ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
164 itemsसोय सोय सबकाम विगारा
अरे मन ! आप अनंत काल से अज्ञानता की नींद में सो रहे हैं और आपने अपना भविष्य खराब कर लिया है। अरे मन ! यह दुर्लभ अवसर जा रहा है और आप गौर श्याम युगल रस...
जिनके मुहडे सों कड़े
जिनके मुहडे सों कड़े, जुगुल विहार की बात। तिनके अर्पण कीजिए, श्रवण नयन दिनरात॥ - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, युगल विहार शतक (17) जिन रसिक जनों...
यह अभिलाष लडैती मोरी
हे राधारानी, मेरी यही अभिलाषा है की आप लाल जी [श्री कृष्ण] संग मुदित [प्रसन्न चित्त] विराजें और मैं आपको चकोर पक्षी जिस प्रकार चन्द्रमा को निहारता है...
राधे बहुत भई अब माफ़ करो
आपने अपना हमें बना लिया है तो अब आप अपने प्रण से मत हटो। श्री ललित किशोरी कहते हैं कि हे स्वामिनी, हमारे अवगुणों की ओर न निहारो, अपनी निज करुणा की ओर...
ललित किशोरी लालजू
हे श्यामा-श्याम! मेरी यही विनती है कि चाहे मैं कूकर, शूकर अथवा किसी भी योनि में जन्म लूँ, परंतु मेरा नित्य वास श्री वृन्दावन धाम में ही हो।
लता पता द्रुमबेलि हौं
हे युगल सरकार! मुझे किसी भी प्रकार यमुना के किनारे वृंदावन में ही बसाइए—चाहे लता, पत्ता, द्रुम, बेल, घास, रज-कण, फल या फूल किसी भी रूप में; परंतु मुझे...
प्यारी जू कौन तिहारी खोट
हे प्यारी जू आपकी कृपा में लेश मात्र कोई भी कमी नहीं है, हे स्वामिनी, सारी कमी मेरे भीतर है मैं कुछ भी करने में असमर्थ हूँ एवं मैं ही अवगुण की खान हूँ...
अब विलम्ब जिन करहुँ लाड़िली
हे लाड़िली जी, अब तनिक भी विलंभ न करें एवं मुझ पर कृपा की दृष्टि डालें। ऐसी कृपा करिए कि मैं साँझ सवेरे यमुना पुलिन एवं गहवर वन में विचरण करूँ। [1] प...
राधा नाम अदभुत चंद
हमारा संपूर्ण नाता श्री राधा नाम से ही है जिसके लेने से श्री श्याम सुंदर के प्रति प्रगाढ़ प्रीति उत्पन्न हो जाती है। [1] श्री ललित किशोरी जी कहते हैं...
राधा नामही सों नातो
हमारा संपूर्ण नाता श्री राधा नाम से ही है जिसके लेने से श्री श्याम सुंदर के प्रति प्रगाढ़ प्रीति उत्पन्न हो जाती है। [1] श्री ललित किशोरी जी कहते हैं...
सुमन वाटिकाविपिन में, ह्वैहौं कबहूं फूल
वह दिन कब आएगा जब मैं वृंदावन की पुष्प-वाटिकाओं का ऐसा फूल बन जाऊँगा जिसे युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण) अपने कोमल हाथों से चुनकर अपने दुपट्टे के पल्लू ...
वृन्दावनसों नेह लगैये
अरे मन श्री वृंदावन धाम से नेह बढ़ा। काम क्रोध में ही तेरा जीवन बीता जा रहा है और यमदूत का ही मरने के पश्चात दर्शन करना होगा, समय बीता जा रहा है, अब श...
कालीदह कव कूल की ह्वैहौं त्रिविध समीर
मैं कालीदह के तट की वह शीतल, मंद और सुगंधित (त्रिविध) वायु बन जाऊँ, जो श्री युगल सरकार (राधा-कृष्ण) के प्रत्येक अंग-प्रत्यंग का स्पर्श कर सके, जिससे उ...
कब ह्वैहौं हों मोरनी
कब वह सौभाग्यशाली क्षण आएगा, जब मैं श्री वृन्दावन धाम में एक मोरनी का रूप धारण करूँगी? तब मैं अपने अंगों को मरोड़-मरोड़ कर (नृत्य की मुद्रा में) सुंदर श...
वृदावनको जाना हेली वृदावन को जाना है
यह पद श्री ललित किशोरी जी ने वृन्दावन आगमन से पूर्व लिखा था जिसमें वह कहते हैं कि, हे सखी, मुझे तो अब केवल वृन्दावन जाना है। रसिक रंगीली जोड़ी श्री राध...
अहो लडैति प्राणपियारी श्रीवन
हे प्राणप्यारी किशोरीजी! आप मुझे कब श्री वृन्दावन धाम में बसाएँगी? हे श्री राधे! कब आप रसिक शिरोमणि श्री श्यामसुंदर के साथ मुझे माधुरी तान सुनाएँगी? ...
कृष्णराधिका कुंड को, ह्वैहों कबहूँ नीर
मेरी यह अभिलाषा है कि क्या मैं कभी श्री राधा-कृष्ण के पवित्र कुंडों (श्री राधाकुण्ड और श्री श्यामकुण्ड) का जल बन सकूँगा? जब वे युगल किशोर अपने श्यामल ...
मैं दासी अपनी राधा की
मैं अपनी राधा की नित्य ही दासी हूं और उनको जो जो रुचिकर होता है वही वही करके विभोर होती हूं। [1] मैं श्री हरि की भी परवाह नहीं करती (उनको सपने में भी...
ललित किशोरी आस रही मन, ब्रज रज तज कहीं अनत न जा
ललित किशोरी आस रही मन, ब्रज रज तज कहीं अनत न जा। - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (६५) ऐसी आशा हृदय में रखो की ब्रज की रज को छोड़कर कहीं मत जा...
श्री वृंदावन रेणु के छापे अंगन छाप
श्री वृन्दावन की परम पावन रज (रेणु) को अपने अंगों पर तिलक और छाप की भाँति सुशोभित करके, यमुना तट पर स्थित सघन कदम्ब के कुंजों की शीतल छाया में बैठकर, ...
