Verses & Passages
198 itemsवृंदावन रस मोहि भावे हो
श्री हरिराम व्यास जी (श्री विशाखा अवतार), वृन्दावन रस की महिमा का बखान करते हुए बताते हैं कि मुझे केवल वृन्दावन रस ही सुहाता है। मैं बार बार उन पर बलि...
व्यास विवेकी संत जन
विवेकी भक्त की कहनी और रहनी एक ही होती है; अर्थात् जो वे उपदेश देते हैं, वही स्वयं भी आचरण में लाते हैं। उनकी कहनी और करनी की यह समानता पत्थर की रेखा ...
श्री हरि भक्ति न जानहीं
जिन्होंने श्री हरि-भक्ति के अमूल्य धन को नहीं जाना और माया (संसार तथा संसारी जनों) को ही अपना माना, वे जीवित रहते हुए सदा पापी ही रहते हैं और मृत्यु क...
व्यास भक्ति कौ फल लहयौ
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि श्री हित हरिवंश महाप्रभु के प्रताप से मेरे जीवन की मूल निधि यह वृन्दावन की रज, भक्ति के फलस्वरूप प्राप्त हुई है।
व्यासहि अब जिनि जानियौ
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि अब वे लोक-वेद की मर्यादाओं के दास नहीं रहे, क्योंकि श्री राधावल्लभ लाल उनके हृदय में विराजमान हैं; अन्य सब से वे उदास...
व्यास बड़े हरिके जना
सबसे बड़े वही हैं जो भगवान हरि के भक्त हैं, जिनका एकमात्र आधार स्वयं श्रीहरि हैं। हरि के भक्त नित्य उनके भजन में ही उन्मत्त रहते हैं और उनका प्रेम एक ...
कठिन है रंग महलको रिझाइबौ (औ) सहचरि कहाइबौ
श्री राधा के महल की टहल पाना, एवं सहचरी बनना अत्यंत कठिन है। यह छवि एवं रस तभी फलीभूत होता है जब श्री स्वामिनी (राधारानी) के चरण कमल का मकरंद प्राप्त ...
व्यास न तासु प्रीति करि
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि उस व्यक्ति से प्रीति (प्रेम) न करो जिसे केवल अपनी ही पीड़ा और स्वार्थ की चिंता रहती है। इसके विपरीत, उस करुणामय प्रभ...
धर्म मिट्यौ अब कृपा करि
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि प्रभु की अपार कृपा से अब मेरे हृदय से कर्मकांडीय धर्म का अहंकार मिट गया है और मुझे 'भजन-रस' की वास्तविक रीति प्राप्त ...
राधा वल्लभ मधुर रस
राधा वल्लभ मधुर रस, जाकैं हृदय नहिं व्यास। मानुष देही रतनसी, भली विगारी तास॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (71) जिसके हृदय में श्री राधा-कृष...
मुँह मीठी बातैं कहैं
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि जो लोग मुख से तो मीठी-मीठी बातें करते हैं, किंतु जिनका हृदय अत्यंत कठोर और कपट से भरा है, वे उस चतुर शिरोमणि नन्दनन्...
व्यास सदा हरिजन बड़े
श्री हरिराम व्यास कहते हैं— ‘श्री हरि के भक्त सबसे बड़े हैं, क्योंकि उनका हृदय अत्यन्त गंभीर होता है। वे अपने सुख की कभी इच्छा नहीं करते और सदा दूसरों...
व्यास न कथनी कामकी
कथनी व्यर्थ है, करनी ही सार है। जैसे गधा चन्दन का बोझ तो ढोता है, पर उसके मूल्य को नहीं समझता; वैसे ही भक्ति के बिना पंडित भी व्यर्थ है। केवल शास्त्र ...
व्यास आस हरिवंश की
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि उन्हें तो आशा केवल श्री हित हरिवंश से ही है, और वे उन्हीं पर बलिहारी जाते हैं, जिनके प्रताप से वृंदावन की कुंजों में तथा...
आरती कीजै जुगलकिसोर की
श्री युगल किशोर श्यामा श्याम की आरती कीजिए एवं संध्या, दोपहर एवं भोर में नख से सिख तक अंगों की पुनः पुनः बलैया लीजिए। [1] श्री नागरी नट [श्यामा श्याम...
मान न कीजै मानिनि वरषा ऋतु आई
श्री हरिराम व्यास श्री राधारानी से कहते हैं "हे मानिनी श्री राधा, देखिये वर्षा ऋतू आ गयी है, अब मान का त्याग कीजिये। श्री श्यामसुंदर के अंग से अंग मिल...
श्रीराधा प्यारी के चरनारविंद सीतल सुखदाई
श्री राधा प्यारी के चरणारविंद अत्यंत शीतल हैं। ऐसे श्री चरणों के नख की चाँदनी के समक्ष तो कोटि-कोटि चंद्रमा भी मंद प्रतीत होते हैं। [1] श्री राधा प्य...
(श्री) राधावल्लभ मूल अरु
श्री राधावल्लभ लाल ही सबके मूल (जड़) हैं, और अन्य सब उसी वृक्ष के पुष्प, पत्ते और डालियों के समान हैं। श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि उन्हीं मूल तत्...
ऐसो कब करिहौ मन मेरौ
हे वृंदावन! ऐसा मेरा मन कब करोगे जब में हाथ में करुवा और कन्धे पर कमरिया (छोटा कम्बल) रखकर वृन्दावन की कुंजों के मध्य में बस जाऊँगा। [1] जब मुझे भूख...
व्यास आस इत जगतकी
जो इस संसार की भौतिक तृप्ति की इच्छा रखता है और साथ ही श्रीकृष्ण की भक्ति की कामना भी करता है, वह निर्लज्ज पतित है क्योंकि वह संसार के नश्वर भोग और पर...
व्यास कनक अरु कामिनी
कनक (धन) और कामिनी (सुन्दर स्त्री) की इच्छा से बचना चाहिए और उससे दूर भागना चाहिए, क्योंकि यह इतनी प्रबल है कि निश्चित ही श्री हरि के भजन में विक्षेप ...
व्यास बड़े हरिके जना
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि संसार में वे ही भक्त सबसे महान और श्रेष्ठ हैं, जिनका साक्षात् श्री हरि के साथ संबंध (मित्रता) है। ऐसे महापुरुष अपने प...
तेई रसिक अनन्य जानिवै
श्री हरिराम व्यास कहते हैं "जिनका अंतःकरण विषय-विकार से शून्य हो गया है एवं श्री हरि के प्रेम में डूबा हुआ है, ऐसे साधु जनों को ही रसिक अनन्य मानना चा...
परम धन राधा नाम आधार
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि श्री राधा नाम ही हमारा परम धन है। जिस नाम को श्रीकृष्ण मुरली में गाते हैं और बार-बार सुमिरन करते हैं। [1] यंत्र, मन...
सुभग सुहाग को चिनौं प्यारी तेरे चरननि सोहै
सखी भाव में अवस्थित श्री हरिराम व्यास श्री राधा से कहते हैं "हे प्यारी जू, परम सुभग श्री श्यामसुंदर के सुहाग चिन्ह तो आपके चरणों में शोभायमान है, एवं ...
