SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeSaintsdndi svami shri hare krishnanand sarasvati ‘hare krishna’
All Saints
D
Rasik Saint Biography

dndi svami shri hare krishnanand sarasvati ‘hare krishna’

Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

dndi svami shri hare krishnanand sarasvati ‘hare krishna’ Collected Verses

general

पुण्य का प्रताप उदय होता कई जन्मों का

अनेक जन्मों के पुण्य का फल तब प्राप्त होता है जब किसी मनुष्य को एक बार ब्रज में आने का अवसर मिलता है। [1] सेवाकुंज, वंशीवट, कालीदह आदि को देख-देखकर ...

general

ताकत शरीर में न रही श्याम सुन्दर जो

हे श्याम सुंदर, मेरे इस मायिक शरीर में इतनी ताक़त कहाँ कि मैं ध्रुव के समान एक पैर पर खड़े होकर भजन करूँ।[1] भीष्म पितामह की तरह ऐसी दृढ़ता भी कहाँ क...

general

वेदों में न देखा ब्रह्म शास्त्रों में न देखा ब्रह्म

न मैंने उन्हें वेदों के मंत्रों में देखा, न ही ब्रह्म शास्त्रों के गूढ़ ज्ञान में। मैंने वेदांत के मर्म और ब्रह्म के मूल में भी उन्हें प्राप्त नहीं कि...

general

कोटि कोटि कंचन अमूल्य रत्न राशियों का

श्री कृष्ण भले ही मुझे कोटि-कोटि स्वर्ण मुद्राएं एवं अमूल्य रत्नों के भण्डार का लोभ क्यों न दिखलायें, लेकिन मैं उनसे कभी मुख नहीं मोडूँगा। [1] पिशाच...

general

एक रज- रेणुका पै रजत

वृंदावन की एक रज रेणुका पर चाँदी का पहाड़ न्योछावर है। श्री यमुना जी की दिव्यता पर क्षीर सिंधु [जहां लक्ष्मी नारायण का निवास है] न्योछावर है। [1] अन...

general

सेवाकुञ्ज जाके ब्रजधूल को चढ़ाओ शीस

वृंदावन के सेवाकुंज वन में जाओ और वहाँ की पावन रज को अपने सिर पर लगाओ; वहाँ सुहावने तमाल वृक्षों का सौंदर्य निहार लो। [1] बंशीवट में श्री बांके बिहा...

general

प्रेमी जन देख देख होते हैं प्रसन्न जिसे

वृंदावन धाम में स्थित यह दिव्य श्री निधिवन राज, जहाँ के दर्शन से प्रेमीजन अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं, और जहाँ की भूमि और वायु में प्रेम की वर्षा होती ...

general

ब्रज में प्रवेश करते ही कर्ण कुहरों में

ब्रजधाम में प्रवेश करते ही कानों में श्री राधे-श्याम की मधुर ध्वनि गूँजने लगती है, जो मन को आनंदमय कर देती है। [1] जैसे-जैसे इस पावन धाम में कदम बढ़त...

general

कहीं मान प्रतिष्ठा मिले न मिले

भले ही मान-सम्मान मिले अथवा अपमान ही गले लगाना पड़े, हम दोनों स्थितियों में संतुष्ट रहेंगे। [1] हमें भोजन और जल की कोई परवाह नहीं, चाहे हमें व्रत करक...

general

स्वर्ग से विशेष जहाँ

ब्रज-रस रसिकजन स्वर्ग जाने की तुलना में वृंदावन जाने के लिए अधिक उत्साहित रहते हैं। [1] यहाँ एक बार "कृष्ण कृष्ण" का प्रेमपूर्वक उच्चारण करने से प्रत...

general

धन्य धन्य वृंदावन बासी विलाव चूहे जो

धन्य धन्य हैं वृंदावन के चूहे जो वृंदावन के मंदिरों के भीतर घुसकर प्रभु का प्रसाद प्राप्त करते है। [1] धन्य धन्य हैं वृंदावन के कीट-पतंग क्योंकि वे उ...

general

जाये जिसे जाना हो हिमालय तप करने

जिसे हिमालय जाकर तप करना हो वो वहाँ जाकर खूब तपस्या करे, जिसे प्यारी गंगा के किनारे जाना हो वह भी शीघ्र वहाँ जाए। [1] जिसे गुफाओं में योगासन लगाने का...

general

जन्म हुआ भाग्य से पवित्र भूमि वृन्दावन

ब्रजवासी बालक कहता है: जहां जन्म लेने के लिए देवताओं का राजा भी तरसता है ऐसी पवित्र भूमि श्री धाम वृंदावन में भाग्य से हमारा जन्म हुआ है। [1] यह वही...