कूकर ह्वै बन-बीथिन डोलौं
मुझे ब्रज की कुञ्ज गलियों में घूमने वाला और ब्रजवासियों के जूठन को खाने वाला कुत्ता बनना स्वीकार है लेकिन ब्रज-रज का संग एक क्षण के लिए भी छोडना स्वीक...
गैल श्रीवृन्दावनकी गहिये
श्री वृन्दावन के मार्ग में ही अनन्यता पूर्वक बढ़ना चाहिए। सेवाकुंज के कोने में बैठे युगल किशोर श्री राधा कृष्ण की छवि को निहारना चाहिए। [1] श्री ललित ...
वृन्दावन तजि सुख नहीं भजि चल भजि चल वीर
हे भाई! श्री वृन्दावन धाम को छोड़ कर कहीं भी सच्चा सुख प्राप्त नहीं होता, इसलिए तू सब कुछ त्यागकर शीघ्र ही उस परम धाम की ओर भाग चल। वहाँ भूख लगने पर म...
भ्रमरी ह्वै कब डोलिहौं, श्री वृन्दावन गैल
कब ऐसा शुभ समय आएगा जब मैं भ्रमरी बनकर श्री वृंदावन की पावन गलियों में विचरूँगा और श्री राधा-कृष्ण के चरण-कमलों से झरते दिव्य मकरंद-रस का आस्वादन कर स...
काहू के व्रत नेम जप, जोग जग्य के ठाठ
कुछ लोग व्रत, नियम, जप, योग या यज्ञ में अपनी निष्ठा रखते हैं, पर मेरी निष्ठा केवल युगल सरकार, श्री राधा-कृष्ण के नित्य विहार में है जो मेरी त्रिकाल सं...
कर सखि वृंदावन सों हेत
अरी सखी, समस्त प्रकार के प्रपंचों (अर्थात् सात्विक, राजस, तामस) से मन को हटा कर श्री वृंदावन धाम से नेह कर। [1] श्री प्रिया लाल के चरणों से अंकित इस ...
पशू पखेरू होहु कछु
मैं अंचल फैलाकर यही वरदान माँगता हूँ कि मुझे सदा वृंदावन-वास प्राप्त हो; चाहे उसके लिए मुझे पशु, पक्षी, पत्थर, जल या तृण का ही रूप क्यों न धारण करना प...
जमुनापुलिन कुंज गहिवरकी
कब मैं जमुना पुलिन स्थित गह्वर वन में कोकिल बनकर द्रुम पर बैठकर श्यामा श्याम के लिए मधुर गान करूँगा। [1] कब मैं प्रिया लाल के चरण कमलों का भौंरा बनूँ...
मनुआं मत कर निमक हरामी
अरे मन, नमक हरामी मत कर। अरे दुष्ट, समस्त प्रकार का आलस त्याग कर प्रिया प्रियतम के निकुंज द्वार की ही नित्य सेवा कर। [1] तू तो बहुत दिनों से पतितों क...
मोर कोर दृग देखिये, ललितकिशोरि पाँहिं
हे ललित किशोरी श्री राधिका! अपनी करुणामयी कृपा-दृष्टि की कोर मुझ पर डालें और मुझे भी श्री वृंदावन धाम के किसी कोने में वास का सौभाग्य प्रदान करें।
जमुनापुलिन कुंज गहिवरकी
ऐसा कब होगा जब मैं कोयल बन कर यमुना पुलिन की गह्वर वन की कुञ्ज की लता पर बैठ कर मधुर स्वर से गान करूँगा? [1] ऐसा कब होगा जब मैं भृंग बन कर प्रियालाल ...
ललितकिशोरी यह विनै
हे ब्रज के सिरमौर श्री युगल किशोर, मैं आपसे यह विनती करता हूँ कि मैं सदैव श्री वृन्दावन में विचरण करूँगा एवं ब्रजवासियों से मधुकरी कर निर्वाह करूँगा।
कव कालिंदी कूल की
कब मैं यमुना के किनारे के वृक्षों की डाल बनूँगा, जिस पर बैठकर लाड़लीलाल (श्री राधा कृष्ण) झूला झूलेंगे।
निधुवन द्रुम डारिन कवै, ह्वैहौं पक्षी कीर
कब मैं निधिवन में वृक्ष की डाल पर तोता बनूँगा और श्री राधा-रमन लाल के नाम का रटन कर अधीर हो उठूँगा?
आन देवसों काज ना ना किहु निंदा गोय
वृंदावन के रस उपासक को श्री राधा कृष्ण के अतिरिक्त अन्य किसी देवता से कोई संबंध नहीं रखना चाहिए और न ही कभी किसी की निंदा ही करनी चाहिए। केवल युगल चरण...
शेष ओ सुरेश त्यों गणेश ईश आदि देव
शेष, इंद्र, गणेश जी एवं अन्य देवता ब्रह्म पद का गान करते हैं जो सर्व सुख देने वाला है। चिंतामणि से समस्त चिंताओं का निवारण होता है एवं कल्पवृक्ष एवं क...
श्रीवृन्दावन वास दीजिए
हे वृषभानु दुलारी श्री राधा! मेरी यही आशा है कि मुझे आप वृंदावन का अखंड वास प्रदान करें। [1] जहाँ यमुना के पावन तट पर, वंशीवट के नीचे, आप प्रियतम के ...
जुगल बिहारी दीजिए श्रीवृंदावन वास
हे युगल बिहारी (श्री राधा कृष्ण), मुझे श्री वृंदावन का वास प्रदान कीजिए क्योंकि मेरे प्यासे नेत्र तुम्हारे रूप सुधा रस का पान करने के लिए मरे जा रहे ह...
यही कर्म यही धर्म है, यही उपासन ज्ञान
यही कर्म है, यही धर्म है, और यही उपासना का ज्ञान है कि या तो मैं इन नयनों से ब्रज रस का पान करूँ या मेरे प्राण निकल जाएँ। अर्थात्, इस मानव देह का क्या...
मिलिहै कब अंग छार ह्वै
ऐसा कब होगा कि मेरा यह शरीर श्री वृंदावन धाम की परम पावन रज में विलीन हो जाएगा, जिससे मेरे जीवन के आधार, श्री युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण) के चरण-कमल...