रूप तेरौरी मोपै बरन्यौं न जाइ
हे राधा प्यारी, आपके इस अद्भुत रूप का वर्णन करने का सामर्थ मेरे में नहीं है। यदि मेरे रोम रोम में कोटि कोटि रसना भी हो तो भी मैं आपके गुणों का बखान नह...
प्यारी श्रीवृंदावन की रैनु
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं "श्री वृन्दावन की रेणु बड़ी प्यारी है, जिसका दर्शन कर श्री कृष्ण सुख पाते हैं और हर्षित हो मधुर वेणु बजाते हैं।" [1] श्र...
ललनकी बतियाँ चोज सनी
श्री लालजी [कृष्ण] श्री राधा से प्रेम भरी बतियाँ कर रहे हैं। परम कृपालु श्री राधिका, करुणामयी दृष्टि से लाल जी की ओर निहार रही हैं। [1] दोनों सुरत रस...
व्यास चंद आकास में, जलमें आभामंद
जिस प्रकार आकाश में स्थित चंद्रमा का जल में प्रतिबिंब देखकर मंद-बुद्धि कमल उसे अपने जैसा समझ बैठता है, उसी प्रकार रसिक संत इस संसार में सामान्य प्रतीत...
हरि हीरा गुरु जौहरी, व्यासहि दियौ बताइ
श्री हरि (परमात्मा) एक अनमोल हीरे के समान हैं और गुरु उस जौहरी की भाँति हैं जो उस रत्न की वास्तविक परख और पहचान कराना जानते हैं। श्री हरिराम व्यास जी ...
नाँचत गोपाल वनैं नटवर वपु काछैं
श्रीकृष्ण कमर में काछिनी बांध कर नटवर का रूप धारण कर नृत्य कर रहे हैं। वह गान कर रहे हैं और श्री राधा के पीछे उनकी तेज गति से मेल खाते हुए नृत्य कर रह...
"अब मैं वृन्दावन रस पायौ, श्री राधा चरन सरन मन, दीनो मोहन लाल रिझायो ||"
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि "अब जाकर मैंने वृन्दावन के विलक्षण रस को प्राप्त किया है। श्री राधारानी की जैसे ही मैंने चरण शरण ग्रहण करी उसी क्षण श्री...
किशोरी मोहि अपनी कर लीजै
हे किशोरी जी! जैसे भी हो, मुझे अपना बना लीजिए; और कुछ दीजिए या न दीजिए, पर वृन्दावन-रज (ब्रजवास) अवश्य प्रदान कीजिए। [1] भले ही वृन्दावन में पक्षी, ...
कनक रतन भूषण वसन, मिथ्या अनत विलास
स्वर्ण, रत्न, आभूषण और बाह्य विलास की सारी कामनाएँ त्यागकर— यदि आवश्यकता पड़े तो अपनी पुत्री को सजाकर हाट में बैठाना पड़े—तथापि श्री वृन्दावन का वास ...
पियकौ नाँचन सिखवत प्यारी
प्यारी श्री राधा अपने प्रियतम श्री कृष्ण को नृत्य करना सिखा रही हैं। श्री वृन्दावन में शरद पूर्णिमा की उज्ज्वल रात्रि में महारास रचा गया है। [1] सखिय...
व्यास बड़े हरिके जना
श्रीहरि के वे अनन्य भक्त ही वास्तव में महान हैं जो अहर्निश उनके पावन यशोगान में मग्न रहते हैं। जिन्होंने तन, मन और वाणी से श्रीहरि के अतिरिक्त अन्य कि...
कहा भयौ वृंदावनहि बसै
श्री धाम वृंदावन में यदि वास भी मिल गया तो ऐसा क्या हो गया क्योंकि जब तक लोभ एवं पाखंड रूपी माया से वे ग्रसित है तब तक उसने घर को त्याग कर भी ऐसा क्या...
राधा-वल्लभ ध्याइ कैं और ध्याइयै कौंन
सब अवतारों के मूल श्री राधावल्लभ जी का ध्यान करने के बाद अब अन्य किसका ध्यान किया जाए? जैसे भोजन में एक साथ नमक डालते हैं, वैसे ही एक-एक 'बरी' (दाल की...
प्यारे वृन्दावन के रूख
वृंदावन के वृक्ष अत्यंत प्यारे हैं जिनको देखकर समस्त कामनाएँ विलीन हो जाती हैं क्योंकि इनके नीचे सदा श्री राधा मोहन विहार करते हैं। [1] यह सदा प्रेम ...
व्यास दीनता के सुखहि
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि परम दीनता (विनम्रता और निरभिमानता) में निहित परम सुख को यह मंदबुद्धि संसार क्या जाने? जब भक्त स्वयं को सर्वथा असमर्थ ...
श्रीराधे जु आसा पुजवौ मेरी
हे श्री राधे जू, तुम्हारी बलिहारी जाऊँ, मेरी इस आशा को पूर्ण करो कि मैं सदा सदा के लिए तुम्हारी दासी बन जाऊँ। [1] मुझे श्री कृष्ण (भगवान) का डर नहीं...
ऐसौ काकौ भाग जु दिन प्रति
वे जन परम सौभाग्यशाली होते हैं जो दिन-रात प्रेमपूर्वक जुगल किशोर श्री श्यामा श्याम की महिमा का गान करते हैं। [1] ऐसे भक्त के चरण कमलों की शरण लेनी चा...
एक पकौरी सब जग छूट्यौ
इस पद में महाप्रसाद की महिमा का वर्णन करते हुए श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि जप, तप, व्रत, संयम आदि सब कुछ करके मैं हार गया, मेरा मन तनिक भी न टूटा...
स्वामिनी प्रगटी सुख भयौ, सुर पुहुपनी वरषाइ
जब स्वामिनी श्री राधा प्रकट हुईं, तब चहुँओर अपार सुख छा गया और और देवताओं ने आकाश से पुष्पों की वर्षा की। श्री हित हरिवंश जी की कृपा के प्रताप ने उसमे...
जम की मार बुरी अहै, छुटै न और उपाइ
यमराज का दण्ड (मृत्यु और नरक का कष्ट) अत्यंत भयानक है, जिससे बचने का संसार में अन्य कोई उपाय नहीं है। यदि कोई जीव दृढ़तापूर्वक श्री हरि की भक्ति को अपन...
स्वान प्रसादहि छ्वै गयौ
यदि प्रसाद को कुत्ता छू ले या कौवा उसे स्पर्श कर जाए, तब भी वह अपवित्र नहीं होता। श्रीमद् भागवत और रसिक महापुरुषों का यही सिद्धांत है कि प्रसाद सदा पा...
पाछैं बैठे मोहन मृगनैंनींकी बैंनी गुहत
श्री कृष्ण श्री राधा के पीछे बैठकर उनकी वेणी गूँथ रहे हैं, इस छवि की शोभा कहते नहीं बनती, जिसे देख मेरी ऑंखें शीतल हो रही हैं। [1] श्री राधा की नख-ज्...
मन बावरे तूँ हरि पद अटक्यौ
अरे मन बाँवरे, तू अब जाके श्री हरि के चरणों में अटका है, इसी वजह से अब तू साँचा सुख प्राप्त कर रहा है। जब तू संसार में था तो इसी आनंद के लिए घर घर भटक...