general

ऐसी क्या आवश्यकता दुकूल सुखकारी की

रेशमी वस्त्रों की हमें क्या आवश्यकता? हम तो वृंदावन की प्यारी रज को ही अपनी देह से लगाएँगे। [1] अनेक प्रकार के भोजन के स्वाद लेकर हम क्या करेंगे? हम ...

general

हम देखेंगे दर्शन देने हमें कब लौं तुम मोहन! आते नहीं

एक भक्त श्यामसुंदर से कहता है—हे प्यारे! हम भी अब देखेंगे कि तुम कब तक हमें अपने साक्षात दर्शन से वंचित रखते हो? अब हमारी भी प्रतिज्ञा है, जब तक तुम आ...

general

कौन दिन होगा नाथ

हे नाथ, ऐसा कौन सा दिन होगा जब मैं वृन्दावन में बसूँगा ? जहाँ नित्य प्रातःकाल उठकर श्री यमुना जी में स्नान करूँगा। [1] मैं नित्य हरेकृष्ण ! हरेकृष्ण ...

general

प्रेम के समेत रहो

श्री राधा कृष्ण के प्रेमियों की संगती में प्रेम से रहो एवं प्रेम से ही श्री यमुना जल में स्नान करो। [1] वंशीवट में प्रेम से नित्य रास का दर्शन करो एव...

general

किस भांति छुएँ अपने कर सों

हे श्री कृष्ण, मैं आपके चरण-कमलों का स्पर्श अपने हाथों से कैसे करूँ, जो अति सुकुमार हैं? मेरी आँखों में आपका अत्यंत सुंदर और उदार रूप बसा हुआ है। [1]...

general

जिह्वा केवल रट रही

यदि जिह्वा केवल “राधे श्याम" आदि नाम रट रही है और मन का चिंतन भगवान में नहीं है तो ऐसा सुमिरन किसी काम का नहीं है।

general

कलित कदम्बों के कमनीय केलि कुंजों में

जहां कल-कल करता हुआ यमुना के किनारे पर सुशोभित सुन्दर कदम्ब वृक्षों से निर्मित कमनीय केलि कुंज हो। [1] जहाँ नटवर वेशधारी, तीखी चितवन से प्रेम बाण चला...

general

स्वप्न तुल्य इस जगत से

स्वप्न तुल्य इस जगत से डरना अज्ञानता है। अत: निर्भय होकर भगवान श्री कृष्णचन्द्र का प्रेम में उन्मत्त होकर भजन करो।

general

काँटेदार करील के वृक्ष जिस भूमि पर

जिस भूमि पर काँटेदार करील के वृक्ष हैं, और जहाँ हर ओर खारे जल से भरे कूप ही दिखाई देते हैं। [1] जहाँ ब्रजवासी लोग आपस में गाली देते हुए ही बात करते...

general

जल पूर्ण यमुना टिकारी पर टिकी हुई

आज भी यमुना जी तटों से होकर बहती है। वंशीवट के मध्य में रास मंडल फैला हुआ है। [1] वही हवा बहती है, और वही आकाश है। निधिवन आज भी निकुंज लताओं से ढका ह...

general

भक्तों के विहार हेतु भारत-वसुंधरा पे

भक्तों के विहार के लिए, भारत भूमि पर, श्री गोविंद ने स्वयं गोलोक को उतारा है। [1] यह सुंदर कमलों का सरोवर है एवं महिमा का सागर है, यह रस का समुद्र है...

general

न बच्यौ कोई वेदपुराण पढ़े

ना तो वेदों और पुराणों को पढ़ने वाले बचे, और ना ही शीश पर जटाएँ धारण करने वाले। [1] ना ही जंगल में वास करने वाले बचे, और ना ही ऊँचे महलों में रहने वा...

general

कह देता झट जीभ से

हे मन, तू जीभ से तो तुरंत “राधे श्याम” का जाप करने को कह देता है, परंतु तू स्वयं बड़ा मक्कार है और कहीं और भटकता रहता है।

general

कल कुण्डल केकी किरीट लसै

श्रीकृष्ण के कानों में सुंदर कुंडल हैं और सिर पर मोरपंख मुकुट दमक रहा है। उनके घुंघराले सुंदर केश और उन सुंदर केशों को सुंदर रूप से सँवारे हुए श्री कृ...

general

अपने वशमें व्रजराज किये

जिन्होंने अपने आधे वचनों के अमृत से व्रजराज श्रीकृष्ण को अपने वशीभूत कर लिया, ऐसी श्रीराधा की जय हो। जिनकी कृपा से देवताओं और किन्नरों के भी समस्त कार...

