श्री सरस माधुरी
जीवन चरित
श्री श्री सरस माधुरी वाणी संग्रह
कुंज विहारी हमारो है जीवन
कुंज बिहारी ही मेरे प्राण हैं, और श्री कुंज बिहारीणी ही मेरा सर्वस्व। [1] कुंज बिहारी ही मेरे अनुपम इष्ट हैं, और श्री कुंज बिहारीणी की ही मैं नित्य ...
परम दयाल स्वामिनि मोरी
मेरी स्वामिनी श्री राधा परम दयालु हैं। हे श्री वृषभानु जी के महल की कुल-भूषण, हे कीरति कुंवरि, मैं आपकी शरण में हूँ। [1] हे लाड़िली, मुझपर दया की दृष्...
आनँद सरूप श्रीस्वामिनी सलोनी श्यामा
हे स्वामिनी, हे आनंद स्वरूप सलोनी श्यामा, अपनी करुणा कटाक्ष मुझ पर भी कीजिए। आपके प्रेम की छाया पाकर मेरा जीवन धन्य हो जाए। [1] हे दया की निधान, हे...
रसिकन की रहनी कही, ताकौ धारण धार
रसिकन की रहनी कही, ताकौ धारण धार। ‘सरसमाधुरी’ धाम बस, निरखे नित्य बिहार॥ - श्री सरस माधुरी रसिकों द्वारा बताई गई रहनी को धारण कर वृंदावन में निवास ...
राधेरानी रंगीली सरकार, तुम्हारी महिमा अपार
हे रंगीली सरकार श्री राधा, आपकी महिमा अपार है। [1] हे प्यारी, आप दया की निधान हो, आपके समान कोई नहीं है। हे राधे, मुझे अपने चरणों का प्रेम दान कीजिये...
रट मन राधिका दिन रैन
हे मन, श्री राधा का नाम का नित्य गुणगान कर जिसकी समानता योग, यज्ञ, आचार, जप, तप आदि नहीं कर सकते। [1] सबको सुख देने वाले श्यामसुन्दर नित्य ही अपनी मु...
सखी भाव श्रीराधिका पद पंकज की आस
श्री राधिका की सखी-भावना को हृदय में धारण कर, श्री राधा के चरणकमलों की नित्य आशा रखते हुए तथा सखीभाव से युक्त गुरुदेव की कृपा-दृष्टि प्राप्त करके ही स...
ध्यान सु युगल किशोर को, सब रूपन को भूप
श्री युगल किशोर (राधा कृष्ण) का ध्यान समस्त रूपों का सम्राट है, जिसे रसिक जन नित्य ग्रहण कर इस अद्भुत रस में उन्मत्त रहते हैं।
जोरी गोरी साँवरी, सुंदर ललित ललाम
श्री राधा और कृष्ण की दिव्य युगल जोड़ी, गोरी और साँवरी रंग की अत्यंत सुंदर और मनोहारी है। इसे वृंदावन धाम में विहार करते हुए अपने नेत्रों से भरपूर अवल...
जयति श्रीराधिका, श्यामघन साधिका
श्री श्यामसुंदर को वशीभूत करने वाली, उन नवल गोरी श्री राधा की जय हो, जो साखियों के प्राणों की आधार हैं। [1] नित्य किशोरी श्री राधा की जय हो जो रस की ...
शरणागत वत्सल युगल सुखप्रद दंपति नाम
शरणागतों पर वात्सल्य लुटाने वाले श्रीयुगल सरकार के नाम का स्मरण ही परम सुखदायी है। श्री सरस माधुरी जी की यही अभिलाषा है कि दिव्य दंपति की अलौकिक छवि स...
जय कुँवरि लड़ैती करुणानिधि
करुणा की निधि कुँवरी लड़ैती (श्री राधा) की जय हो ; अलबेली सरकार की जय हो। रस की निधि, गुण की निधि, दया की निधि, अपार कृपा की समुद्र की जय हो। [1] पति...
किशोरी सुन्दरी श्यामा तू ही सरकार मेरी है
हे किशोरी श्री राधा, हे सुंदरी श्यामा, तुम ही एक मात्र मेरी सरकार हो। मुझे अन्य किसी से कोई मतलब नहीं है, केवल एक तुम्हारी ही मुझे आस है। [1] हे छबी...