जाकी है उपासना, ताहीकी वासना
साधक को जिस इष्टदेव (श्री राधा कृष्ण) की उपासना प्राप्त है, उसे केवल उन्हीं को प्राप्त करने की इच्छा बनानी चाहिए। उन्हीं के नाम, रूप, लीला एवं गुणों क...
व्यास नाम सम नाम है
भगवान के नाम के समान उनका नाम ही है, जिसकी कोई समानता नहीं है। यह जग-विख्यात है कि नामी से ही नाम प्रकट होता है, फिर भी नाम नामी से श्रेष्ठ है।
व्यास रसिक सब चलि बसे नीरस रहे कुवंश
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि वास्तविक रसिक (प्रेमी) तो सब चले गए, अब तो केवल नीरस हृदय वाले कुवंश ही बचे हैं मानो निर्मल सरोवर के राजहंस छल-कपट से...
अनन्यनि कौनकी परवाहि
श्री राधा कृष्ण के अनन्य रसिकों को किसी की परवाह नहीं होती। वे तो कंधे पर कंबल एवं हाथ में करुवा लिए, नित्य श्री कुञ्जबिहारी की ही अनन्य आशा बनाये रखत...
नैननि देख्यौ, सोई भावै
मेरे नैनों को वही भाता है जो कपट एवं लोभ का त्याग कर श्री राधा वल्लभ का गुणगान करता है। [1] जो रसिक अनन्यों की मंडली से हो और नित्य प्रति प्रिया प्रि...
नव कुँवर चक्र चूड़ा नृपतिमनि साँवरौ
श्री वृंदावन धाम प्रेम की राजधानी है जहां के राजा नायक शिरोमणि श्री श्याम सुन्दर और रानी तरुणि-मणि श्री राधिका हैं। पाताल से वैकुंठ तक के सब लोकों क...
आसू कौ हरिदास रसिक हरिवंश
अनन्य रसिक संत श्री स्वामी हरिदास जी एवं श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी की कृपा की अभिलाषा है एवं उनके द्वारा दिखाये गए पथ पर ही चलना है क्योंकि मेरे ह्र...
व्यास न कबहूँ उपजि है
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि संतों की कृपा से विषयों के प्रति अनुराग जड़ से समाप्त हो गया है। बिना संत चरण रज पान किए ह्रदय के ताप कभी शांत नहीं होते...
कोटि ब्रह्म ऐश्वर्यता वैभवता की वारि
करोड़ों ब्रह्माओं की ऐश्वर्यता और समस्त वैभव भी जिनके सामने तुच्छ हो जाए, श्री हरिरामव्यास की उन किशोरी श्री राधा को भला अब कौन निहारने में समर्थ है।
(श्री) राधावल्लभकौ हौ भांवतौ चेरौ
मैं श्री राधावल्लभ जी का चहेता दास हूँ। श्री राधावल्लभ का नाम श्रवण एवं उच्चारण करने मात्र से मेरे मन में यम, नियम, आदि नहीं ठहरता। [1] श्री राधावल...
तेई रसिक अनन्य जानिवै
उन्हीं को रसिक-अनन्य जानना चाहिए, जिनके अंदर विषय-विकार नहीं, अपितु श्री हरि से रति है। उन्हें ही साधु मानना चाहिए। [1] ऐसे रसिक अनन्य के संग से पतित...
मन तू वृंदावन के मारग लागि
अरे मन, तू वृंदावन के मार्ग का अनुसरण कर। तेरा यहाँ कोई नहीं है और न ही तू किसी का है; संसारिक मोह-माया को त्याग कर तू भाग चल। [1] सर्प रूपी कलियुग स...
प्यारी लागै श्रीवृन्दावन की धूरि
मुझे श्री वृन्दावन की धूलि (रज) ही प्यारी लगती है। इस वृंदावन धाम की रानी श्री राधा हैं एवं राजा मोहन हैं जिनका राज सदा भरपूर है। [1] यहां की रज का क...
अपनैं-अपनैं मत लगे वादि मचावत सोर
अपने अलग-अलग मतों को लेकर बेकार में ही सब लोग शोर मचा रहे हैं। जैसे-तैसे, सबको किसी न किसी रूप में, उस एक नंदकिशोर (परम भगवान जो सर्वव्यापक है) का ही ...
अनन्य नृपति श्रीस्वामी हरिदास
श्री स्वामी हरिदास जी अनन्य रसिक प्रेमियों में सर्वोच्च सम्राट के समान हैं। वृंदावन के एकांत कुंजों में श्री कुंज बिहारी-बिहारीणी के अतिरिक्त उन्होंने...
लागी रट, राधा श्रीराधा नाम
अब मैंने श्री राधा नाम की रटना लगा दी है। मैंने समस्त वृन्दावन में ढूंढने का प्रयत्न किया परंतु नंद के नटखट दुलारे श्री श्यामसुन्दर कहीं नहीं मिले। [1...
व्यास विदित चतुराइयनि
कुछ कपटी ऐसे होते हैं जो स्वयं तो सदा संसार में आसक्त रहते हैं परंतु दूसरों को संसार से अनासक्त कराने का उपदेश देते रहते हैं। जो स्वयं कभी नाव पर चढ़ा...
जिनके मुख गोपालजी पावन हरि गुन गीत
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि जिनके मुख प्रेमपूर्वक श्री हरि के पावन गुणों का गान करते हैं, उन्हें मेरा युगों-युगों का मित्र मानना।
रसिक अनन्य हमारी जाति
हमारी जाति रसिक अनन्य है। कुल देवी श्री राधा हैं, गांव हमारा बरसाना है और जाति-बिरादरी ब्रज वासियों के साथ है। [1] गोत्र गोपाल हैं, यज्ञोपवति कण्ठीमा...
सेवा हूँ तें दूर कियो विधि निषेध जंजार
स्वामी श्री हरिदास जी ने सेवा में विधि-निषेध के समस्त बंधनों को हटाकर, विशुद्ध प्रेम के सार स्वरूप “नित्य विहार” रस का गान किया है।
सुभग गोरी के गोरे पाँइ
गौरवर्ण वाली श्री राधिका के गोरे चरणारविंद की शोभा अत्यंत सुंदर है, जिन्हें स्वयं श्यामसुंदर प्रेम-विवशता से अपने करकमलों में धारण करते हैं और अपने क...
व्यास पराई कामिनी कारी नागिन जानि
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि पराई स्त्री को काली नागिन के समान मानना चाहिए। यदि किसी ने कामुक दृष्टि से उन्हें भोगने की कामना की, तो सम्पूर्ण जीवन...
श्री राधावल्लभ परम धन
श्री राधावल्लभ ही परम धन हैं, और व्यासजी ने हर्षित होकर इस अमूल्य संपदा को लूटा है। यह ऐसा दिव्य खजाना है कि चाहे जितना निरंतर निकालो, इसका भंडार सदा ...
चलि चलिहि वृंदावन वसंत आयौ
आओ, चलें! वसंत का वृंदावन में आगमन हो गया है। खिलते हुए फूलों के गुच्छे लहरा रहे हैं, और मंद समीर उनकी मधुर सुगंध दूर-दूर तक बिखेर रही है। [1] भँवरे,...