मेरे मन सब भाँति बिगारी
मेरे मन ने हर किसी से सब भाँति बिगाड़ ली है। वेदों एवं शास्त्रों की मर्यादा तथा लोक-लाज, कुल आदि की मर्यादाओं से मुख मोड़कर, उसे अपने ह्रदय से सदा-सदा...
मेरे मनहिं हुलास स्वामिनी श्रीवन सुरख लहोंगी
हे स्वामिनी जू (श्री राधा)! मेरे मन में अति उल्लास भर चुका है कि अब मैं भी श्रीधाम वृंदावन में तुम्हारे सुकोमल लाल चरणों की छवि का दर्शन करूँगी। [1] ...
आन देश की इमरती
दूसरे स्थानों के व्यंजनों के बारे में सुनकर मेरे मुंह में कड़वाहट आ जाती है, क्योंकि वृंदावन की रज मिश्री से भी अधिक मीठी है।
तनमन हमारो सो तो सबही लडैतीजू को
हमारा तन, मन और सर्वस्व तो लड़ैती जू (श्री राधा) का ही है, और हमारा जीवन भी वृषभानु नंदिनी श्री राधा ही हैं। [1] उनके अधरामृत के प्रसाद को पान करने...
मो मन कब अनुरागिहै
जिस प्रकार एक प्यासा व्यक्ति निर्मल और शीतल जल की लालसा में व्याकुल हो उठता है, उसी प्रकार कब मेरे मन में भी दिव्य दंपति श्री राधा-कृष्ण के युगल चरणों...
युगल छवि आज अनूप बनी
आज श्री श्यामाश्याम की सुन्दर छवि की कोई समानता नहीं है। श्री श्यामसुंदर गोरे हैं एवं श्री राधा साँवली हैं अर्थात श्यामसुंदर राधा बने हैं एवं राधारानी...
कीट पतंग पिपीलिका मरकट भृंग मयूर
चाहे कीड़ा, पतंगा, चींटी, बन्दर, भौंरा या मोर—जो भी देह मिले, मुझे स्वीकार है। बस, हे युगल-बिहारी! मुझे वृन्दावन की धूल (तुम्हारी चरण-रज) बना दीजिए—वह...
प्यारीजू कौन तिहारी खोट
हे प्यारीजू (राधे)! आपमें कोई भी दोष नहीं है (अर्थात् आपकी कृपा में कोई कमी नहीं है)। दोष तो मुझमें ही है, क्योंकि मैं तो अवगुणों की मोट (गठरी) हूँ।[...
पशु पक्षी पाषाण हों
हे ललित किशोरी (श्रीराधा)! कृपा कर मुझे ब्रज की गलियों में कुछ भी बना दें— चाहे पशु, पक्षी, पत्थर, तृण या ब्रजरज का एक धूलिकण ही क्यों न हो। चाहे कोई ...
हेस्वामिनि श्रीकुंजविहारिनि
हे स्वामिनी, श्री कुंज विहारिणी (श्री राधा)! कृपा करके शीघ्र मेरी सुध लें। मुझे सेवा की रीति कुछ भी नहीं आती, मेरी भूल को क्षमा कर दें। [1] मैं अत्यं...
श्यामा पग लवलीन हो, उन्हीं के हाथ विकाय
श्रीकृष्ण स्वयं को केवल उन्हीं के हाथों में बेचते हैं जो श्रीराधा के चरणों की भक्ति में स्वयं को पूर्णतः तल्लीन कर देते हैं। ऐसे प्रेमी भक्तों के हाथो...
जुगल बिहारी विरह में
युगल विहार करने वाले श्री राधा-कृष्ण का वियोग अब और सहन नहीं होता। श्री ललित किशोरी कहते हैं कि हे किशोरीजी! कृपा कर अब मुझे वृन्दावन का वास प्रदान की...
मोसों नाहिं कछुक बनिआई
हे श्रीराधा! मेरे बनाए तो कुछ भी सिद्ध नहीं होगा। मैं तो सदैव से अवगुणों से युक्त हूँ — मुझमें कूट-कूट कर बुराइयाँ भरी हुई हैं। [1] हे स्वामिनी, अब आ...
नीको लगे राधावर प्यारो
श्री राधावर (श्री कृष्ण) मेरे हृदय को अत्यंत प्रिय हैं। वे मोर मुकुट धारण किए, पीतांबर वस्त्रों से सुशोभित, हाथ में छड़ी लिए, अपनी मतवारी चाल से चलते ...
कवधौं सेवाकुंज में ह्वैंहों श्यामतमाल
मैं श्री वृंदावन के सेवा कुंज में कब ऐसा श्याम तमाल वृक्ष बन जाऊँगा, जिसकी लताओं को पकड़कर युगल सरकार श्री श्यामा-श्याम प्रेम भरी लीलाएँ करते हुए विश्...
ठकुराई प्यारी लई सिवकाई पी वांट
वृन्दावन की अनुपम प्रेम-लीला में श्री राधा ने ठकुराई (स्वामित्व) ले ली और श्री कृष्ण ने सेवकाई स्वीकार कर ली। दोनों ने अपने मन को, अपना सर्वस्व, एक-दू...
राधा नाम सों चित रांच
अपने मन को श्री राधा-नाम में पूर्णतः रमा दो। अपने भीतर के कागज़ (अंतःकरण) पर निर्मल और प्रेमपूर्ण रुचि के साथ राधा-नाम की रेखाएँ अंकित कर दो। [1] अंग...
राधा नामपै मैं वारी
मैं खुद को श्री राधा के नाम पर बार-बार बलिदान कर देता हूं। श्री ललित किशोरी कहते हैं कि सांसारिक सुखों के बारे में तो क्या कहना है, यहां तक कि अन्य सभ...
अहो विहारनि ललित लड़ैती मम अपराध न मन में धारो
हे ललित विहारिणी श्री राधा! मेरे अपराधों की ओर मत निहारना। मुझे अपनी दासी मान कर अपनी कृपा दृष्टि डालिए। [1] मुझे श्रीवृन्दावन के किसी कुंज के कोने म...
