है जिसकी कोई समानता ही नहीं—वह हैं श्री राधा। श्रीकृष्ण तो उन्हीं का दूसरा स्वरूप हैं।
जो नहिं जात बुलायेहु
जो सगुण, सविशेष, साकार ब्रह्म—श्री कृष्ण—शुकदेव और सनकादिक परमहंसों की समाधि में अत्यधिक प्रयत्न करने पर भी नहीं पहुँचते, वही ब्रह्म श्री कृष्ण बिना ब...