हरि हीरा गुरु जौहरी व्यासहि दियो बताइ
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि हरि दिव्य हीरे के समान हैं, और गुरु उस हीरे को तराशने वाले कुशल जौहरी के समान हैं। भगवन्नाम लेने से तन और मन दोनों मे...
श्रीराधावल्लभ की नव-कीरति
युगल राधावल्लभ का नित्य नवीन यश वाणी से परे है। भारत के श्रेष्ठ कविगण भी, जिनके रस का वर्णन करते हुए अघाते नहीं हैं। [1] रसिक जयदेव ने जब इन लीला प...
व्यास राधिका-रवन बिनु
श्री राधिका रमण युगल सरकार, जो सबके मूल स्रोत हैं, उनके बिना मुझे कहीं भी सच्चा आनंद प्राप्त नहीं हुआ। संसार की प्रत्येक डाल-डाल पर भटकते-भटकते मैं उल...
मन रति वृंदावन सौ कीजै
हे मन, श्री वृन्दावन से प्रेम कर — तू अब तक केवल इंद्रिय-सुखों में पशुवत जीवन जीता रहा है, अब जीवन के परम उद्देश्य को प्राप्त कर। [1] सत्य और असत्य...
व्यासहि बॉमन जिनि गनौं हरिभक्तन कौ दास
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं “मुझे ब्राह्मण मत गिनो, मैं तो हरिभक्तों का दास हूँ”। श्रीराधावल्लभ लाल जी के प्रेम में, संसार के समस्त ताने और उपहास को...
श्रीराधावल्लभ तुम मेरे हित
हे श्रीराधावल्लभ! आप ही मेरे सच्चे हितैषी हैं। संसार के समस्त रिश्ते केवल तब तक ही साथ देते हैं जब तक उनका स्वयं का कोई स्वार्थ जुड़ा हो। [1] इस जगत...
अनन्य व्रत खाँडेकीसी धार
अनन्य-भक्ति का व्रत तलवार की धार के समान सूक्ष्म और कठिन है। यदि मन इधर-उधर डगमगाकर संसार के मोहों में फिसल जाता है, तो फिर यद्यपि हरि जगत के हितैषी ह...
व्यास कुलीननि कोटि मिलि पंडित लाख पचीस
यदि करोड़ों उच्च कुलीन जन और लाखों-पचीस विद्वान पंडित भी एकत्र हो जाएँ, तो उन सभी के शीश एकत्र होकर भी उस वृंदावन के स्वपच की चरण-रज की बराबरी नहीं कर...
झूलत फूलत कुंजविहारी
निकुंज में कुंजविहारी झूला झूल रहे हैं एवं प्रफुल्लित हो रहे हैं, और दूसरी ओर किशोरवल्लभा, वृषभानु की दुलारी, श्री राधा महारानी विराजमान हैं। [1] वे ...
नर देही द्वारौ खुल्यौ हरि पावन की घात
मानव देह रूपी दुर्लभ अवसर भगवान हरि की प्राप्ति तथा जन्म–मृत्यु के चक्र से सदा के लिए मुक्त होने का खुला हुआ द्वार है। श्री हरिराम व्यास जी सचेत करते ...
गावत प्यारौ राधा तेरौ जसु
इस पद में श्रीकृष्ण की विरह-अवस्था का वर्णन है। सखी-भावापन्न हरिराम व्यास श्रीराधा से प्रार्थना कर रहे हैं— हे श्रीराधे! तुम्हारे प्रियतम श्रीकृष्ण नि...
व्यास बढाई और की
भक्तकवि श्रीहरिराम व्यासजी कहते हैं कि संसारी (विषयी) जनों द्वारा की गई स्तुति अथवा प्रशंसा सर्वथा तिरस्कार के योग्य है। मेरे लिए तो रसिक संतों द्वार...
व्यास स्वामिनी रास मंडल में
वृंदावन में रास मंडल में श्री राधारानी, श्री कृष्ण को चुटकी पर नाच नचाती हैं। मैं इस वृन्दावन की दिव्य निधि एवं धन पर बार बार बलिहार जाता हूँ।
दुविधा तब जैहै या मनकी
मेरे मन की दुविधा तभी जाएगी जब मैं निर्भय होकर के इस वृंदावन रज का सेवन करूंगा। [1] एक कंबल और एक करुवा हाथ में लेकर, शीतल कुंजों की छाया में, दिव्य ...
तजि के रसिक अनन्यता
परम रसिक श्री हरिराम व्यासजी का मत है कि जब कोई साधक रसिकों द्वारा निरूपित श्रीराधारानी की उस मधुर अनन्य भक्ति का परित्याग कर, केवल शास्त्रोक्त विधि-...
व्यास न व्यापक देखिये निर्गुण परै न जानि
श्री हरिराम व्यासजी कहते हैं कि वह परब्रह्म सर्वव्यापक होने के कारण इन चर्म चक्षुओं से दिखाई नहीं देता और निर्गुण होने के कारण बुद्धि की पहुँच से परे ...
व्यास मिठाई विप्र की
अनन्य रसिक श्री हरिराम व्यास जी वृन्दावन अथवा वृन्दावन के वासियों की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यदि किसी कर्मकांडी विद्वान (विप्र) अथवा वृन्द...
साधुन की सेवा कियैं
साधुओं और संतों की सेवा करने से ही श्री हरि को परम संतोष प्राप्त होता है। इसके विपरीत, जो लोग संतों से विमुख होकर केवल हरि का भजन करना चाहते हैं, श्री...
स्यामा स्याम वलैया लैहौं
श्री हरिराम व्यास कह रहे हैं की स्वयं को न्यौछावर करते हुए श्री वृन्दावन धाम का वास करुँगा। [1] परम पवित्र श्रीयमुना जी में स्नान करुँगा और ब्रजवासीयो...
व्यास कनक अरु कामिनी
श्री हरिराम व्यास जी सचेत करते हुए कहते हैं कि कंचन (धन-संपत्ति) और कामिनी (स्त्री) ये दोनों अत्यंत पैनी और लंबी तलवार के समान हैं, जिन्होंने असंख्य स...
बलि बलि जाऊँ राधा मोहिं रहन दै वृंदावन की सरन
श्री हरिराम व्यास जी (विशाखा सखी अवतार) श्री राधारानी से प्रार्थना कर रहे हैं, हे किशोरीजी मैं आपकी बार बार बलिहार जा रहा हूँ, आप मुझे अपने निज महल वृ...
व्यास रसिक तासौं कहैं
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि वे उसी को रसिक मानते हैं जो जीव के माया-फंदे को काटने में समर्थ हो, समस्त भक्तों के प्रति समान आदर का भाव रखे और किसी क...
व्यास बड़े हरिके जना
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि श्री हरि के भक्त सबसे बड़े हैं, क्योंकि वे नित्य ही श्री हरि की भक्ति करते हैं और उन्हें प्रणाम करते हैं। उन भक्तों की ...
सबकौ भाँवतौ राधावर
ब्रज के लाड़िले यशोदा पुत्र नंदनंदन राधावर श्री श्यामसुंदर की रूप माधुरी सबके हृदय को भाती है। [1] कुंजबिहारी सदैव श्रृंगार संपन्न नाचते गाते ब्रज में...