मोकों आस स्वामिनी तेरी
हे स्वामिनी [श्री राधे]! मुझे तो एक मात्र तुम्हारी ही आशा है। युगल रस का पान किए बिना मेरी अखियाँ जल से पृथक मीन के समान तड़प रही हैं। [1] मेरे प्राण...
ललित किशोरी इत् उत् राधे
जहाँ जहाँ मेरी नज़र पड़ती है वहाँ केवल और केवल प्रिया जी श्री राधारानी ही दिखती हैं।
श्यामा पग दृढ़ गहु सखी
हे सखी! तू श्री श्यामा जू (श्री राधा) के चरणों को दृढ़ता से पकड़ ले, तो तुझे निश्चय ही श्री श्यामसुन्दर मिल जाएँगे। यदि तुम्हें इस सत्य पर लेशमात्र भ...
वृन्दावन चल जाइए
सांसारिक व्याधियों और कष्टों का पूर्णतः त्याग कर, श्री वृन्दावन धाम की ओर प्रस्थान कीजिए। वहाँ पहुँचकर निरंतर 'श्री राधे-राधे' का ही मधुर गान कीजिए औ...
मनुआँ करो निकुंज की बात
"मनुआँ करो निकुंज की बात । जुगुल लाल गुन गान करो, किन जात रसीली रात ।" - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२६२) अरे मनुष्यों निकुंज की बात करो,...
श्रीवृन्दावन वास दीजिये
हे वृषभानु-दुलारी श्री राधिका! अब हमारी यही अभिलाषा है कि आप हमें श्री वृंदावन का वास प्रदान करें। [1] जब आप वंशीवट पर नटनागर श्रीकृष्ण के साथ केली-व...
किशोरी अब मोरी कुमति हरो
किशोरी अब मोरी कुमति हरो । निसदिन तुव चरनन अनुरागी, असी कृपा करो । । - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१५२) किशोरीजी अब मेरी कुमति को आप ह...
प्यारी मोहि दीजै श्री वृन्दावन वास
प्यारी जू मुझे अब आप श्री वृंदावन का वास दीजिए जहाँ भक्त हृदय में प्रेम रस एवं रास का नित्य ही नव नवायमान अनुराग बढ़ता है।
ऐसी कृपा कछु करो किशोरी
हे किशोरी राधे! मुझ पर ऐसी कृपा कीजिए कि मैं आपके श्री चरण-कमलों से सदा लिपटा रहूँ। [1] आपके श्री चरणों की कृपा से आपके नित्य-विहार का सदा अवलोकन करत...
जमुना-पुलिन कुंज गहबर की
ऐसा कब होगा कि मैं यमुना-तट के किसी एकांत कुंज में किसी वृक्ष पर कोयल बनकर कूकूं, अथवा श्री राधा-कृष्ण के चरण-कमलों का भौंरा बनकर मधुर-मधुर गुंजार उन्...
श्री वृन्दावन रेनु को मरहम न जाने कोय
वृन्दावन की रज की महिमा पूरी पूरी कोई भी नहीं जानता।
"राधा नाम ही सों काम"
श्री राधा नाम से ही मेरा एक मात्र काम है। राधा नाम ही मेरा परम धन है क्यूंकि यह कल्पद्रुम (वह वृक्ष जो सारी कामनाओं को पूरा कर देता है) के समान है और ...
नैनन राधे बैनन राधे सैनन राधे कृतानित राधे
श्री राधा मेरी आंखों में हैं, श्री राधा मेरी बोलनी में हैं, श्री राधा मेरे इशारों में हैं और केवल श्री राधा ही मेरी करनी में है। श्री राधा मेरे कानों ...
पद रज तज किमि
श्री राधा के चरणों की परम-पावन रज को छोड़कर योग, यज्ञ, तपस्या, साधना आदि से क्या आशा लगाए बैठे हो? [1] जिनके मुखकमल के स्मरण मात्र से ही अत्यंत आनंद...
श्री वृंदावनरज दरसावै सोई
जो हमें श्री वृंदावन रज एवं वृंदावन का मार्ग दिखाए वही हमारा सच्चा हितैषी है। जो हमारे हृदय में श्री राधा मोहन की छवि को छका दे वही हमारा सच्चा प्रियत...
मेरी जीवनमूरि है
मेरे जीवन की मूल संपदा वृन्दावन की रज है, जिसकी करुणा से मुझे इन नयनों से श्री राधा-कृष्ण के दर्शन संभव हुए हैं।
प्यारी जू अपनी ओर चितैयै
श्री ललित किशोरी कहते हैं, हे प्यारी जू ! कृप्या मुझे किसी भी तरह अपना बना लें (अर्थात मेरे हृदय को अपने चरण कमलों में ले )। कृप्या मुझे आशीर्वाद दें...
जब श्रीवनवास मिलो सजनी तब तीरथ आन गए न गए
यदि श्रीवृन्दावन में वास मिल गया, तब अन्य तीर्थों पर जाने की आवश्यकता नहीं रही। यदि लाड़लीलाल का नाम ले लिया, तब किसी और नाम को लेने की जरूरत नहीं रही...
श्यामा पग लवलीन हो, उन्हीं के हाथ विकाय
श्यामा पग लवलीन हो, उन्हीं के हाथ विकाय । - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२३६.२) श्री कृष्ण, जो रसिको के सिरमौर है,रसिकशेखर है, वे अपने आपको...
राधा नाम की गति न्यारी
राधा नाम कि महिमा अपरम्पार है। यदि सपने में भी कोई राधा नाम पुकारता है, तो यह राधा नाम ठाकुर जी को उस जीव के समीप आने पर विवश कर देता है । श्री वृन्दा...
ऐसी कृपा करो स्वामिनी
हे राधा, मुझे ऐसी आशीष दें कि मुझे युगल नाम अत्यंत प्रिय लगे।
वृन्दावन को जाना हेली
वृंदावन में आने से पहले श्री ललित किशोरी द्वारा लिखे इस पद में वह कहते हैं कि, मेरी आत्मा ने निर्णय लिया है और इसकी इच्छा है कि मुझे केवल वृंदावन में...