general

खंजन मृग सरमाय के

श्री श्यामसुन्दर के चंचल नेत्रों की अनुपम शोभा को देखकर खंजन पक्षी और हिरण लज्जित होकर दिन-रात जंगल में रहने लगे। इसी प्रकार, मछली और कमल भी उनके नयनो...

dham

श्री राधा राधारानी के पग पग पर प्रयाग

एक वृंदावन वासी, वृंदावन की महिमा का गुणगान करते हुए कहते हैं कि श्री राधा रानी जहाँ-जहाँ चलती हैं, वहाँ-वहाँ प्रयाग का स्वरूप बन जाता है। जिन कुंजों ...

general

हरिनाम है केवल नित यहाँ

इस संसार में केवल श्री हरि का नाम ही नित्य है; इसके अतिरिक्त सब कुछ अनित्य है — यह विचार करना सीखो। [1] दूसरों की निन्दा, असत्य वचन और विवाद का त्याग...

general

वृन्दावन वास कर रज में विश्राम भला

श्री वृंदावन धाम में वास करते हुए यहाँ की रज में विश्राम करना उत्तम है, न कि मखमली गद्दों के प्रति मोह बनाए रखना। [1] वृंदावन धाम में वास करते हुए यह...

general

तज शेष खगेश को दौड़ते जो

यदि स्वप्न में भी कोई दुखी जीव आह भरकर उन्हें पुकारता है, तो वे (श्रीकृष्ण) शेषनाग और गरुड़ आदि को भी त्यागकर उसकी ओर दौड़ पड़ते हैं। जिन्हें दुर्योधन...

general

धरा धाम में माधव ने इतना किसी गोपिका को अपनाया नहीं

इस धराधाम पर श्रीकृष्ण ने किसी भी गोपी को उतना नहीं अपनाया, जितना उन्होंने उस एक गोपी (श्रीराधा) को अपनाया, जिन्हें अपने साथ वे रास में अकेले ले गए। इ...

general

चित चोर छिपोगे कहाँ तक यों

हे चितचोर (श्यामसुंदर)! कहाँ तक छिपोगे, हमारे हृदय को तब तक शांति नहीं मिलेगी जब तक तुम हमें प्रकट रूप से दर्शन नहीं देते। [1] हम तुम्हारा ध्यान करना...

general

एक बार अयोध्या जाओ

चाहे कोई एक बार अयोध्या की यात्रा करे, दो बार द्वारिका जाए या तीन बार त्रिवेणी में स्नान कर ले। [1] चाहे कोई चार बार चित्रकूट जाए, सौ बार नासिक जाए, ...

general

हरेकृष्ण ही कृष्ण का कीर्तन में

जहाँ श्रीकृष्ण का नाम-संकीर्तन दसों दिशाओं में गूंज रहा है। [1] सुनो! यमुना के पावन जल की वह मधुर सरसराहट, जहाँ श्रीकृष्ण की बांसुरी की दिव्य तान नित...

general

गिरि से गिराओ हमें

हे नाथ, चाहे पहाड़ से हमें गिरवा दो, या हाथी से कुचलवा दो, या अतुल्य निर्दयता से अग्नि में जलवा दो। [1] हे नाथ, चाहे सांप से डसाओ, किसी रोग से कष्ट ...

general

जब प्रेम के पन्थ में पैर दिया

जब प्रेम के मार्ग पर एक बार चरण रख दिया, तब फिर उसमें मिलने वाले दुःखों से क्यों भयभीत होना? इस मार्ग में जल और भोजन की कामना तक छोड़नी पड़ती है, और न...

general

ब्रजवासी नहीं सब देवता हैं

ब्रजवासी साधारण लोग नहीं, सभी देवता ही हैं — ऐसी भावना हम हृदय में जागृत कर रहे हैं। दीर्घकाल की प्रतीक्षा के बाद, अब मेरे प्रभु धीरे-धीरे मेरे समीप आ...

strotra

ज्यों ज्यों निरखत राधिका

जैसे-जैसे श्री राधा महारानी जू अपने तीखे और कजरारे नेत्रों की कमान तानकर प्रियतम की ओर निहारती हैं, वैसे-वैसे श्यामसुंदर का माधुर्य और भी अधिक निखर कर...

shloka

बड़े जोर की प्यास लगी उर में

विरह-व्याकुल गोपी अपने प्राणप्रिय श्री कृष्ण को पुकारते हुए कह रही हैं— हे सखा! मेरे हृदय में आपके मिलन की बड़े ज़ोर की प्यास जगी है, आप शीघ्र आकर मु...