प्रेम भक्तिवर देहु दयानिधि रखो चरण लारे
हे दयानिधि गुरुदेव! मुझे प्रेमाभक्ति का ऐसा वरदान दीजिए कि आपके चरणों के समीप मेरा वास हो तथा मेरे चित्त में युगल सरकार अनन्य रूप से गलबैंया डाले निवा...
सरसमाधुरी ने कह्यौ, धाम ध्यान सुखकंद
श्री सरस माधुरी जी कहते हैं कि धाम का ध्यान करना सुख का मूल है। जो धाम का ध्यान करता है वह श्री राधा कृष्ण के निज परिकर में स्वतः ही पहुँच जाता है और ...
धर मन राधिका पद ध्यान
अरे मन, श्री राधिका के चरण कमलों का ध्यान कर जिनकी सेवा रसिक चूड़ामणि भगवान श्री कृष्ण भी सदा करते हैं। [1] ऐसे श्री चरण समस्त सुखों की ख़ान हैं जिनक...
पद पंकज की टहल निज
हे श्री श्यामा श्याम, मुझ दीन पर दया करके, अपने श्री चरणों की निज सेवा प्रदान कर, मुझे कुंज महल का नित्य वास प्रदान कर मेरी मनोकामना को पूर्ण कीजिए।
खेल बसंत फाग श्रीदम्पति
नित्य दम्पति श्री श्यामा श्याम प्रेम रंग में भींजे हुए वसंत ऋतु का होली खेल रहे हैं। दोनों अति अनुराग में भरे मदमस्त हैं एवं एक-दूसरे को गलबहियाँ दिए ...
पकरे हैं प्यारी पिया आली आज फाग में
हे सखी, आज वृन्दावन की कुंजों में होली के अवसर पर श्री राधा की सखियों ने श्री श्यामसुंदर को पकड़ लिया। [1] श्री राधा ने श्री कृष्ण को घेर लिया और उनके...
नेति नेति निगमन कह्यौ सो यह नित्य बिहार
इस नित्य विहार रस को वेद भी नेति नेति कह कर हार मान रहे हैं जो वेदों से भी परे है, ऐसे अति अद्भुत रस को केवल युगल सरकार की कृपा से ही प्राप्त किया जा ...
संग सजातिन को करै, देहि बिजाती त्याग
जब जीव मायिक व्यक्तियों के संग का त्याग कर अपने सदा के सजाति (अर्थात् अनन्य रसिकों) का ही केवल संग करता है, तो वह उस अचल दिव्य प्रेम को प्राप्त कर लेत...
हमारे माई श्यामाजू सरदार
हमारी स्वामिनी श्री श्यामा जू ही सबकी सरदार हैं, जिनके गुणों का गान नंदनंदन श्री कृष्ण नित्य प्रति अपनी वंशी से करते हैं। [1] श्री श्यामसुन्दर निकु...
रसना राधे राधे बोल री
अरी रसना “राधे राधे” बोल, जो समस्त शास्त्रों का सार, परम मधुर एवं अनमोल नाम है। [1] “राधा” रटने से समस्त बाधायें स्वतः समाप्त हो जाती हैं, इसकी महिमा...
चेत हेत कर युगल सों सोवत कहा गँवार
अरे मूर्ख! अपना अनमोल समय सोने में व्यर्थ क्यों कर रहा है? जाग, और युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण) के प्रति प्रेम विकसित कर। ऐसा उत्तम अवसर बार-बार नहीं ...
श्री वृंदावन गह्यो आसरो, सब साधन कर हीन निहारो
जो जीव समस्त साधनों का त्याग कर श्री वृंदावन धाम का आश्रय धारण करता है और वृंदावन की ओर निहारता है, वह निश्चित ही श्री प्रिया-प्रियतम की रति उसी प्रका...
सो वह ग्रंथ पुरान सुनों नहिं
वृंदावन के नित्य विहार रस के उपासक को वह ग्रन्थ अथवा पुराण नहीं सुनना चाहिए जिसमें दम्पति श्री श्यामाश्याम के नित्य विहार, श्री वृन्दावन का माहत्म्य ए...