जुगल रूप रस चातक नैन
यह नेत्र चातक पक्षी की भाँती युगल रूप रस (वृन्दावन रस) को लालायित हैं। श्री ललित किशोरी जी के शब्दों में युगल सरकार के बिन उनको एक क्षण का भी चैन नही...
श्यामा जुत घनश्याम को मन में राखो ध्यान
जो श्री राधा कृष्ण कि उपासना युगल रूप से करते हैं एवं दिव्य युगल के रूप का निरंतर ध्यान आँसु बहा कर करते हैं, उनको ही रसिक के रूप में पहचाना जा सकता ह...
राधा नाम को आराध
हे जीवों, यदि आप वास्तव में अपना लक्ष्य शीघ्र प्राप्त करना चाहते हैं, तो हर दूसरे आध्यात्मिक साधन को त्याग दें, बस हर श्वास के साथ श्री राधा का नाम जप...
आठों याम वसे उर नैनन ललित माधुरी जोरी जू
अहो मेरी स्वामिनी श्री राधे जू, अब आप मुझपर ऐसी कृपा करें कि आठों याम मेरे नैनन और हृदय में दिव्य जोरी (श्री श्यामा श्याम) कि विराजित रहे ।
" मनुवां शीख हमारी है"
अरे मनुष्यों हमारी सीख है कि तन मन को पूर्ण रूप से ब्रज रज में समर्पित कर दो यही इसकी शोभा है । अरे तू क्यों बेहोश होकर माँ, बाप, बेटा, स्त्री, पति इत...
मौकों आस स्वामिनी तेरी
हे किशोरीजी मुझे केवल आपकी ही आशा है। एक क्षण भी युगल माधुरी के बिना मेरी अँखियाँ ऐसे तड़पती हैं जैसे बिना पानी के मीन।
ऐसी को करिहै श्रीराधा
हे श्रीराधे! इस पूरे ब्रह्मांड में ऐसी परम कृपालुता से युक्त कौन हो सकता है, जो अपने नाम के केवल ‘रा’ अक्षर के उच्चारण मात्र से अपनी शरणागत दासी के हृ...
राधा नाम को आधार
श्री ललित किशोरी जी कहते हैं की उनके जीवन का आधार एक मात्रा श्री राधा नाम ही है । यह वह दिव्य नाम है जो श्री लाल जी निरंतर रटन करते हैं एवं समस्त रस क...
एक नहीं मानेंगे अब हम वृन्दावन जावेंगे
श्रीललितकिशोरीजी उद्घोष करते हैं कि अब हम उस व्यक्ति की तनिक भी नहीं सुनेंगे जो हमें श्रीवृन्दावन धाम जाने से रोकने का प्रयत्न करेगा। हम तो श्रीवृन्द...
ये अभिलाष लडैती मोरी
हे राधारानी, मेरी यही अभिलाषा है की आप ठाकुर जी के संग मुदित विराजें और मैं आपको चकोर पक्षी जैसे चन्द्रमा को देखता है, वैसे देखुं एकटुक।
वृन्दावन धाम नीको ब्रज कौ विश्राम नीको
“ वृन्दावन धाम नीको ब्रज कौ विश्राम नीको । ललित किशोरी नीको नट नीको नन्द को । ” - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (८५) वृन्दावन सबसे आकर्षक ह...
राधा नाम को आधार
श्री ललित किशोरी जी की शब्दों में: “ श्री राधा नाम ही भक्ति का मूल आधार है, उसी नाम के बल पर दोनों पांव पसार कर अर्थात निर्भय होकर सोते हैं। ”
राधा नाम की गति न्यारी
राधा नाम कि महिमा अपरम्पार है। यदि सपने में भी कोई राधा नाम ले लेता है तो ठाकुरजी को विवश कर देता है आने पर।
श्री वृन्दावन वास दीजिये अब यही हमारी आशा है
श्री ललित किशोरी श्री राधा से विनम्र प्रार्थना करती हैं— हे राधे! हमें श्रीवृन्दावन का वास प्रदान करें। यही हमारी एकमात्र अभिलाषा है—जहाँ यमुना का सु...
कालीदह कूल कुंजके माहीं
मेरी यही अभिलाषा है कि मैं कालीदह के तट पर स्थित कुंजों में एक भ्रमरी बनकर वृक्षों की डालियों पर निवास करूँ अथवा निधिवन का तोता या कोयल बन जाऊँ और मधु...
राधा नाम को उर धार
आपको केवल राधा नाम को हृदय से धारण करना है, यह मान कर की किशोरीजी के नाम में वह बैठी हैं। आपको बिना प्रयास के ही श्याम सुन्दर कुञ्ज द्वार में मिल जाएं...
राधा नाम पे मैं वारी
मैं स्वयं को 'राधा' नाम पर बलिदान देता हूं। जो भी इस नाम को प्रेम के साथ रटता है, यह नाम इतना लाभदायक है कि आंखें में दिव्य युगल के रूप का प्रादुर्भा...
जो कोउ वृंदावन रस चाखै
जो बड़भागी जन श्री वृंदावन का रस चख लेता है उसे चौदह भवन एवं तीनों लोकों का सुख सपने में भी नहीं सुहाता। [1] श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि वह तो ...
जुगल लाल छवि अति कठिन
यद्यपि स्वप्न की अवस्था में भी उस अलौकिक युगल-छवि के दर्शन पाना परम दुर्लभ है, तथापि जो भी अनन्य भाव से श्रीवृन्दावन धाम की शरण ग्रहण करेगा, उसे उस द...
नन्द को लाल गोपाल माल उर
फूलों की माला से सुशोभित नन्दलाल श्रीकृष्ण, श्रीराधा के मुख-कमल दर्शन की लालसा में भ्रमर की भांति मंडराते रहते हैं। उन श्री राधा के खंजन-समान नेत्र, म...
स्वामिनि हौं पतितन शिरताज
हे स्वामिनी, मैं पतितों में सिरताज हूँ। इस जगत में मैं तुम्हारी कहलाती हूँ, परंतु फिर भी विमुखों की भाँति इधर-उधर भटक रही हूँ और कोई लज्जा तक नहीं आती...