किशोरी तेरे चरनन की रज पाऊँ
हे किशोरी (श्री राधा)! मुझे अपने चरण-कमलों की रज प्रदान कीजिए, जिससे मैं वृन्दावन के किसी कुञ्ज के कोने में बैठकर दिव्य दम्पति श्री श्याम-राधिका का ग...
कहाँ हौं वृंदावन तजि जाउँ
मैं इस पावन श्री वृन्दावन धाम को त्याग कर कहाँ जाऊँ? मुझ जैसे अधम और तुच्छ प्राणी के लिए श्री कृष्ण के अतिरिक्त अन्य कोई स्थान नहीं है। [1] वृन्दावन ...
“ श्री शुक, प्रगट कियू नहीं जाएं, जानी सार को सार , 'व्यासदास' अब प्रगट बखानत डारि भार में भार || ”
श्री शुकदेव परमहंस जी ने वेदों का सार का भी सार मान कर इसको प्रगट नहीं किया।श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि अब श्री राधारानी की ही कृपा जान उन्होंने ...
हरि तो तबहीं मिली हैं
“हरि तो तबहीं मिली हैं, जबहिं श्री गुरु होहिं कृपाल । ” - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी श्री कृष्ण तब ही मिलते हैं जब गुरुदेव की कृपा होती है।
“ जो रज शिव सनकादिक दुर्लभ, सो रज सीष चढ़ाऊँ | किशोरी तोरे चरनन की रज पाऊँ | ”
जो रज शिव सनकादिक दुर्लभ, सो रज सीष चढ़ाऊँ । किशोरी तोरे चरनन की रज पाऊँ । - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (293) श्री हरिराम व्यास जी श्र...
अब न और कछू करने, रहनै है वृन्दावन
अरे मन, अब और कुछ नहीं करना केवल वृन्दावन धाम में निवास करके दिन रात युगल सरकार की भक्ति करनी है क्यूंकि इस झूठे तन की आयु दिन पर दिन कम हो रही है । ...
" रसिक अनन्य हमारी जाति "
"रसिक अनन्य हमारी जाति " - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (121) हमारी जाति यही है कि हम रसिक अनन्य हैं अर्थात हम श्री किशोरी जी के अनन्य भ...
“ मोसो पतित न अनत समाई, याहि तें मैं वृन्दावन की सरन गह्यो है आई | ”
मोसो पतित न अनत समाई, याहि तें मैं वृन्दावन की सरन गह्यो है आई।” - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार), व्यास वाणी, पूर्वार्ध (17) मेरे समान कोई पतित नह...
मन रति वृन्दावन से कीजै
अरे मन वृन्दावन से नेह बढ़ा, यहाँ श्यामा श्याम के दिव्य रस की वर्षा निरंतर हो रही है जो जितना चाहे उतना रस पान कर सकता है।
लागी रट, राधा श्री राधा नाम
हे मन! निरंतर हर श्वास के साथ श्री राधा नाम की रट लगाए रह। श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि ‘राधा’ ही उनका जीवन है और ब्रज में स्थित बरसाना धाम ही उनक...
व्यास स्वपच बहु तरिगए, एक नाम लवलीन
व्यासजी कहते हैं कि जो नाम-सुमिरन में लवलीन हुए, वे चांडाल (स्वपच) भी इस संसार-सागर से पार उतर गए। किंतु जो लोग अभिमान की नाव पर सवार हुए, वे बड़े-बड़...
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
सांसारिक लोग किसी पारखी की भाँति केवल लाभप्रद वस्तु का ही चयन करते हैं अर्थात् अपने स्वार्थ सिद्धि के अनुसार ही सम्बन्ध जोड़ते हैं। किन्तु नन्दलाल श्री...
वृंदावन सांचो धन भैया
श्री वृन्दावन धाम ही सच्चा धन है । श्री वृन्दावन धाम की रज को पाने के लिए महालक्ष्मी भी तरसती हैं जहाँ श्री राधारानी के चरण अंकित हैं ।
कहत हौं बने न ब्रज की रीति
ब्रज की इतनी अधिक महिमा है कि ब्रज की रीति कहते ही नहीं बनती। समस्त वास्तविक गोपाल उपासक वृन्दावन धाम में तन और मन से प्रीति रखते हैं अर्थात् शरणागत ह...
आदि अंत अरु मध्य में
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि आदि, अंत और मध्य—अर्थात सदा-सर्वदा—रसिकों की यही एक रीति और अनन्य निष्ठा रही है कि वे समस्त संतों को अपने गुरुदेव के ...
रसिक कहे सोइ भली
रसिक संतों की आज्ञा में ही हमारा परम कल्याण समाहित है, अतः उसे कदापि अन्यथा नहीं लेना चाहिए और न ही बुरा मानना चाहिए। श्री हरिराम व्यास जी के अनुसार, ...
व्यास भलौ अवसर मिलौ
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं— “श्री ठाकुर जी ने यह अमूल्य मनुष्य-जीवन दिया है; इसे व्यर्थ नष्ट न करो। श्री सद्गुरु की शरण में इस जीवन को समर्पित कर द...
वृंदावन को वास करि
अरे मन! जगत की आस को त्याग कर वृन्दावन में वास कर; रसिक संतों के संग से नव-जन्म का प्रकाश प्रकट होता है।
प्यारी तेरे वदन-कमल-रस अटक्यौ
हे प्यारी [राधे], लाल [कृष्ण] अलि [भँवरा] तुम्हारे बदन रूपी कमल रस पर अटक गया है। उनका तन आपके तन से मिला है, और मन आपके मन से मिला हुआ है, अब ऐसा उलझ...
व्यास भजन करिवौ करौ
जो रसोपासना-भक्ति में निरंतर वृद्धि की इच्छा रखता है, उसे श्री राधारानी के भक्तों से प्रेम बढ़ाना चाहिए और श्री वृन्दावन धाम रूपी रस-क्षेत्र में दृढ़ ...
महाप्रलै अबही भई
हे मन! यदि अब तक भक्ति-रस की सिद्धावस्था प्राप्त नहीं हुई, तो तेरे लिए महाप्रलय वर्तमान क्षण में ही उपस्थित है। अतः बिना विलंब किए श्री वृन्दावन धाम म...
वैर करै हरिभक्तसौं
जो संसार से मित्रता करे और भक्तों से वैर रखे, फिर भी अपने को भक्त कहलाए—उसका यमराज के द्वार पर आवागमन कभी समाप्त नहीं होगा।
मेरे मन आधार प्रभु
मेरे मन के आधार और मेरे सर्वस्व श्री वृन्दावन के युगल-चन्द्र श्री राधा कृष्ण हैं। श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि “मैं उनका हूँ और वे मेरे हैं”—ऐसा ...
व्यास बसेरौ कुंजमें
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं— “मेरा बसेरा वृन्दावन की कुंजों में, बंशीवट की छाँव में है। मेरा आसरा हरि-भक्त हैं और राधावर की बाँह है।”
व्यास विवेकी भगत सौं
श्री हरिराम व्यास जी भक्ति की रीति को समझाते हुए कहते हैं कि यदि भक्ति में आगे बढ़ना है, तो रसिक-संत का दृढ़तापूर्वक संग करें और श्री राधा-कृष्ण में अ...