करो भावना सिद्धि अब सेव मानसी रीति
अब अपनी भावना को सिद्ध करो और मानसी सेवा (मन से सेवा) की रीति अपनाओ। श्री राधा-कृष्ण दंपति के कुंजविहार में निष्काम भाव बनाकर प्रेम से उनकी सेवा करो।
सुनि पुकार प्रिया महारानी
मेरी महारानी श्री राधारानी ने मेरी पुकार सुन ली है। इसलिए उन्होंने मुझे अपना मानकर, अपनी राजधानी श्री धाम वृंदावन में बसाया है। [1] वे दीन जनों के दु...
जब लों जीवें जगत में, भाव मानसी राख
जब तक तुम इस संसार में जीवित हो, ‘मानसी भाव’ बनाए रखो अर्थात् मन से प्रेमपूर्ण भावना बनाकर भक्ति करो और मुख से श्री कुंजबिहारिणी राधिका श्याम के नामों...
हमारी हेली स्वामिनी परमदयाल
हमारी स्वामिनी (श्री राधा) परम दयालु हैं। कीर्ति कुमारी अत्यंत कृपालु हैं एवं सदा श्री श्यामसुन्दर को सम्मान देती हैं। [1] भानुनंदिनी श्री राधा ही सद...
बिहारिन बिनती यह सुन लीजिये
हे नित्य बिहारिनी श्री राधा! कृपा कर मेरी इस विनम्र प्रार्थना को सुन लीजिए। मुझ पर ऐसी अनुग्रह दृष्टि कीजिए कि मैं सदा चकोरी बनकर आपके चंद्रमा सदृश आन...
बिहारिन दे वृन्दावन वास
हे बिहारिनी श्री राधे! कृपा करके मुझे श्री वृंदावन धाम का अति दुर्लभ वास प्रदान करें। हे कुंवरि किशोरीजी, हे मेरी प्यारी स्वामिनीजू, हे आनंद की मूर्ति...
लाड़िली ललचत है मन मेरो
हे लाड़िली जी (श्री राधा)! मेरा मन सदैव आपके दर्शन के लिए लालायित रहता है। कृपा करके ऐसा वरदान दें कि मैं नित्य निरंतर बरसाने में वास करूँ और नित्य प्...
गृह बन में जित तित रहो गहो मानसी सेव
चाहे घर में वास करो अथवा वन में, सदा युगल सरकार श्री राधा-कृष्ण की मानसी सेवा में लीन रहो। श्री सरस माधुरी कहते हैं— “अपने हृदय में सुंदर भाव उत्पन्न ...
नाम रूप लीला ललित और जानिए धाम
जो श्री राधा-कृष्ण के नाम, रूप, सुंदर लीलाओं और उनके धाम की सुदृढ़ (अनन्य) उपासना करते हैं, उन्हें ही ‘रसिक’ कहा जाता है। इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण बात...
हमारे आली बरसानो निज ग्राम
हे सखी, श्रीधाम बरसाना हमारा निज गाँव है। हमारी पटरानी का नाम श्री राधिका है, और राजा श्री घनश्याम हैं। [1] ब्रज के चौरासी कोस की कुंजों में उनका ही ...
आशिक होकर इश्क कमावे
जो स्वयं प्रेमी बनकर प्रेम धन कमाता है, ऐसा प्रेमी भक्त ही प्रियतम (श्री कृष्ण) के मन को भाता है। जो लोकाचार और वेदों के बंधनों को त्यागकर, केवल प्रेम...
सुख की दंपति राशिहैं
दिव्य दम्पति श्री राधा-कृष्ण आनंद की अपार निधि हैं, इसलिए उनके प्रति अपना प्रेम सतत बढ़ाते रहो। श्री सरस माधुरी कहते हैं कि निष्काम भाव से उनकी महल-टह...
किशोरी ये अभिलाषा मन में
हे किशोरी जी, मेरे मन में अभिलाषा है कि मैं श्री वृंदावन धाम जैसी रजधानी में आपकी नित्य सेवा करूँ। [1] मैं सदा रसिक संतों के संग, यमुना के तट पर लताओ...