श्रवण सुनें चहुँ ओर सों
मेरे श्रवण चारों ओर से केवल राधा-नाम की पुकार ही सुनें, और प्रत्येक क्षण नैननों में युगल विहार ही छाया रहे।
अहो लड़ैती प्राण प्यारी श्रीवन कबै बसावोगी
अहो प्राण प्यारी श्री राधे कब आप मुझे अपने निज धाम वृन्दावन में बसाएंगी और कब आप प्रियतम श्री श्याम सुन्दर के संग मधुर तान सुनाएंगी?
आनदेश के गमन को
हे भाई! अपने मन में किसी अन्य स्थान या देश में जाने का विचार स्वप्न में भी न लाओ। श्री धाम वृन्दावन का यह परम-पावन वास और यहाँ होने वाला श्री युगल-सरक...
जोत नैनन मैं युगल युगल जगदीखै
जिन नैनों में युगल सरकार ही केवल बसते हैं एवं हर जगह वह युगल सरकार श्री राधा कृष्ण को ही देखते हैं, ऐसे व्यक्ति सोते, जागते, एवं चलते फिरते, चित्त से ...
येहो स्वामिनि गजगामिनि मनभामिनि
हे मेरी स्वामिनी (श्री राधा), हे गजगामिनी (मस्त हाथी के समान चाल वाली), हे मन को मोहित करने वाली, श्री राधे! प्रियतम रसिक लाल श्री कृष्ण केवल आपके ही ...
अष्टसिद्धि नवनिधि के सुखको वेपरवाहि लुटावेंगे
हम अष्ट सिद्धि और नौ प्रकार की निधियों को बेपरवाह हो कर लुटा देंगे। हम चौदह भवन और त्रिलोक की संपति को भी बहा देंगे। [1] श्री ललित किशोरी जी कहते हैं...
वृन्दावन की चाह करो
अरे मन तू समस्त अच्छी बुरी चाह को मिटा कर एक मात्र केवल और केवल वृन्दावन धाम की चाह कर और हृदय से एकमात्र युगल किशोर से ही नेह (प्रेम) बढ़ा।
श्री वृंदावन रेनु को मरम न पावै कोय
श्री वृन्दावन की रज का वास्तविक मर्म कोई नहीं जान सकता, क्योंकि यहाँ की रज की ऐसी महिमा है कि इस रज में यदि कोई साधक दृढ़ता के साथ श्री राधा-कृष्ण की ...
श्रीराधारानी श्रीवन दृग दरसावौ
हे श्री राधारानी! कृपा करके मुझे श्रीवृन्दावनधाम का दर्शन प्रदान करें जिससे मैं आपके चरणचिह्नों से चिन्हित वृंदावन की रज को अपने समस्त अंगों से स्पर्श...
अब विलम्ब जिन करहुँ लाड़िली
हे प्यारी श्री किशोरीजू, कृप्या देरी न करें! प्रत्यक्ष मेरी ओर अनुग्रहपूर्ण दृष्टि करें। श्री यमुनाजी और श्री ब्रज के किनारे गह्वर वन में मैं बस लग...
कदम कुंज ह्वै हो कबै
मैं कब श्री वृन्दावन की कुंजों में कदम्ब का वृक्ष बनूँगा जिसकी शीतल छाया में प्रिया-प्रियतम अपनी दिव्य केलि-क्रीड़ा और विहार करेंगे।
वृन्दावन धाम नीकौ
श्री वृंदावन धाम का क्षेत्र अति ही सुखद है और वहाँ समय व्यतीत करना आनंदमय है। दिव्य युगल श्री श्यामाजू और श्री श्यामजी के अद्भुत नाम अति ही आकर्षक हैं...
मिली है अंगधार ह्वै
जिस श्री वृन्दावन की रज में श्री युगल-किशोर के विचरण से उनके चरण-कमलों के पदचिह्न अंकित हुए हों, उस वन की रज में लोटने का सौभाग्य मुझे कब प्राप्त होगा...
जुगल रूप रस चातक नैन
यह नेत्र चातक पक्षी की भाँती युगल रूप रस (वृन्दावन रस) को लालायित हैं। श्री ललित किशोरी जी के शब्दों में युगल सरकार के बिन उनको एक क्षण का भी चैन नहीं...
मनुआँ करो निकुंज की बात
अरे मनुष्यों निकुंज की बात करो, इस मधुर रसीली उपासना में नित्य ही श्री युगल स्वरुप निकुंज के प्रिया प्रियतम का गुणगान करो।
प्यारी जू अपनी ओर चितैयै
श्री ललित किशोरी कहते हैं, हे प्यारी जू ! कृप्या मुझे किसी भी तरह अपना बना लें (अर्थात मेरे हृदय को अपने चरण कमलों में ले )। कृप्या मुझे आशीर्वाद दें ...
कुंजबिहारिनि लाड़िली मेरी जीवन प्राण
श्री ललित किशोरी जी कहते हैं, "श्री लाड़ली कुँजबिहारिणी किशोरी जी ही मेरे जीवन के प्राण (आत्मा) हैं, और उनके सुख में सुखी रहना मेरे जीवन का एकमात्र उद...
अहो लड़ैती प्राण प्यारी श्रीवन कबै बसावोगी
अहो प्राण प्यारी श्री राधे कब आप मुझे अपने निज धाम वृन्दावन में बसाएंगी और कब आप प्रियतम श्री श्याम सुन्दर के संग मधुर तान सुनाएंगी?
किशोरी अब मोरी कुमति हरो
किशोरीजी अब मेरी कुमति को आप ही ठीक करिए। अब तो ऐसी कृपा करिये कि निरंतर आपके चरणों कि यह अनुरागी बनी रहे।
जुगल लाल छवि अति कठिन
यहाँ तक कि सपने में भी दिव्य युगल छवि देखना बहुत कठिन है, परन्तु जो श्री वृन्दावन धाम जाएगा, उसे निश्चित ही वह छवि देखने को मिलेगी।
मौकों आस स्वामिनी तेरी
हे किशोरीजी मुझे केवल आपकी ही आशा है। एक क्षण भी युगल माधुरी के बिना मेरी अँखियाँ ऐसे तड़पती हैं जैसे बिना पानी के मीन।
" मनुवां शीख हमारी है"
अरे मनुष्यों हमारी सीख है कि तन मन को पूर्ण रूप से ब्रज रज में समर्पित कर दो यही इसकी शोभा है | अरे तू क्यों बेहोश होकर माँ, बाप, बेटा, स्त्री, पति इत...