हित हरिवंश कृपा बिना
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि उनके लिए श्री हित हरिवंश महाप्रभु की कृपा के अतिरिक्त कोई अन्य ठौर नहीं है; उन्हीं श्री हित हरिवंश महाप्रभु की कृपा स...
वेद पुराण हूँ पढै
यदि कोई अनन्त बार वेदों का अध्ययन कर ले अथवा अनेक सुकर्म कर ले, तो भी अनन्य भक्ति के बिना उसकी एक भी गति नहीं होती; अर्थात सब कुछ निरर्थक है।
व्यास रसिकजन ते बड़े
श्री हरिराम व्यास कहते हैं, भक्तों में सर्वोपरि रसिक भक्त हैं जो श्री ब्रज धाम कभी नहीं छोड़ते। यहां तक कि भोजन के लिए भी मांग कर स्वपच का झूठन खाना उच...
जुगलचरन हिय ना धरै, मिलै न संतनि दौरि
जो हृदय में श्री युगल (श्री राधा-कृष्ण) के चरणों को धारण नहीं करता और संतों के पास दौड़कर (श्रद्धापूर्वक) नहीं जाता, श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि ऐ...
व्यास बड़ाई छाँड़िकैं
अपनी बढ़ाई और मान का त्याग कर श्री हरि के चरणों में चित्त लगाना चाहिए। करोड़ों ब्राह्मण भी एक भक्त—श्री रैदास जी—पर न्योछावर किए जा सकते हैं।
नैंन न मूँदे ध्यानकौं
न तो मैंने आँखें बंद करके ध्यान किया और न ही कोई उपवास या तपस्या की। श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं—केवल नृत्य और कीर्तन करके, रसिकों के संग में वृन्दा...
राधिका मोहन की प्यारी
श्री राधा श्रीकृष्ण को प्राणों से भी प्यारी हैं। (1) नख से शिख तक, वे सुंदरता और गुणों की सीमा हैं, जो महाराज वृषभानु की लाड़िली हैं। (2) निकुंज महल मे...
करै वरत एकादशी
श्री हरिराम व्यास जी ‘महाप्रसाद’ के महत्व का वर्णन करते हुए कहते हैं— ‘जो एकादशी के दिन महाप्रसाद—अर्थात् श्री राधा–कृष्ण के प्रसाद—में चिदानन्द का भा...
मुहरैं मेवा अनत के
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं— ‘अन्य स्थानों का दिया हुआ मिथ्या भोग-विलास त्याज्य है; परन्तु वृन्दावन के स्वपच की झूठन भी माँगकर खाना कल्याणकारी है।’
वृन्दाबन साँचौ धन भैया
"हे मेरे भाई, श्री वृंदावन धाम ही एकमात्र सच्चा धन है। इसलिए सोने के उन ढेरों को छोड़ दो और श्रीकृष्ण का भजन करो। [1] श्री वृन्दावन में लक्ष्मीजी श्री...
महिमा स्याम की हम जानी
मैंने श्री कृष्ण की महिमा को जान लिया है। यह केवल उनकी अहैतुकी कृपा का परिणाम है कि मैं, एक अभिमानी व्यक्ति, वृंदावन में निवास कर रहा हूँ। हर प्रकार स...
आजु बधाई है बरसानैं
बरसाना आज बधाइयों से गूंज रहा है — वृषभानु जी के घर कुँवरि किशोरी श्री राधा का अवतरण हुआ है, और समस्त लोकों में मंगलध्वनि गूंज रही है। [1] नंद जी, वृ...
जौ पै वृन्दावन धन भावै
जिस किसी का भी मन श्री वृंदावन धाम के उज्जवल रस में लग गया है उसे सृष्टि के समस्त विषय व्यर्थ प्रतीत होने लगते हैं क्यूँकि सृष्टि का कोई भी रस अथवा पर...
काहू के बल भजन कौ
किसी को भजन का बल है, किसी को सदाचार का; परंतु श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि उन्हें तो केवल श्री राधारानी का ही भरोसा और बल है, जिसके कारण वे दोनों...
व्यास एक ही बात गही, राधावल्लभ धाम
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि मेरा तो केवल श्री राधावल्लभ के निज धाम से ही संबंध है। अन्य अनेक उत्तम भक्तों या मार्गों से मेरा अब कोई प्रयोजन नहीं ...
दुविधा तब जैहै या मन की
मेरे मन की दुविधा तभी जाएगी जब मैं निर्भय होकर के इस वृंदावन रज का सेवन करूंगा।
रसिक अनन्य कहाइकैं
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि जो स्वयं को 'रसिक-अनन्य' (श्री राधा-कृष्ण के अनन्य भक्त) कहलाते हैं, परंतु फिर भी सांसारिक लाभ के लिए नवग्रहों और गणे...
हौं बलिहारी भक्तकी
मैं उन भक्तों पर बलिहार जाता हूँ, जिनके महान उपकार हैं; वे हृदय में हरि-रूपी धन को स्थापित कर देते हैं और संसार से वैराग्य उत्पन्न करा देते हैं।
कोटि ब्रह्म ऐश्वर्यता
करोड़ों ब्रह्मांडों का ऐश्वर्य और समस्त वैभव तो श्री राधा जू की सुंदरता के ऊपर न्योछावर किया जा सकता है। श्री हरिराम व्यास जी की स्वामिनी जू के इस अपा...
मोहिं स्याम कौ डर नहीं, श्यामा ! छूटत न आसा तेरी
मोहिं स्याम कौ डर नहीं, श्यामा ! छूटत न आसा तेरी | तुव पद पंकज पारस परसत, व्यास कहा अब खेरी || - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी , पूर्व...
तब मेरे नैंन सिरात किसोरी जब तेरे नैंन निहारौं
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी हे किशोरी राधा, मेरे नयन रस में केवल तभी विसर्जित होती हैं जब मैं आपके रसीले नयनों को निहारता हूं।
जीवत मरत वृन्दावन शरनें
जीवत मरत वृन्दावन शरनें, यह परम पुरुषार्थ मेरौ, और कछु नहिं करने | - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (289) मेरा केवल एक ही पर...
वृंदावन रस मोहि भावे हो
वृंदावन रस मोहि भावे हो | ताकि हौं बलि जाऊं सखी री, जो कोई मोहि सुनावे हो || - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (118) श्री हरि...
वृंदावन सांचो धन भैया
वृंदावन सांचो धन भैया, जहाँ श्री राधा चरण रैंनुंकी, कमला लेती बलैया || - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (192) श्री वृन्दावन ...
सदा वृन्दावन सब की आदि
सदा वृन्दावन सब की आदि, रसनिधि, सुखनिधि, जहाँ बिराजत नित्य, अनंत, अनादि || - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (4) वृंदावन धाम ...
पिय को नाचन सिखावत प्यारी
श्री हरिराम व्यास जी द्वारा लिखित लीला में श्री राधा रानी, श्री कृष्ण को नाचना सिखा रही हैं।वृन्दावन में शरद पूर्णिमा की रात्रि में रास लीला हुई थी और...