श्री राधाप्यारी सुकुमारी
श्री कृष्ण कहते हैं — हे श्रीराधाप्यारी! हे सुकुमारी! आपकी मनोहर छवि पर मैं न्योछावर जाऊँ। मैं अपने अधरों पर बंसी धारण कर, तुम्हारे ही गुणों का गान कर...
बाँकी रसिक विहारिनि राधे
रसिकों की स्वामिनी, नित्य विहार करने वाली श्री राधा एवं रसिक बिहारी श्रीकृष्ण — दोनों ही बाँके हैं। [1] उनका मुकुट एवं चंद्रिका भी बाँकी (तिरछी) है, ...
लाडिली विनय सुनो सुख रासी
हे लाड़िली! हे सुख-राशि! कृपा कर मेरी विनती स्वीकार कीजिए। आपका मुखचंद्र आनंद का परम स्रोत है, जिसे निहारने के लिए मेरी आँखें चकोर के समान व्याकुल रहत...
बाँकेबिहारी मैं वारी बलिहारी पिय
हे बाँकेबिहारी! मैं आपकी वारी जाऊँ, आप पर बलिहारी हूँ, प्रियतम। केवल आप ही मेरे हित करने वाले हो, कृपा करके मेरी ओर निहारिए। [1] हे कान्हा! मुझे अपनी...
पंच रसन में मुख्य है उत्तम रस श्रृंगार
भक्ति के पाँच मुख्य रसों में 'श्रृंगार रस' ही सर्वोपरि और उत्तम है। साधक को अपने हृदय में सहचरी भाव धारण कर, उन सुकुमार युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण) क...
युगल लगन में मन मगन राखहु आठों याम
आठों याम मन को श्री युगल अनुरक्ति में पूर्णतः मग्न रखो। ‘सरसमाधुरी’ कहते हैं—प्रेमपूर्ण स्मृति के साथ सदा श्यामा-श्याम का सुमिरन करो।
जयति गुन गामिनी रसिक अभिरामिनी
समस्त गुणों की ख़ान, रसिकों के मन को मोहने वाली मनोहारिणी, सर्व शिरोमणि, परम भोली श्री राधा की जय हो। [1] रास रस को बरसाने वाली, वनों में सर्वश्रेष्ठ...
न्यारौ सब ब्रह्मांड ते निज वृंदावन नित्त
हे मित्र, श्री राधा कृष्ण का नित्य धाम श्री वृंदावन समस्त ब्रह्मांड से न्यारा है एवं उनका निज धाम है जो मायाकाल एवं क्लेश आदि से परे है।
रंगमहल राज रहे राधिका विहारी
दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण रंग महल में विराज रहे हैं। वे दोनों हिल मिल कर एक दूसरे से लिपट रहे हैं, हँस खेल रहे हैं, मंद मंद गान कर रहे हैं जिसकी दिव...
लीला नित्य विहारको ब्रह्मादिक ललचात
हे सखी! प्रिया-प्रियतम के नित्य-विहार रस का पान करने के लिए तो साक्षात ब्रह्मादिक भी ललचाते हैं — फिर सुर, नर, मुनि आदि की तो बात ही क्या करें!
जय-जय राधे वृषभानसुता
वृषभानु नंदिनी श्री राधा की जय, श्री कीरति की राजदुलारी की जय। शीश पर चन्द्रिका धारण करनेवाली की जय। नीली साड़ी धारण करनेवाली की जय। [1] नख से शिखा त...
सलोनी लागै बरसाने की भूमि
बरसाने की यह पावन भूमि अत्यंत सलोनी (सुंदर) लगती है। यहाँ पर्वत के शिखर पर लाड़िली जी (श्री राधा) विराजमान हैं और सुंदर लताएँ आनंद में झूम रही हैं। [1...
राधिका कृष्ण कौ नैंन लखों सखी
सखी! श्री राधा-कृष्ण के मनोहर नेत्रों का दर्शन करो और प्रेम से उनके गुणों का गान करो। [1] अपनी जिह्वा को उनके नाम में रमा दो और हृदय में निरंतर उनका...