आठों याम वसे उर नैनन ललित माधुरी जोरी जू
अहो मेरी स्वामिनी श्री राधे जू, अब आप मुझपर ऐसी कृपा करें कि आठों याम मेरे नैनन और हृदय में दिव्य जोरी (श्री श्यामा श्याम) कि विराजित रहे |
प्यारी मोहि दीजै श्री वृन्दावन वास
प्यारी जू मुझे अब आप श्री वृंदावन का वास दीजिए जहाँ भक्त हृदय में प्रेम रस एवं रास का नित्य ही नव नवायमान अनुराग बढ़ता है ।
श्यामा पग लवलीन हो, उन्हीं के हाथ विकाय
श्री कृष्ण, जो रसिको के सिरमौर है,रसिकशेखर है, वे अपने आपको उन्हीं को बेचते है जो श्री राधा के चरणों की भक्ति में तल्लीन रहते हैं।
श्यामा पग दृढ़ गहु सखी
दृढ़ता पूर्वक श्री राधा रानी के चरणों में जाओ, वहां निश्चित है की श्याम सुन्दर मिलेंगे ही मिलेंगे। यदि तुम नहीं मानते तो श्याम सुन्दर को राधा रानी के च...
वृन्दावन चल जाइए
संसार की सभी मानसिक व्याधियों को त्यागकर वृन्दावन चले जाओ। वहाँ 'राधे राधे' नाम को हृदय से गाओ और श्री राधारानी को आधे क्षण के लिए भी न भूलो।
राधा नाम को आराध
हे जीवों, यदि आप वास्तव में अपना लक्ष्य शीघ्र प्राप्त करना चाहते हैं, तो हर दूसरे आध्यात्मिक साधन को त्याग दें, बस हर श्वास के साथ श्री राधा का नाम जप...
सोय सोय सबकाम विगारा
अरे मन ! आप अनंत काल से अज्ञानता की नींद में सो रहे हैं और आपने अपना भविष्य खराब कर लिया है। अरे मन ! यह दुर्लभ अवसर जा रहा है और आप गौर श्याम युगल रस...
Mo Mana Kab Anurgaihai
Mo Mana Kab Anurgaihai, Jugul Kamalpag Teer.Jyon Pyaase Ki Laalsa, Nirmal Seetal Neer.- Shri Lalit Kishori, Abhilash Madhuri, Vinay Shringar Shatak (1...
बोलौ बन राधे सुखरासी
हे सुख राशि लाड़ली [श्री राधे], आप ही बताओ, मेरे अवगुण तो कितने होंगे, परंतु आप तो अपार करुणा की समुद्र हो, अत: आप मेरे अवगुणों को न विचारते हुए मुझ प...
कौन चूक चित धरी स्वामिनी जो मम सुरति विसारी
हे स्वामिनी (राधारानी) ऐसा मुझसे कौन सा अपराध बन गया कि आपने मुझे भुला ही दिया। [1] ऐसा क्या हुआ कि आपने मुझे अपनी निज सेवा से हटा दिया और वृंदावन से...
वृन्दावनधाम नीको व्रजको विश्राम नीको
श्री वृन्दावन धाम अत्यंत सुंदर है, ब्रज मंडल का परम विश्राम सुखद है। श्यामा श्याम का नाम परम सुंदर एवं कल्याणकारी है और उनका यह धाम आनंद का साक्षात मं...
कवधौं कृपा लाड़िली ह्वै है
प्यारी श्री लाड़िलीजू (श्री राधा) की मुझ पर कब कृपा होगी, कि मैं भी सदा के लिए श्री वृन्दावन में वास करूँगा? कब मैं इन आँखों से श्यामाश्याम की उस अनुप...
श्री वृन्दावन वास दीजिये अब यही हमारी आशा है
श्री ललित किशोरी श्री राधा से विनम्र प्रार्थना करती हैं— हे राधे! हमें श्रीवृन्दावन का वास प्रदान करें। यही हमारी एकमात्र अभिलाषा है—जहाँ यमुना का सुर...
श्रवण सुनें चहुँ ओर सों, राधा नाम पुकार
मेरे श्रवण चारों ओर से केवल राधा नाम पुकार ही सुनें, और हर क्षण नैनन में युगल विहार ही छाया रहे ।
राधा नाम पे मैं वारी
मैं स्वयं को 'राधा' नाम पर बलिदान देता हूं। जो भी इस नाम को प्रेम के साथ रटता है, यह नाम इतना लाभदायक है कि आंखें में दिव्य युगल के रूप का प्रादुर्भाव...
राधा नामपै मैं वारी
मैं खुद को श्री राधा के नाम पर बार-बार बलिदान कर देता हूं। श्री ललित किशोरी कहते हैं कि सांसारिक सुखों के बारे में तो क्या कहना है, यहां तक कि अन्य सभ...
श्यामा जुत घनश्याम को मन में राखो ध्यान
जो श्री राधा कृष्ण कि उपासना युगल रूप से करते हैं एवं दिव्य युगल के रूप का निरंतर ध्यान आँसु बहा कर करते हैं, उनको ही रसिक के रूप में पहचाना जा सकता ह...
राधे राधे जो जन कहै। महा प्रेम रस सोई लहै
राधे राधे जो जन कहै। महा प्रेम रस सोई लह|| प्रिया लाल तिनके सुख ढरें। रीझि रीझि अंक में भरें|| छिन छिन अति आनंद बढ़ाये। श्री कुंज बिहारिनि निरखि सिहाव...
राधा नाम को उर धार
आपको केवल राधा नाम को हृदय से धारण करना है, यह मान कर की किशोरीजी के नाम में वह बैठी हैं। आपको बिना प्रयास के ही श्याम सुन्दर कुञ्ज द्वार में मिल जाएं...
जब श्रीवनवास मिलो सजनी तब तीरथ आन गए न गए
यदि श्रीवृन्दावन में वास मिल गया, तब अन्य तीर्थों पर जाने की आवश्यकता नहीं रही। यदि लाड़लीलाल का नाम ले लिया, तब किसी और नाम को लेने की जरूरत नहीं रही...