देखो श्री वृन्दाविपिन प्रभाइ
देखो श्री वृन्दाविपिन प्रभाइ | सब तीरथ धामनि फिर आवत देखत उपजत भाई || अचरज कहा व्यास सुख वर्णत, थके रसिक ताहि गाई | - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार)...
रहि मन वृंदावन की शरण, यह रस पसु निरस तू छाँडत
रहि मन वृंदावन की शरण, यह रस पसु निरस तू छाँडत, भाजत पेटहि भरन। व्यास अनन्य भक्तिकी जीवनि, बन में मंगल मरन। - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास...
जयति नव नागरी , कृष्ण
(राग केदारो व कामोद) जयति नव नागरी , कृष्ण-सुख-सागरी , सकल गुन-आगरी , दीनन भोरी ! जयति हरि-भामिनि , कृष्ण-घन-दामिनी , मत्त गज-गामिनी , नव किशोरी !! जय...
निरखि मुख सुख पावत मेरे नैंन
निरखि मुख सुख पावत मेरे नैंन , श्री व्यास स्वामिनी की अद्भुत छबि, कवि पै कहत बनैंन | - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (124) ...
यह वृन्दावन मेरी सम्पति, इहलोक परलोक वृन्दावन मेरौ पुरुषार्थ परमार्थ गथु गति।
यह वृन्दावन मेरी सम्पति, इहलोक परलोक वृन्दावन मेरौ पुरुषार्थ परमार्थ गथु गति। - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (27) केवल श्र...
यहै अनन्य धर्म पटपाटी यहै
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी यह रसिक अनन्य धर्म है कि वृन्दावन को त्याग कर अन्य कहीं मत जाइए।
वृन्दावन के रूख हमारो मात पिता गुरु बंधु
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी वृंदावन के वृक्ष हमारे माता, पिता, आध्यात्मिक गुरु और भाई हैं।
जीवन मरत श्री वृन्दावन शरनै
जीवन मरत श्री वृन्दावन शरनै, सुनहुँ सुचित ह्वै (श्री) राधामोहन, यह विनती मन धरनै॥ - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (289) हे ...
श्री वृंदावन की माधुरी
श्रीवृन्दावन की दिव्य माधुरी का नित्य पान करना तो रसिकों के घर की ही बात है। श्री राधा-कृष्ण के युगल चरणों का दर्शन करके श्री हरिराम व्यास बलिहार जा र...
व्यास विवेकी भगत सौं दृढ़ करि कीजै प्रीति
व्यास विवेकी भगत सौं दृढ़ करि कीजै प्रीति। अविवेकी कौ संग तजि, इहै भक्ति की रीति। - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, साखी (67) श्री हरिरा...
जंत्र, मंत्र और वेद तंत्र में
“ जंत्र, मंत्र और वेद तंत्र में, सभी तार को तार, परम धन राधा नाम आधार || ” - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (38) न कोई ऐसा य...
जीवत मरत वृन्दावन शरनैं
(राग सारंग) जीवत मरत वृन्दावन शरनैं ॥ सुनहुँ सुचित ह्वै (श्री) राधामोहन, यह विनती मन धरनै। यही परम पुरुषार्थ मेरौ, और कछु नहीं करनैं॥ स्याम भरोसे, तेर...
वृंदावन तजि जे सुख चाहत
विशाखा अवतार श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि जो जीव वृन्दावन को त्यागकर सुख (रस) पाना चाहते हैं, वे राक्षस और प्रेत के समान हैं—मनुष्य भी नहीं। यह बात स...
श्रीराधावल्लभ व्यास के
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि उनके इष्टदेव, मित्र और गुरुदेव श्री राधावल्लभ लाल ही हैं। कुंज-महल के रस के रहस्य को उजागर करने के लिए, श्री हित हरिवंश ...
राधावल्लभ मेरौ प्यारौ
श्री हरिराम व्यास कह रहे हैं "जो सर्वोपरि हैं, समस्त जनों के ठाकुर अथवा इष्ट हैं, सब को सुख दान करने वाले हैं, वे श्री राधावल्लभ मेरे प्राणधन हैं।" [1...
श्री वृन्दावन में मंजुल मरिबौ
श्री वृन्दावन में मंजुल मरिबौ | जीवन मुक्त सबै ब्रज वासी, पद रज सौं हित करिबौ || - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (190) श्री...
तजि के रसिक अनन्यता
तजि के रसिक अनन्यता, विधि निषेध दे घेरि। व्यासदास के भाव ते, भक्ति गई दै टेरी॥ - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, साखी (100) श्री हरिराम...
कहत हौं बने न ब्रज की रीति
कहत हौं बने न ब्रज की रीति, सब गोपाल उपासक, तन मन वृन्दावन सोन प्रीती। - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (5) ब्रज की इतनी अधि...
गौर स्याम सोभा सागर कौ, नाँहिन वारापारु
गौर स्याम सोभा सागर कौ, नाँहिन वारापारु | व्यास स्वामिनी की छबि आगैं, सकल सरूप उगारु || - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी "युगल सरकार की...
बने न कहत राधा कौ रूप
"बने न कहत राधा कौ रूप, व्यास स्वामिनी सौं विहरत ही, मोहन लगत सरूप || " श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (77) श्री राधा के दिव...
श्री वृंदावन प्रगट सदा सुख चैन
अति उदार सुकुमारि नागरी रोम रोम सुख दैन। हाव भाव अँग-अंग विलोकत धन्य व्यास के नैन।। - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (13) इस...
तेइ रसिक अनन्य जानिवे
तेइ रसिक अनन्य जानिवे, तिनकी जीवनि धन वृन्दावन, जीवत मरत बखानिवै || - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (178) जिसका जीवन धन एक ...
जाके मन बसै वृंदावन
(राग सारंग एवं रामकली) जाके मन बसै वृंदावन। सोई रसिक अनन्य धन्य, जाकैं हितराधामोहन॥ ताही नित्य विहार फुरै वन, लीलाकौ अनुकरन। विषय वासना नाँहिन जाकैं, ...
हम कब होहिंगे ब्रजवासी
(राग सारंग) हम कब होहिंगे ब्रजवासी। ठाकुर नंदकिशोर हमारे, ठकुराइनि राधा सी।। कब मिलि हैं वे सखी सहेली, हरिवंशी हरिदासी। वंशीवट की शीतल छहियाँ, सुभग नद...
राधिका रमन जय
राधिका रमन जय, जाके चरन कमल सेवत नित, रसिक अनन्य भये सब निर्भय। - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (60) जिनके कमल के समान युगल...
श्री राधा ललितादिक मेरे जीवनी प्राण आधार, सर्वेषु व्यास दास को वन है वृन्दावनहि अभार ||
श्री राधा ललितादिक मेरे जीवनी प्राण आधार, सर्वेषु व्यास दास को वन है वृन्दावनहि अभार || - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी श्री राधा और ल...
महिमा स्याम की हम जानी
मैंने श्री कृष्ण की महिमा को जान लिया है। यह केवल उनकी अहैतुकी कृपा का परिणाम है कि मैं, एक अभिमानी व्यक्ति, वृंदावन में निवास कर रहा हूँ। हर प्रकार स...