श्रीश्यामा मानो विनती मोरी
हे श्रीश्यामा! मेरी विनती स्वीकार कीजिए। मैं आपकी निज दासी हूँ, आपके चरणों की उपासिका हूँ। मैं जन्म-जन्म से केवल आपकी ही हूँ। [1] आपकी सखियाँ तो अनेक...
जिन जिन ब्रज रज सों रति ठानी
जिन्होंने ब्रज की रज से प्रेम विकसित किया है, उनकी सब प्रकार से बिगड़ी बन गई है; यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। [1] ऐसे जीवों को ही श्री राधा रानी अ...
रस लोभी दम्पति महा अधिक एक ते एक
यह दिव्य दम्पति (श्री राधा-कृष्ण) रसास्वादन के अत्यंत लोभी हैं, और रस की उस प्यास में दोनों एक-दूसरे से बढ़कर हैं। उनके हृदय का यही एक दृढ़ संकल्प है ...
तिहारो मोहि बल वृषभानु दुलारी
हे वृषभानु-दुलारी श्रीराधा! मुझे तो एकमात्र आपका ही बल है। यद्यपि मैं गुणहीन और पतित हूँ, फिर भी मैं आपकी ही शरण में हूँ। [1] आप अशरण की शरण हैं, अधम...
बनाई बने तुम्हारी बात
हे किशोरी राधे! केवल आपकी कृपा से ही जीव की बिगड़ी बात सुधर सकती है। हे श्री वृषभानु नंदिनी, श्री राधे! आपकी यह कीर्ति समस्त संसार में विख्यात है। [1]...
शरण श्री वृंदावन की जइये
श्री वृंदावन की शरण ग्रहण कीजिए। युगल बिहारी (श्री राधा-कृष्ण) के चरणकमलों से दिन-रात प्रेम कीजिए। [1] सेवाकुंज के समीप बैठकर श्री युगल सरकार का ध्या...
श्रीराधा पद पंकज रज सरबस धन मेरी
श्री राधा जी के चरण कमलों की परम-पावन रज ही मेरा सर्वस्व धन है। मैं मन, वचन और कर्म से केवल अपनी श्री श्यामा महारानी की ही अनन्य दासी हूँ। [1] हे मेर...
Sukh Ki Dampati Rashihain
Sukh Ki Dampati Rashihain, Tinso Prem Badhav. ‘Sarasmadhuri’ Tahal Ko, Nit Prati Rakh Chitchav.- Shri Saras MadhuriThe Divine Couple, Shri Radha ...
Dhyan Dharo Sumiran Karo Shrimat Radhe Shyam
Dhyan Dharo Sumiran Karo, Shrimat Radhe Shyam.Gavo Gun Gan Prem Son, Pal Chhin Aathon Yaam.- Sri Saras MadhuriMeditate on Shri Radha-Krishna; remember...
Panchan Rasan Mein Mukhya Hai
Panchan Rasan Mein Mukhya Hai, Uttam Ras Shringar.Bhav Sahchari Dhaar Ura, Sevo Yug Sukumar.- Sri Saras MadhuriAmong the five primary rasas (devotiona...
Saloni Lage Barasane Ki Bhumi
Saloni Lagai Barasane Ki Bhumi, Giri Ke Shikhara Ladili Rajai, Lata Lalita Rahi Jhumi. [1] Pura Ramanika Subhaga Mahalayata, Rasikana Ki Jaham Dhuma,'...
Leela Nitya Vihar Ko Brahmadik Lalchat
Leela Nitya Vihar Ko, Brahmadik Lalchat.Sur Nar Muni Janki Sakhi, Kaun Chalave Baat.- Shri Saras MadhuriO Sakhī! What to speak of demigods, humans, or...
Jugal Lagan Mein Man Magan Raakhu Aathon Yaam
Jugal Lagan Mein Man Magan Raakhu Aathon Yaam. ‘Saras Madhuri’ Surati Son, Sumirahu Shyama Shyam.- Shri Saras MadhuriKeep your mind absorbed in loving...