अहो विहारनि ललित लड़ैती मम अपराध न मन में धारो
हे ललित विहारिणी श्री राधा! मेरे अपराधों की ओर मत निहारना। मुझे अपनी दासी मान कर अपनी कृपा दृष्टि डालिए। [1] मुझे श्रीवृन्दावन के किसी कुंज के कोने मे...
जोत नैनन मैं युगल युगल जगदीखै
जिन नैनों में युगल सरकार ही केवल बसते हैं एवं हर जगह वह युगल सरकार श्री राधा कृष्ण को ही देखते हैं, ऐसे व्यक्ति सोते, जागते, एवं चलते फिरते, चित्त से ...
Niko Lage Radha Var Pyaro
Niko Lage Radha Var Pyaro.Mor Mukut Piyaro Patuka Hai, Lakuti Kar Matwaro. [1]Rokat Gail Chhail Albelu, Natvar Vesh Sanwaro.Lalit Kishori Mohan Rasiya...
Yeho Swamini Gajgamini Manbhamini
(Raag Paraj)Yeho Swamini Gajgamini Manbhamini, Rasiya Lal Tiharo. [1]Karunadith Neeth Avaloko, Deen Dasa Meri Nirwaro. [2]Lalit Kishori Shrivan Vithin...
Kavadhau Sevakunj Mein
Kavadhau Sevakunj Mein, Hvaihon Shyamatamal.Latika Kargahi Viramihain, Lalit Ladaitilal.- Shri Lalit Kishori, Abhilash Madhuri, Vinay (56)When will I ...
Moson Nahin Kachhuk Baniaayi
(Raag Malkaus)Moson Nahin Kachhuk Baniaayi.Hon Sadaiv Augunki Bhaajan, Kooti Kooti Kari Bhari Burayi. [1]Haha Kripakaraun Swamini Ab, Tuv Padapankaj M...
Swamini Houn Patitan Shirataj
(Raag Jangla)Swamini Houn Patitan Shirataaj,Teri Jagat Kahaay Bimukh Jyon, Dolat Lagat Na Laaj. [1]Shreevan Begi Basaay Ubaaro, Naahin Param Akaaj.Lal...
Jugal Bihari Virah Mein Nahin Ab Avkas
Jugal Bihari Virah Mein, Nahin Ab Avkas.Lalitkishori Deejiye, Sri Vrindaban Vas.- Shri Lalit Kishori, Abhilash Madhuri, Vinay Shringar Shatak (98)The ...
Shyama Pag Lavleen Ho Unhi Ke Hath Vikaay
Shyama Pag Lavleen Ho, Unhi Ke Hath Vikaay.Tohi Kar Mein Ye Bhattu, Mohan Vikihai Aay.- Shri Lalit Kishori, Abhilash Madhuri, Vinay (236.2)Shri Krishn...
He Swamini Shri Kunj Viharini
(Raag Khammach)He Swamini Shri Kunj Viharini, Vegi Khavari Meri Leejai.Seva Reet Kachu Nahi Jaanau, Chook Chhima Kari Deejai. [1]Ati Adheen Deen Rati ...
Kavadhau Kripa Ladili Hvahi Hai
(Raga Khammacha) Kavadhaum Kripa Ladili Hvahi Hai, Shrivana Mahin Vasaunri.Shyamashyama Mahachavi Anupama, Ina Nainana Nirakhaunri. [1] Dai Galavaha J...
Kalidah Kool Kunjake Mahin
(Raag Jaijaivanti)Kalidah Kool Kunjake Mahin, Bhramari Hvai Dumadari Rahaun, Keer Kokila Hvai Nidhuvanamein, Madhure Radhanam Kahaun. Gulm Lata Gahiva...
Aandesh Ke Gaman Ko
Aandesh Ke Gaman Ko, Matkar Vir Vichar.Pher Kahan Vrindavipin, Kahan Yah Jugal Bihar.- Shri Lalit Kishori, Abhilash Madhuri, Vrindavan Shatak Pratham ...
Pashu Pakshi Pashan Hon
Pashu Pakshi Paashaan Hon, Trin Anu Raj Braj Gail.Koop Baavari Keejiye, Lalit Kishori Chhail.- Shri Lalit Kishori, Abhilash Madhuri, Vinay Shringar Sh...
Pyariju Kaun Tihari Khot
(Raag Bhairavi)Pyariju Kaun Tihari Khot.Moso Vani Na Kachu Vai Swamini, Hon Augunki Mot. [1]Shrivan Daras Dikhayke Radhe, Meto Jiyaki Chot.Lalit Kisho...
Keet Patang Pipilika Markat Bhring Mayur
Keet Patang Pipilika, Markat Bhring Mayur.Jugalvihari Kijiye, Vrindavan Ki Dhoor.- Shri Lalit Kishori, Abhilash Madhuri, Vinay Shringar Shatak (97)Whe...
Jamuna-Pulin Kunj Gahbar Ki
(Raag Chaiti Gauri)Jamuna-Pulin Kunj Gahbar Ki, Kokil Hvai Drum Kuk Machaun.Pad-Pankaj Priy Laal-Madhup Hvai, Madhure-Madhure Gunj Sunaun. [1]Kookar H...
Aisi Ko Karihai Shri Radha
(Raag Iman) Aisi Ko Karihai Shri Radha, Metyo Timir Hiye Dasi Ko, Kahat Naam Nij Aadha. [1] ‘Lalit Kishori’ Charan Upasan, Jo K...
Thakurai Pyari Lai Sevkaai Pi Vant
Thakuraai Pyaari Lai, Sivkaai Pi Vaant.Preeti Reeti Yak Saar Sakhi, Dai Manon Yak Saant.- Shri Lalit Kishori, Abhilash Madhuri, Phutkar Pad (69)In div...
Radha Naam Son Chit Raanch
(Raag Desa) Radha Naam Son Chit Raanch.Radha Naam Rekh Suchi Ruchison Antas Kaagad Khaanch. [1]Radha Naam Ank Aabhooshan Bhooshit Kar Ang Naach....