‘व्यास’ आस छाँड़हु सब ही की
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी श्री हरिराम व्यास (श्री विशाखा अवतार) कहते हैं, किसी व्यक्ति एवं संसारी पदार्थ की आस मत रखो और पूर्ण र...
आदि अंत अरु मध्य में
आदि अंत अरु मध्य में, यह रसिकन की रीति। संत सबै गुरुदेव हैं, व्यासहि यह परतीति।। - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, साखी (24) समस्त वास्...
राधिका-रवन जय
श्री हरिराम व्यास कह रहे हैं "अपने दासियों को सुख प्रदान करनेवाली वृन्दावन विहारिणी नवलकुँवरि श्री राधिका रमण की जय हो।" [1] जिनके चरण कमलों की नित्य ...
वृंदावन की शोभा देखे
श्री हरिराम व्यास कहते हैं "वृन्दावन की कुञ्ज एवं निकुंजों में अद्भुत सुख की वर्षा हो रही है, जिसके गान से मेरे ह्रदय में बड़ा भारी हर्ष हो रहा है, वृ...
व्यास सु रसिकन की रहनी
हे भाई! रसिकों की रहनी (रसिक कहलाना) अत्यंत कठिन है, क्योंकि संसार की समस्त कठिनताओं को सहते हुए भी उनका मन श्री राधा-कृष्ण के युगल-रस में नित्य ही डू...
कोटि कोटि एकादशी
अनन्त कोटि एकादशी तो महाप्रसाद के एक अंश के समान हैं। श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि उन्हें इस बात पर पूर्ण विश्वास है, क्योंकि उनके गुरु श्री हित हरिव...
(Shri) Radhavallabhkau Hau Bhanvatau Cherau
(Shri) Radhavallabhkau Hau Bhanvatau Cherau.Radhavallabh Kahat Sunathi, Man Na Naim Jam Kerau. [1]Radhavallabh Vastu Bhooli Hoon, Kiyau Anat Nahin Phe...
Shri Radhavallabha Param Dhan
(Shri) Radhavallabha Param Dhan, Vyasa Hi Phabi Gayi Loot.Kharachat Hoon Nighatein Nahi, Bhare Bhandar Atoot. - Shri Hariram Vyas, Vyas Vani, Siddhant...
Aaju Badhai Hai Barsane
(Raag Jayatishri / Devgandhar)Aaju Badhai Hai Barsanain. Kunwari Kisori Janam Layo, Sab Lok Baje Sahdanain. [1]Kahat Nand Vrishbhanaray Saun, Aur Baat...
Chali Chalihi Vrindavan Vasant Aayo
(Raag Vasant)Chali Chalihi Vrindavan Vasant Aayo.Jhoolat Phoolani Ke Jhanvara, Marut Makarand Udayo. [1]Madhukar Kokil Keer Keki Mili, Kolahal Upjayo....
Hari Heera Guru Jauhari
Hari Heera Guru Jauhari, Vyasa Hi Diyo Bataai.Tan Man Anand Sukh Mile, Naam Let Dukh Jaai.- Shri Hariram Vyas, Vyas Vani, Siddhant Ki Saakhi (23)Shri ...
Shri Radhavallabh Ki Nav-Keerati
(Raag Sarang)Shri Radhavallabh Ki Nav-Keerati Varnat Hu Na Nighaat.Bharatkhand Ki Su Kavimandali Varnat Hu Na Aghaat. [1]Bade Rasik Jaydev Vakhani Lee...
Vyas Radhika Ravan Binu
Vyas Radhika-Ravan Binu, Kahun Na Paayau Sukh.Daarani-Daarani Main Phiryau, Paatani-Paatani Dukh.- Shri Hariram Vyas, Vyas Vani, Siddhant Ki Saakhi (3...
Man Rati Vrindavan Sau Keejai
Man Rati Vrindavan Sau Keejai.Khaayau Piyau Bharyau Bhoonjyau, Ab Jeevan Kau Phal Leejai. [1]Kaaj Akaash Jaani Sab Aapunau, Dau Sanvarau Deejai.Dekhi ...
Vyashi Baman Jin Gano Haribhaktan Ko Das
Vyashi Baman Jini Ganaun, Haribhaktan Kau Das.(Sri) Radhavallabh Karnain, Sahyau Jagat Uphas.- Shri Hariram Vyas, Vyas Vani, Saakhi (14)Sri Hariram Vy...
Shriradhavallabh Tum Mere Hita
(Raag Kanharo)Shriradhavallabh Tum Mere Hita.Aur Sabai Svarath Ke Sangi, Gur Chopari Dai Poshat Pitu. [1]Yah Main Jaani Sabani Saun Tori, Tumsaun Jori...
Ananya Vrat Khande Kisi Dhaar
Ananya Vrat Khaande Keesi Dhaar.It-Ut Dagat Jagat Hit Tehari, Pheri Na Karat Samhaar. [1]Kaha Gyaasi Kul-Karmani Chhade, Jolagi Vishay Vikaar.Binu Pre...
Vyas Kulinani Koti Mili, Pandit Laakh Pachis
Vyas Kulinani Koti Mili, Pandit Laakh Pachees.Swapach Bhakt Ki Paanahi, Tulai Na Tinke Sees.- Shri Hariram Vyas, Vyas Vani, Saakhi (16)Even if crores ...
Jhulat Phulat Kunjavihari
(Raag Malar)Jhoolat Phulat Kunjavihari.Dusari Or Kishor Vallabha Shri Vrishabhan Dulari. [1]Kulkata Hansat Khasat Kusumavali Sundar Jhumak Saari.Kabah...
Nar Dehi Dvaro Khulyo Hari Pavan Ki Ghat
Nar Dehi Dwaro Khulyau, Hari Paavan Ki Ghaat.‘Vyas’ Feri Nahin Lagatu Hai, Taruvar Tutyau Paat.- Shri Hariram Vyas, Vyas Vani, Saakhi (87)Human birth ...
Gavat Pyaro Radha Tero Jasu
(Rag Sarang)Gavat Pyaro Radha Tero Jasu.Teroi Naam Japat Aur Bilapatu Hai, Kaamkau Syamhin Sank Su. [1]Kahyo Na Parai Darun Dukh Pyari, Tere Virah Moh...
Vyas Na Vyapak Dekhiye Nirgun Pare Na Jaani
Vyas Na Vyapak Dekhiye, Nirgun Pare Na Jaani.Tab Bhaktani Hita Autare, (Shri) Radhavallabh Aani.- Shri Hariram Vyas, Vyas Vani, Saakhi (07)Śrī Harirām...
Kahan Haun Vrindavan Taji Jaun
(Raag Sarang)Kahan Haun Vrindavan Taji Jaun, Mose Neech Poch Kaun Anat Na Hari Binu Aur Na Thaun. [1] Sukh Punjanikunjani Ke Dekhat, Vishay Vishai Kyo...
Kharo Kharo Sab Let Hain
Kharau Kharau Sab Let Hain, Parakhi Parkhu Sar.Khote ‘Vyas’ Ananya Kau, Gahak Nandkumar.- Shri Hariram Vyas, Vyas Vani, Saakhi (34)Just as a jeweler s...